गृहस्थ जीवन में रहकर भी मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है – चैतन्यानन्दगिरीजी मसा

2:43 pm or July 22, 2022

महावीर अग्रवाल

मंदसौर २२ जुलाई ;अभी तक;  नगर के खानपुरा स्थित श्री केशव सत्संग भवन में श्री चैतन्यानन्दगिरीजी मसा का दिव्य चातुर्मास चल रहा है। जिसमे प्रवचनों के अंतर्गत संतश्री द्वारा भक्तों को श्रीमद् देवी भवगती महापुराण का श्रवण करवाया जा रहा है।

22 जुलाई शुक्रवार को धर्मसभा में चैतन्यानन्दगिरीजी महाराज साहब ने महाऋषि 18 पुराणों के रचयिता वेदव्यास जी और उनके पुत्र सुखदेव जी के वार्तालाप का वृतांत सुनाया। संतश्री ने कहा कि वेदव्यास जी पुत्र न होने के कारण दुखी रहते थे तब जगदम्बिका मां भगवती की आराधाना की ओर भगवान शिव के आशीर्वाद से उन्हें सुखदेव नाम के पुत्र की प्राप्ति हुई।

संत श्री ने बताया कि जीवन मंे दुख कभी भी आ सकते है हम सोचे की हमारे जीवन में केवल सुख ही सुख हो ऐसा नही हो सकता। संत श्री ने बताया कि बडी तपस्या के बाद वेदव्यास जी को पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन उनका चिंतन खत्म नहीं हुआ। वेदव्यास जी अपने पुत्र को गृहस्थ जीवन में डालना चाहते थे लेकिन सुखदेव ब्रम्हचर्य के पथ पर चलकर सन्यासी जीवन जीना चाहते थे। लेकिन वेदव्यास को यह मंजूर नहीं था उन्होने कई प्रकार से सुखदेव को मनाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं मानें। उन्होने अपने पुत्र से कहा कि मोक्ष गृहस्थ जीवन में रहकर भी प्राप्त किया जा सकता है। गृहस्थ जीवन में रहकर हम हवन, पूजा, अर्चना, यज्ञ आदि कर भगवान को प्राप्त कर सकते है इसक उदाहरण राजा जनक है लेकिन सुखदेव जी नहीं माने।  अंत में वेदव्यास जी ने मां भगवती की आराधना की ओर सुखदेव जी की शादी हुई जिससे उनको तीन संतानों की प्राप्ति हुई लेकिन बाद सुखदेव जी गृहस्थ जीवन को छोडकर भगवार शंकर की शरण में चले गये।

विद्वान के साथ ज्ञानवान बने

धर्मसभा में संत श्री ने कहा कि शास्त्रों और पुराणों को अध्ययन कर आप विद्वान के साथ ज्ञानवान बने। क्योंकि सिर्फ विद्वान बनने से कुछ नहीं होगा। शिष्टाचार हम ज्ञानवान होने के बाद ही आता है। धर्मसभा में आज शनिवार को संतश्री द्वारा श्रीमद देवी भगवती भागवत पुराण के अनुसार पांडव वंश की उत्तपति के बारे में बताया जायेगा। केशव सत्संग भवन खानपुरा में प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से 10.00 बजे तक श्री चैतन्यानन्दगिरीजी मसा के प्रवचन हो रहे है।

धर्मसभा में जगदीशचंद्र सेठिया, मदन कुमार गेहलोत, गिरजाशंकर भावसार, आर सी पंवार, रविन्द्र पाण्डेय, गुलाबचंद्र उदिया, आन्नदीलाल मोदी, कोमलचंद जैन खजुरीसारंग, पं लक्ष्मीनारायण उपाध्याय गरोडा, भागवत कथावाचक कविता उपाध्याय आदि उपस्थित थे।