जब पुल बनाने इंग्लैंड से आया इंजीनियर

राजेंद्र तिवारी

जगदलपुर; 24 सितंबर ;अभी तक; देश के अन्य जनपदों की तुलना में बस्तर को आज भी पिछड़ा हुआ माना जाता है। यह बात दीगर है कि पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ का आदिवासी बाहुल्य  बस्तर  हवाई सेवा से भी जुड़ चुका है।

बस्तर के विकास के लिए जिस प्रकार आज सरकारी योजनाएं बनाती हैं, ठीक उसी प्रकार आजादी के पहले भी काकतीय राजवंश के राजा आदिवासियों के  के लिए योजनाएं बनाया करते  थे। बस्तर पर  अध्ययन करने वाले शोधार्थी केशव तिवारी का कहना है कि राजा रूद्र प्रताप देव के जमाने में  आवागमन का मुद्दा  सबसे बड़ी समस्या  के रूप में उभरा था। दरअसल सन् उन्नीस सौ के बाद बस्तर में आवागमन का चलन धीरे धीरे  गति पकड़ रहा था।  बैल गाड़ियों के सहारे लंबी-लंबी दूरियां आरामदेह तरीके से तय किए जाने की योजना राजा रुद्र प्रताप देव  बना रहे थे । लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा पहाड़ी नदी – नाले उभर कर सामने आ रहे थे । इस समस्या से निजात पाने के लिए सन् उन्नीस सौ पांच में स्वर्गीय महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव के नाना राजा रूद्र प्रताप देव ने इंग्लैंड से इंजीनियर बुलाकर बस्तर में पुल निर्माण की योजना बनाई।  इंग्लैंड से डब्ल्यू एस पलम्बली नामक इंजीनियर बुलाए गए।

इस इंजीनियर ने पहले बस्तर के प्रमुख मार्गों का  घोड़े और हाथियों के द्वारा   निरीक्षण किया । उसने पाया कि इन मार्गों पर पड़ने वाले पहाड़ी नालों को पार करने के लिए आदिवासी लकड़ी के पेड़ों को काटकर उसे पुल का स्वरूप प्रदान करते  हैं। इसी को आधार बनाकर इंजीनियर पल्लम बली ने बस्तर में लकड़ी के पुलों के निर्माण की योजना बनाई।  राजा रूद्र प्रताप देव के  शासन काल में बड़ी संख्या में लकड़ी के पुल बस्तर में बनाए गए थे, जिसके बाद बस्तर के सीमा क्षेत्र में आवागमन तेजी के साथ विकसित हुआ। शोधार्थी श्री तिवारी का यह भी कहना है कि राजा रुद्र प्रताप देव के कार्यकाल में 1910 का जो विद्रोह हुआ था उसमें इसी आवागमन के विकास ने महती भूमिका निभाई थी। कुल मिलाकर सन 1990 के पूर्व तक बस्तर में लकड़ी के पुल विद्यमान थे। बस्तर में आखरी लकड़ी का पुल बीजापुर भोपालपटनम के बीच गिलगिच्चा  के निकट विद्यमान था। इस मार्ग के राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित हो जाने के बाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन द्वारा अविभाजित बस्तर के आखिरी लकड़ी के इस पुल और इंग्लैंड के इंजीनियर की निशानी को ध्वस्त कर दिया गया। बहरहाल अब बस्तर आवागमन के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ निकला है।

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