चेक डेमों की मजदूरी के लिए एक साल से भटक रहे मजदूर

मयंक भार्गव

बैतूल ८ जून ;अभी तक;  भारत सरकार ने गरीबों के जीवन यापन के लिए रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत कानून बनाया और हर परिवार को 100 दिनों का काम देने का वादा किया। लेकिन भैंसदेही ब्लाक की जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत धामनगांव के राजनी ग्राम के बाशिंदों को  अप्रैल 2020 में पूर्ण हो चुके चेक डेमों की आज तक मजदूरी नहीं मिली है। लगभग तीन- तीन लाख रूपए की लागत के चार चेक डेमों का पूर्ण निर्माण होने के बावजूद मजदूर मजदूरी के लिए भटक रहे हैं।

एक सैंकड़ा  मजदूरों का नहीं हुआ भुक्तान

राजनी ग्राम के पंच भगवत ने बताया कि मैं खुद चेक डेम पर कार्य के दौरान उपस्थित था और हर व्यक्ति का लेखा-जोखा मेरे पास रजिस्टर मैं मौजूद है। जो मेरे ग्राम के मजदूरों ने मार्च-अप्रैल 2020 में चार चेक डेमों का कार्य ग्राम पंचायत द्वारा किया गया। जो जगोती/अनसु,  किसनलाल/झांगरू, पांडू/जोगी, छतरू सिंग धुर्वे के खेत में बने परंतु अभी तक इन गरीबों को उनका हक नहीं मिल पाया। मजदूरों की माने तो एक-एक मजदूर कि क्रमश: 50 दिन, 40 दिन, 35 दिनों कि मजदूरी का भुगतान 115 से 120 मजदूरों को नहीं हो पाया है।

181 सहित अधिकारियों को कि शिकायत

राजनी ग्राम आदिवासी बस्ती होने और अधिकतर लोग यहां मजदूरी पर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इनके पास मजदूरी के अलावा अन्य कोई रोजगार नहीं है। विगत दो वर्षों से कोरोना लाकडाउन की मार झेल रहे ग्रामीणों ने बताया कि हमनें विगत वर्ष अप्रैल माह में चेक डेमों पर कार्य किया था परन्तु सचिव ने चार चेक डेमों का कार्य करने के बावजूद हमें 25 से 30 दिनों कि मजदूरी का ही भुगतान किया।

आज तक नहीं मिली मजदूरी

मजदूरों ने बताया कि कुछ लोगों को तो एक रूपए तक नहीं मिल पाए है।  सचिव द्वारा हमें यह कहकर गुमराह किया गया कि अभी मनरेगा मैं पैसे नहीं हैं। तो कभी मजदूरों के खाते गलत होने का बहाना किया गया। ग्रामीणों ने कुछ दिनों के इंतजार के बाद 181 सहित जनपद अधिकारि से मजदूरी के पैसों को लेकर गुहार लगाई परन्तु किसी ने भी इन गरीबों की सुध नहीं ली। लाकडाउन के डर के चलते यह लोग उच्च अधिकारियों तक नहीं जा पाए जिसका फायदा सचिव उठा सकें।

आर्थिक तंगी झेल रहे मजदूर

कुछ परिवार बिना खेती बाड़ी के है जो शासन के मनरेगा के भरोसे या महाराष्ट्र के अंजनगांव, परतवाड़ा में मजदूरी के सहारे परिवार की आजीविका चलाते हैं। लाकडाउन के चलते इस बार उन्हें महाराष्ट्र में काम नहीं मिल पाया और दो महीने से खाली घर पर बैठे हैं। कुछ ही दिनों बाद बारिश लगने वाली है और ऐसे में यह परिवार खाली हाथ है। वर्ष 2020 की मजदूरी भी हाथ नहीं लगी तो इस वर्ष भी सचिव द्वारा मनरेगा एक भी काम इन गरिबों को नहीं दिया गया।

फर्जी भुगतान का लगाया आरोप

ग्राम पंचायत के भाजपा पूर्व मण्डल महामंत्री रमेश गीद सहित राजनी के ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि हमें शक है कि सचिव द्वारा फर्जी मस्टर रोल लगाकर भुकतान कर लिया गया। जांच होने पर ही पता लगेगा कि इन चेक डेमों पर किन किन लोगों के मस्टर रोल लगे हैं और किस करणो से इन्हें भुगतान नहीं हुआ इसलिए हमने राजनी के मजदूरों के रूके भुकतान को लेकर दो महीने पहले भैंसदेही सीईओ को आवेदन देकर जांच की मांग की थी और गरीबों को भुगतान करने के लिए कहा था परन्तु इस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। वहीं भगवत, उर्मिला, मालती सहित सैकड़ों ग्रामीणों की मांग समय रहते हमारी समस्या हल नहीं हुई तो हम सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।