जांच नाकों के ना होने से इन मार्गों से धान से भरे ट्रक लाये जा रहे, राशि मंडी शुल्क मिलर्स एवं मंडी कर्मचारियों की जेब में जा रही

आनंद ताम्रकार

बालाघाट ४ जनवरी ;अभी तक;  बालाघाट जिले में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी प्रारंभ होने के बाद अन्य प्रांतों से धान की आवक में भारी बढ़ोतरी हुई है। जिले की सीमाओं पर धान आवक पर निगरानी रखने के लिये नाके लगाये गये है और उनमें अधिकारियों को पदस्थ कर दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

जिले में कुछ ऐसे भी क्षेत्र है जो अन्य जिलों से जुड़े हुए है लेकिन उन मार्गों पर जांच नाकों के ना होने से इन मार्गों से धान से भरे ट्रक लाये जा रहे है लाई गई धान समर्थन मूल्य खरीदी गई धान में कृषकों के नाम पर खपाई जायेगी। यह कारगुजारी भारी पैमाने पर की जा रही है जिसके कारण लाखों रुपयों का  मंडी शुल्क मिलर्स एवं मंडी कर्मचारियों की जेब में जा रहा है।

यह उल्लेखनीय है की कलेक्टर डाक्टर श्री गिरीश मिश्रा द्वारा धान खरीदी प्रारंभ होने की दिनांक से प्रदेश के बाहर से आने वाली धान पर निगरानी रखे जाने के उद्देश्य से जिले के सीमावर्ती क्षेत्र कंजई,नहलेसरा, गुडरू, कुलपा, मोहाड, सालेटेरी और रजेगांव में जांच नाके बनाये गये है इन जांच नाकों में तहसीलदार,थाना प्रभारी,सहाकारिता विस्तार अधिकारी,मंडी निरीक्षक एवं पटवारी को तैनात किया गया है जो वाहनों के आगमन निर्गमन पर नजर रखेगा और प्रतिदिन की आवक जावक की रिपोर्ट संधारित कर अनुविभागीय अधिकारी को प्रस्तुत करेगा।

इस जांच प्रक्रिया के प्रारंभ होते ही श्री संदीप सिहं अनुविभागीय अधिकारी वारासिवनी ने 3/12/2021 से उनके अनुभाग स्थित राईस मिलों में अन्य प्रांतों से लाई गई धान से संबंधित उसकी मंडी समिति से प्रोसेसिंग का सत्यापन तहसीलदार से करवाया सत्यापन प्रतिवेदन एसडीएम प्रस्तुत करने के बाद ही धान के रीलिज आर्डर जारी किये गये इस प्रक्रिया के कारण उन राईस मिलर्स में हडकंप मच गई जो बिना मंडी टेक्स पटाये अन्य प्रातों से धान ट्रकों के माध्यम से बुलवा रहे थे।

अनुविभागीय अधिकारी वारासिवनी द्वारा इस प्रक्रिया के अपनाये जाने से उनके क्षेत्र में लाये जाने वाले धान के ट्रकों से 20 दिन के अंदर 60 लाख रूपये मंडी टैक्स के रूप में वसूले गये। इस प्रक्रिया के लागू होने के पूर्व तथा समिति के कार्यकाल में मिलर्स और मंडी कर्मचारियों की मिलीभगत से नाम मात्र का मंडी षुल्क पटाया जाता रहा है इस तरह लाखों रुपयों की मंडी शुल्क की चोरी धड़ल्ले से की जा रही थी।
इसी तरह लालबर्रा मंडी में जहां गत वर्ष 17 हजार रुपये मंडी टैक्स के रुपये में जमा हुये थे विगत 20 दिन की अवधि में 16 लाख रुपये जमा हुये।
इस अवधि के दौरान लगभग 400 ट्रकों की इस तरह छानबीन किये जाने की जानकारी लगी है।
यह आश्चर्य का विषय है की जो प्रक्रिया वारासिवनी अनुविभाग में अपनाई गई है वह जिले के अन्य क्षेत्रों में क्यों नही लागू की गई जबकि उन क्षेत्रों में राइस मिलर्स द्वारा सैकड़ों ट्रकों से धान अन्य मार्गों से धान बुलाकर उश्णा मिलों एवं राईस मिलों में खपाई जा रही है।
पडोसी जिले सिवनी में कलेक्टर द्वारा अन्य प्रांतों राईस मिलर्स द्वारा लाई गई धान का उसके प्रोसेसिंग किये जाने की प्रक्रिया का सत्यापन कराया जा रहा है। राईस मिलर्स के बिजली की खपत की भी जांच की जा रही है। इसके कारण सिवनी जिले में धान के अवैध आवक मंडी शुल्क की चोरी पर अंकुश लगा है।
गत दिनों पत्रकार वार्ता में इस सबंध में कलेक्टर श्री गिरीश मिश्रा जी का ध्यान आकर्शण करवाया गया था।
जिलों के अन्य क्षेत्रों में लाई जा रही धान का सत्यापन ना किये जाने से राईस मिलर्स और धान के व्यापारी समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही धान में खपाने में जुट गये है।
वारासिवनी अनुविभाग में जो जांच प्रक्रिया अपनाई जा रही है उसे जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाए जिसके कारण क्षेत्र की मंडी समितियों को मंडी शुल्क भी प्राप्त होगा और समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही धान में बाहर से लाई जा रही धान खपाने की कवायद पर भी अंकुश लगेगा।