चिकित्सक बिना कोरोना की तीसरी लहर से जूझने की तैयारी, न सोनोग्राफी न सीटी स्कैन, सिर्फ बेड बढ़ाकर संतुष्ट प्रशासन

10:54 am or January 11, 2022

मंडला संवाददाता

मंडला ११ जनवरी ;अभी तक;  कोरोना की संभावित तीसरी लहर का खतरा तेजी से बढ़ गया है। देश भर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमित लोग मिलने लगे हैं। हाल ही में जिला मुख्यालय में भी कोविड के दो नए मरीज सामने आ चुके हैं। कोरोना के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए जिला अस्पताल प्रबंधन भी मुस्तैद हो गया है और वे सभी तैयारियां शुरू की जा चुकी हैं जो कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए आवश्यक हैं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन के सामने कई चुनौतियां भी हैं जो कोरोना संक्रमण से निपटने के दौरान अस्पताल प्रबंधन के लिए बड़ी बाधा बन सकती हैं।

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ केआर शाक्य ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी शुरू की जा चुकी है। जिला मुख्यालय में फिलहाल 230 बेड तैयार हैं। आवश्यकता पडऩे पर इनकी संख्या में वृद्धि भी की जा सकती है। डॉ शाक्य का कहना है कि जिला अस्पताल में 120  बेड का कोविड वार्ड तैयार है। इसके अलावा जीएनएम सेंटर में 70 बेड का कोविड वार्ड तैयार हैं। उक्त सभी बेड में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए सैक्शन पाइप लाइन डाली जा चुकी है। इसके अलावा तन्खा मेमोरियल स्कूल में बच्चों के लिए कोविड वार्ड तैयार है। यहां  40 बेड की व्यवस्था की गई है।

तैयार है ऑक्सीजन प्लांट

सिविल सर्जन का कहना है जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए दो प्लांट स्थापित किए गए हैं। हालांकि कुछ दिनों पहले तकनीकी खामी के कारण ऑक्सीजन प्रोडक्शन में बाधा आ रही थी लेकिन उस बाधा को दूर कर लिया गया है। दोनो प्लांट ऑक्सीजन उत्पादन के लिए तैयार हैं। इसमें से एक प्लांट की उत्पादन क्षमता एक हजार लीटर प्रति मिनट है और दूसरे प्लांट की उत्पादन क्षमता 1150 लीटर प्रति मिनट है।

लिक्विड प्लांट की तैयारी शुरू

सिविल सर्जन का कहना है कि जिला अस्पताल परिसर में लिक्विड प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए 6 हजार लीटर का टैंक स्थापित किया जाना है। टैंक स्थापना के लिए बेस तैयार हो चुका है। सिर्फ टैंक आना बाकी है। बताया गया है कि संभवत: अगले एक सप्ताह में टैंक उपलब्ध करा दिया जाएगा।

बाधाएं

सिविल सर्जन ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट करूणा मर्सकोले ने वीआरएस यानि स्वैच्छिक सेवानिवृति के लिए आवेदन दिया और काम पर आना बंद कर दिया है। इससे सोनोग्राफी सेवा बाधित हो गई है। जिला अस्पताल में किसी भी रेडियोलॉजिस्ट के उपलब्ध नहीं होने के कारण सोनोग्राफी नहीं की जा रही है। उक्त समस्या से उच्च अधिकारियों और शासन को अवगत कराया जा चुका है।

कोरोना संक्रमण से निपटने में सीटी स्कैन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। डॉ शाक्य ने बताया कि जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है क्योंकि स्कैन मशीन अब तक प्रबंधन को उपलब्ध नहीं कराई गई है। इतना ही नहीं, जिला अस्पताल में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की बेहद कमी है। इस समस्या के निदान के लिए जिला प्रशासन से चर्चा की जा रही है। शीघ्र ही इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।