ग्राम इटायली की 50 बालिकाओं ने शिव अभिषेक में भागीदारी उत्साह के साथ की

7:28 pm or August 4, 2022

महावीर अग्रवाल

मंदसौर ४ अगस्त ;अभी तक;  अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा लगातार गांव – गांव में जाकर महादेव जी के अभिषेक की चेन चला रखी है। इसी क्रम में गुरूवार को ग्राम इटायली भागीदारी करते हुए रजत प्रतिमा का अभिषेक, पूजन करते हुए गांव के कमल सिंह ने कहा कि हम किन शब्दों में गायत्री परिवार को धन्यवाद दें। गायत्री परिवार द्वारा अभियान चलाया गया है यह अभियान युवाओं में बड़े परिवर्तन लाएगा।

व्यासपीठ से जितेंद्र सिंह प्रज्ञेय ने कहा कि भगवान शिव को शंकर कहा गया है, इसका उल्लेख वेद मूर्ति पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा जो बताया है वह इस प्रकार है कि शिव का डेरा श्मशान में डाला जो बताया जाता है।  भस्म शरीर पर माला मृत्यु को जीवन के साथ जो गुथा देखता है उस पर आक्रमण नहीं होता, नहीं  डर सताता है वह मृत्यु को ही अटल सत्य मानता है। जीवन की अंतिम परिणीति और सौगात है न कोई ऊंचा है न नीचा है सभी एक सूत्र में पिरोए जाते हैं। यही समत्व योग है, विषमता या नहीं भटकती है। शंकर भगवान की सवारी बेल है जो मेहनत कश परिश्रमी होता है हम मेहनतकश हो कर पसीना बहा कर सेवा में लगा रहना चाहिए। हमें अपने आपको बेल बनाना चाहिए। भगवान उसकी सहायता करता है जो अपनी सहायता खुद करता है। वही भगवान की सवारी बनता है। भगवान शंकर नंदी को बहुत प्यार करते हैं भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा है जिसका अर्थ है शांति संतुलन अर्थात जीवन की कठिन से कठिन परिस्थिति में भी संतुलन बनाए रखना। वहीं सिर में गंगा की धारा बहने का तात्पर्य है कि हमारा मस्तिष्क ज्ञान से भरा रहे ताकि दूसरों की उलझनों को भी हम सुलझा सकें। हमारा मन मस्तिष्क पवित्र विचारों से मां गंगा की पवित्रता की धार में भरा रहे। हमारे ज्ञान से लोगों के जीवन दान मिल सके। शिव के तीन नेत्र तीसरा नेत्र ज्ञान चक्षु है। यह दूरदर्शिता विवेक शीलता का प्रतीक है। जिसके खुलने से कामदेव भी भस्म हो गया। तीसरा नेत्र खुला रहने पर कामवासना भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती। शिवजी का त्रिशूल लोभ मोह अहंकार को नष्ट करने वाला है। भगवान शिव के हाथ में जो डमरु है वह आनंद का प्रतीक है। हम प्रसन्न निश्चित जीवन जिए उनका डमरु ज्ञान कला साहित्य विजय का प्रतीक है। शिव के बारे में संपूर्ण व्याख्या करते हुए गायत्री परिवार का प्रत्येक परिजन शुद्ध रूप से भगवान शिव का वह रूप देखता है।
गायत्री परिवार के वरिष्ठ सुभाष चंद्र मंडावेरा, भंवर सिंह चंद्रावत लीला देवी मंडोवरा, रेखा सिंह, पवन गुप्ता, परसराम शर्मा, नरेश त्रिवेदी, पन्ना लाल मालवीय प्रतिक्षण गुरु जी के चरणों का ध्यान लगाकर सेवा क्षेत्र में अपने गुरु का आदेश मानकर कार्य कर रहे हैं। गुरु को भगवान मानकर अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करते हुए गायत्री परिवार ने संकल्प लेकर घर-घर शिव की रजत प्रतिमा के साथ प्रति वर्ष अभिषेक कार्यक्रम गांव – गांव करने का संकल्प लिया है। यह जानकारी पवन गुप्ता ने दी।