गुरू के आदेशो का पालन कराये, स्त्रियो के अनादर से बचो. पं दशरथभाईजी

महावीर अग्रवाल
मंदसौर ६ जनवरी ;अभी तक;  श्री सुयश रामायण मण्डल जनता काॅलोनी के द्वारा नई आबादी स्थित संजय गांधी उघान में दिनांक 2 जनवरी श्री रामकथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन दोपहर 12ण्30 से सांय 5 बजे तक पं श्री दशरथ भाईजी व्यासपीठ पर विराजित होकर धमार्लुजनो श्री रामकथा को श्रवण करा रहे है। गुरूवार को रामकथा के पंचम दिवस पं दशरथभाईजी ने प्रभु रामए लक्ष्मण भरत व शत्रुधन चारो राजकुमारो की बाल्यवस्था नामकरण संस्कार यज्ञोपवित संस्कार वेदरा संस्कार एवं विश्मामित के द्वारा किये गये यज्ञ व उसमें राम लक्ष्मण के शौयर् की कथा धमार्लुजनो को श्रवण करायी। पं दशरथ भाईजी ने कहा कि माता पिता व परिवारजन यदि संस्कारित हो तो संतान भी संस्कारित होती है। आयोध्या नरेश दशरथजी व उनकी तीनो पत्निया कोशल्या कैकयी व सुमित्र धमर् व संस्कारो का आचरण करने वाली थी। रघुकुल की रीति व संस्कारो के अनुरूप राजा दशरथजी के जीवन में ज्ञान भक्ति की सम्यक घारा प्रवाहित भी ़ऋषि मुनियो का आद सत्कार करना जरूरतमंदो को दान देना व प्रभु का नित्य स्मरण उनके जीवन के नित्य कमर् थे। इन सबका प्रभाव भी राम सहित चारो के जीवनभर पर पडा।
             गुरू के आदेशो का पालन करो. पं दशरथभाईजी ने कहा कि राजा दशरथजी परम गुरू भक्त थे महषिर् वशिष्ट के आश्रम में रहकर राम सहित चारो राजकुमारो ने जब विघा अध्ययन पूणर् कर लिया उस समय उनकी किशोरवास्था थी। ऐसे समय में महषिर् विश्वामित्र ने राजा दशरथजी से यज्ञो की आसुरो से रक्षा के लिये राम लक्ष्मण को भेजने का आग्रह किया तो पिता ने गुरू की आज्ञा का पालन किया और राम लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेज अथार्त गुरू जब भी कोई आदेशकरे उसका अक्षरत पालन करना चाहिए।
                  मान व अपमान में सम रहो. पं दशरथभाईजी ने कहा कि जीवन में अधिक सम्मान मिलने पर गुब्बारो की भांति फुलना नही चाहिए उसी प्रकार अपमान होनेपर अधिक क्रोधित होने या चिन्तन करने की जररूत नही है। जीवन में मान व अपमान दोनो में सम अथार्त सम्मान रहो इसी में कल्याण हैं । सुख व दुख में भी जो मुस्कारता रहे नही मानव श्रेष्ठ है प्रभु राम ने कठिन समय में भी धैयर् नही खोया और विपरित परिस्थितियो में भी अपने पर नियंत्रण बनाये रखे।
                   जरूरतमंदो की मदद करो आतिथ्य सेवा में पीछे मत रहो. पं दशरथभाई ने कहा कि श्रीरामकथा प्ररेणा देती है कि हम आतिथ्य सेवा में पीछे नही रहे जरूरतमंदो की मदद करे जो भी पत्र व्यक्तिा दान मांगने आए उसे अपने सामथर् के अनुसार दान दे यदि नही दे सके तो उसका अपमान कदापि नही करे। ग्रहस्थ व्यक्ति का कतर्व्य है कि घर आये मेहमान चाहे वह कोई भी हो उसे भोजन कराये जलपान कराकर ही विदा करे।
स्त्रियो का अनादर मत करो. पं दशरथ भाईजी ने कहा कि जिस घर परिवार में महिला का अनादर अथार्त अपमान होता है वह धर परिवार नरक के समान है। रामायण शिखा देती है कि स्त्रियो का कभी अपमान मत करो। सती के पिता प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री का अपमान किया तो फलस्वरूप उसे शिव के हाथो करना पडा। रावण ने माता जानकी की हरण किया तो उसे शिव के हाथो मरना पडा अथार्त जो भी व्यक्ति चाहे वह कोई भी हो उसे स्त्रियो के अनादर से बचना ही चाहिए अन्थया इसका परिणाम सदैव विनाशकारी ही होता है। महाभारत की कथा में ही दुयोर्धन ने द्रोपति का अपमान किया था इसी कारण समुचे कुल का नाश हो गया। इसलिय स्त्रियो के अनादर से बचे।
इन्होने लिया पौथी का लाभ. रामकथा के पंचम दिवस गुरूवार को रेडक्रास सोसायटी के पूवर् चेयरमेन प्रितेश चावला रामचरित मान की पौथी का पूजन किया। इस मौके पर स्वणर्कार समाज व कुमावत समाज के जनप्रतिनिधी ने भी मानस की पौथी पूजन किया गया। वरिष्ठ पत्रकार श्री महावीर प्रकाश अग्रवाल ने श्रीमती पुष्पादेवी अग्रवाल के साथ पौथी पूजन किया। कुमावत समाज के पूवर् अध्यक्ष श्री रूपलाल कुमावतए एवं कुमावत समाज के वरिष्ठजन शंकरलाल कुमावत रतनलाल कुमावत मोहनलाल कुमावतए कन्हैयालाल कुमावत मांगीलाल कुररिया रामचंद्र कुमावत आंनदीलाल कुमावत एवं रविन्द्रजी त्रिवेदी ने भी पौथी पूजन किया।