जिम्मेदारों ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद ही बना डाली सड़क

7:49 pm or November 17, 2021

मयंक भार्गव

बैतूल १७ नवंबर ;अभी तक;  ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिलते हैं कि लोग जनप्रतिनिधि और प्रशासन की मदद पाने के लिए हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं भले ही मदद मिले अथवा ना लेकिन ऐसे कम ही लोग होते हैं जो कि स्वयं कुछ करके दिखा देते हैं। ऐसे ही ग्राम कांजीतालाब-सेल्दा के ग्रामीण हैं जिन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई मर्तबा सड़क बनाने का कहा लेकिन उन्होंने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद ही स्वयं के खर्च और श्रमदान कर सड़क निर्माण कर डाली। श्रमदान और सहयोग के बाद जिस सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल होता है आज उस सड़क पर फर्राटे से चौपहिया वाहन दौड़ रहे हैं। यह सकारात्मक पहल जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर शाहपुर ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम कांजीतालाब और सेल्दा ग्राम की है।

लंबे समय से कर रहे थे सड़क की मांग
ग्राम कांजीतालाब के सुरेंद्र यादव ने बताया कि ब्लाक मुख्यालय तक सीधी सड़क सुविधा की राह ताक रहे ग्राम कांजीतलाब, ग्राम सेल्दा के ग्रामीणों ने श्रमदान कर सड़क का खुद ही निर्माण कर ली। ग्रामीणों ने आपस में सहयोग कर सड़क पर मुरुम व पत्थर डाल दिए। रोड भले काम चलाऊ बनी हो, लेकिन यह प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि भले ही पक्की रोड न बनी हो, लेकिन शाहपुर जाने में सुगमता होगी। सड़क सुधारने की मांग को लेकर आदिवासी ग्रामीण शासन प्रशासन से भी कई बार मांग उठाते रहे हैं लेकिन  उनकी मांग को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई अंत में ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर इस सड़क को दुरुस्त करने का काम किया।

श्रमदान और सहयोग से 6 किमी. बना डाली सड़क

श्री यादव ने बताया कि ग्राम पंचायत काजली के कांजी तलाब गांव के लोगों की जब प्रशासन ने सड़क बनाने की गुहार नहीं सुनी तो सबने मिलकर खुद ही सड़क बनाने का बीड़ा उठा लिया। लगभग छह किलोमीटर की सड़क को  पत्थर मुरम  डालकर चलने लायक बना दी है। ग्राम कांजी तालाब एवं ग्राम सेल्दा के ग्रामीण महिला-पुरुष ने अपने बूते सड़क बनाने के लिए गेंची -फावड़ा उठाया और छह किलोमीटर लंबी सड़क की मरम्मत कर उसे चलने लायक बना डाली जो पैदल सड़क चलने लायक नहीं थी। उस पर अब वाहन चार पहिये के वाहन चल सकते है जो लोगों के लिए मिसाल बन गयी है।

आधा सैकड़ा ग्रामीणों ने किया श्रमदान

ग्राम कांजीतालाब के सुरेंद्र यादव ने बताया कि इस सड़क की मरम्मत के लिए ग्रामीण सरपंच से लेकर और विधायक, सांसद से कई बार मिन्नतें कर चुके थे। लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। हर तरफ से धक्के खाने के बाद गांव वालों ने सिर्फ श्रमदान कर छह किलोमीटर लंबी सड़क की मरम्मत कर दी। श्री यादव ने बताया कि सड़क की मरम्मत करने के लिए आधा सैकड़ा से अधिक ग्रामीणों द्वारा श्रमदान किया गया जिसके बाद सड़क चलने लायक बन पाई है।
मयंक भार्गव, बैतूल से