जनवादी लेखक संघ की विचार गोष्ठी आयोजित

5:48 pm or January 2, 2022

अरुण त्रिपाठी 

रतलाम 2 जनवरी २ जनवरी ;अभी तक;  नुक्कड़ नाटकों ने जनतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया है। सफदर हाशमी ऐसे नाटककार रहे जिन्होंने वर्षों से चली आ रही लोकनाट्य की परंपरा को जनपक्षधरता से जोड़कर उसे जनप्रिय बनाया।  जनता की आवाज को बुलंद कर जनता से जुड़ी समस्याओं को सभी के सामने प्रस्तुत किया। इसलिए नुक्कड़ नाटक आम जनता में काफी लोकप्रिय हुए। उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा सफदर हाशमी की याद में ‘नाट्य परंपरा में नुक्कड़ नाटकों की भूमिका विषय’ पर आयोजित विचार गोष्ठी में वरिष्ठ कवि एवं विचारक प्रोफेसर रतन चौहान ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि सफदर हाशमी की शहादत हमें यह प्रेरणा देती है कि जब जब जनपक्षधरता को नज़रअंदाज़ किया जाता रहेगा तब लोक संस्कृति और लोक परंपरा के जनतांत्रिक स्वरूप सामने आते रहेंगे ।

इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी श्री युसूफ जावेदी ने कहा कि सफदर हाशमी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । वे रंगकर्मी होने के साथ ही कवि, विचारक एवं संगठनकर्ता भी थे।  उन्होंने मंच परंपरा को जनता के बीच लाने का जो कार्य किया ,वह उन्हें अधिक लोकप्रिय बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध परंपरा में नुक्कड़ नाटकों ने अपनी जड़ों को सींचने का कार्य किया । सफदर हाशमी इसके अगुआ बने और उन्होंने नुक्कड़ नाटकों के मंचन के माध्यम से जनजागृति पैदा की।

 

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रंगकर्मी कैलाश व्यास ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय नाट्य परंपरा बहुत मज़बूत है। हमारी लोक संस्कृति और देश के विभिन्न हिस्सों में परंपराओं के साथ जोड़कर नाट्य मंचन का कार्य हमेशा कायम रहा है। इसे गति प्रदान करने में सफदर हाशमी का योगदान अविस्मरणीय है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए आशीष दशोत्तर ने कहा कि सफदर हाशमी एक ऐसे रंगकर्मी थे जिन्होंने नाटकों को प्रेक्षागृह से पब्लिक तक लाने का कार्य किया। उनके नाटकों को देखने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग मौजूद रहते थे। वे नाटक न सिर्फ को करते थे बल्कि वहां उपस्थित लोगों से चर्चा भी करते थे और उनसे कुछ सीखते भी थे । उनकी यही शैली नुक्कड़ नाटकों को अधिक प्रभावित करती चली गई ।

कार्यक्रम में रंगकर्मी श्री ओम प्रकाश मिश्र , जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, वरिष्ठ कवि श्री श्याम महेश्वरी, रंगकर्मी श्री ललित चौरड़िया ,श्री भूपेंद्र व्यास , श्री श्याम सुंदर भाटी, सुनील व्यास, लता बक्षी, प्रकाश हेमावत, फ़ैज़ रतलामी, कीर्ति शर्मा, मांगीलाल नगावत, जवेरी लाल गोयल,  सहित साहित्य प्रेमी मौजूद थे।