जब कोई धर्म का कार्य करें, उसकी बड़ाई करनी चाहीए, क्योकि उसका फल हमे भी मिलता है-प्रभा शंकर जी महराज

11:20 pm or September 22, 2022

दीपक शर्मा

पन्ना २२ सितम्बर ;अभी तक; जब कोई धर्म का कार्य करें तो उसकी बडाई करनी चाहीए, क्योकि बडाई करने से, वह प्रसन्न होता है तथा धर्म के जब कोई धर्म का कार्य करें, उसकी बड़ाई करनी चाहीए, क्योकि उसका फल हमे भी मिलता है-प्रभा शंकर जी महराज प्रति उसका मनोबल बढता है और उसके द्वारा किये गये धर्म का फल हमे भी मिलता है, जिस प्रकार केवट द्वारा भगवान श्रीराम के चरण प्रखारे गये तथा उन्हे नदी पार कराया गया और केवट द्वारा उस नदी पार कराने की एवज मे कोई मेहनताना नही लिया गया। जिसे देखकर देवताओं द्वारा प्रसन्न हो कर फूलो की वर्षा की गई तथा केवट की बढाई करते हुए कहा की तुम धन्य हो गये, तुमने जग के तारणहार को अपनी नौका से पार कराया है। यह तुम्हारा बहुत बडा धर्म है, और इसका लाभ उनकी बडाई करने वाले देवताओं को मिला। इस लिए हर मनुष्य को अच्छे कर्म धर्म करने वालो की हमेशा बडाई करनी चाहीए।

उक्ताश्य के विचार रामकथा वाचक प्रभाशंकर जी महराज ने भगवान श्री राम कथा केवट के बीच हुए संवाद का बहुत ही मार्मिक् ढंग से वर्णन किया। उन्होने कहा कि केवट द्वारा भगवान के चरणो की रज लेने के बाद मै नौका पर बैठाकर नदी से पार कराय। क्योकि केवट जानता था यह साक्षात ईश्वर है जिनके द्वारा ही जीव को इस संसार रूपी नोका से भव सागर पार कराया जाता है। उन्होने केवट को नांव से नदी पार कराने की एवज मे मेहनताना देना चाहा तो केवट ने लेने से मना कर दिया तथा कहा कि आपकी भक्ति तथा चरणो की रज ही मेरी मेहनत है और मुझे कुछ नही चाहीए तथा उसने कहा कि मानव के जीवन मे तीन संकट होते है जिससे मुझे आपकी कृपा से कुछ नही है और नही मुझे कुछ चाहीए, मनुष्य के उपर कोई कलंक न हो, शरीर मे कोई रोग न हो तथा दरिद्रता न हो। इसके अलावा और किसी चीज की जरूरत नही है सबसे बडी जरूरत प्रभु की भक्ति मिल जाये यही सबसे बडी संपत्ति है।