ग्रामीण बना रहें प्राकृतिक खाद्य

8:22 pm or November 10, 2022
(दीपक शर्मा)
पन्ना १० नवंबर ;अभी तक; लगातार खाद् की किल्लत को देखते हुए तथा मनमाने दाम पर खाद प्राप्त होने को लेकर किसान अब रसायनिक खाद को छोडकर प्राकृतिक खाद बनाने मे जुट गये है तथा उनके द्वारा जैविक खेती करने का मन बना लिया है। जिसमे स्वंय सेवी संस्था समर्थन द्वारा सहयोग किया जा रहा है। क्योकि खाद के लगातार दाम बढ रहें है तथा अधिक रसायनिक खाद् डलने से भूमि की उर्वरक शक्ति भी लगातार कम होती जा रही है। इस लिए किसानो ने जैविक प्राकृतिक खाद बनाने की ठान ली है। इसकी शुरूआत आदिवासी क्षेत्र पलथरा, रहुनिया, बिलखुरा, विक्रमपुर के किसानो द्वारा शुरूआत कर दी गई है।
                            किसानो को इस संबंध मे स्वंय सेवी संस्था समर्थन के सदस्यों द्वारा खाद बनाने के संबंध मे प्रशिक्षित किया जा रहा है और इसकी शुरूआत भी कर दी गई है। स्वयंसेवी सस्था समर्थन पन्ना के द्वारा जनपद पंचायत पन्ना के लगभग 30 ग्रामो को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये जोडा गया है। जिसमे अभी लगभग एक सैकडा किसान कार्य कर रहें है। उक्त खाद का नाम जीवन अमृत दिया गया है तथा यह खाद बनाने की विधि भी बताई गई है। जिसमे देशी गाय का गोबर 10 किलो ग्राम, देशी गाय का गौ मूत्र 8 से 10 लीटर, गुड़ 2 किलो ग्राम, बेसन 2 किलो ग्राम, बरगद के नीचे की मिटटी 500 ग्राम, पानी 200 लीटर उपरोक्त सभी चीजो को एक डम में घोल कर 2 से 7 दिन तक छाया में रखे। दिन में दो बार सुबह-शाम झाड़ी की सुई की दिशा में लकड़ी के डंड़े घुमाये। डम को बोरी से ढके दे। 15 दिन तक इसका उपयोग सब्जी एवं अन्य किसी भी फसल में कर सकते है। इस संबंध मे संस्था समर्थन के क्षेत्रीय समन्वयक ज्ञानेन्द्र तिवारी ने बताया कि जिस प्रकार आज के समय मे रसयानिक खाद्यो के दाम लगातार बढ रहे है तथा उक्त खाद्य से पैदा होने वाले अनाज से लोगो को अनेक प्रकार की बीमारियां हो रही है यह बहुत ही घातक है तथा आर्थिक रूप से भी किसानो के लिए परेशानी बन चुकी है इस लिए किसानो को जैविक तथा प्राकृतिक खाद्य बनाकर अधिक से अधिक उपज ली जा सकती है।