जल संग्रहण के वैकिल्पिक स्रोत में भर देते है राखड़, प्रमुख सचिव व कलेक्टर सहित अन्य को नोटिस

9:53 pm or January 24, 2023

सिद्धार्थ पांडेय

जबलपुर २४ जनवरी ;अभी तक;  खनिज  खन्न से उत्पन्न हुए गड्डे में बारिष के पानी भर जाता है। जो जल संग्रहण का वैकिल्पिक स्त्रोत बन जाते है। जल संग्रहण के वैकल्पिक स्रोत में राखड़ भरकर उन्हें समाप्त किया जा रहा है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विषाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

 सिंगरौली निवासी कृष्ण नारायण सिंह परस्ते व लोकर सिंह की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि खनिज खनन के बाद जो गड्ढ़े बन जाते हैंउनमें बारिश का पानी भर जाता है। यह पानी कृषि कार्य में सिंचाई के लिए उपयोग होता है। याचिकाकर्ता किसान हैं और उनके क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा का अभाव है। ऐसे में यही जलभराव वाले गड्ढ़े सबसे महत्वपूर्ण वैकल्पिक स्रोत होते हैं। इसके बावजूद इन्हें निजी कंपनी से निकलने वाली राखड़ से भरने का निर्णय ले लिया गया। जिससे व्यथित होकर याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर सहित अन्य को अभ्यावेदन दिए थे। अभ्यावेदन पर कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयीहै। गड्ढ़ों को राखड़ से पूरने के पीछे पर्यावरण प्रदूषण से बचाव का तर्क दिया जा रहा है। राखड़ा रसायन युक्त होने के कारण भूमि की उर्वरक क्षमता को नष्ट करती है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद राज्य शासनप्रमुख सचिव खनिज संसाधन व जल संसाधनकलेक्टर सिंगरौली व एसडीओ देवसर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।