जिला खनिज अधिकारी दो बार हुआ ट्रांसफर परंतु नहीं हुए रिलीव

भिंड से डॉ रवि शर्मा
भिंड ८ जून ;अभी तक; भिंड में पदस्थ जिला खनिज अधिकारी आर पी भदकारिया दो बार स्थानांतरण के बावजूद रिलीव  नहीं हुए जबकि अवर सचिव मध्य प्रदेश शासन द्वारा दो बार उनका तबादला शिवपुरी जिले के कलेक्टर की खनिज शाखा के लिए किया जा चुका है ।
                  उल्लेखनीय है कि पहला स्थानांतरण आदेश शिवपुरी के लिए 29 सितंबर 2020 को जारी हुआ था  लेकिन जिला खनिज अधिकारी आरपी भाग्य का रिया शिवपुरी पहुंच कर ज्वाइन नहीं किया । अगला आदेश 22 दिसंबर 2020 को पुणे शिवपुरी जिले के लिए किया गया चिंतनीय विषय यह है कि अवर सचिव के आदेश को भी जिला खनिज अधिकारी ने ठेंगा दिखा दिया तो इसका मतलब है इनके ऊपर सरकार का कोई दमदार राजनेता का हाथ है और तो और यह भिंड छोड़ना नहीं चाहते क्योंकि दमदार राजनेता इनसे करोड़ों रुपए भिंड से इनके द्वारा करोड़ों का राजस्व अवैध रूप से रेत गिट्टी खनिज विभाग में आने वाले सभी चीजों में उसका शेयर होगा और इन के माध्यम से क्योंकि यह विभाग के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं ।
              कमाई के मामले मे और विभाग की प्रत्येक जानकारी मे माहिर है और एक बार सर्किट हाउस में भोपाल के एक रिश्तेदार के साथ जो क भिंड के प्रभारी मंत्री थे उनके भांजे के साथ सर्किट हाउस में बैठे देखे गए थे । इस बात को लेकर मीडिया ने काफी हल्ला मचाया था परंतु उक्त महाशय ने कहा यह मेरा कोई रिश्तेदार नहीं है और वह रिश्तेदार महीनों सर्किट हाउस में कमरे मे रहा।  इसका मतलब यह है ट्रांसफर होना एक शासकीय एक शासकीय प्रक्रिया होने के नाते स्थानांतरण करना जरूरी है नियमानुसार उस नाते इनका स्थानांतरण तो या का इनकी सर्विस बुक में स्थानांतरण हो गया परंतु दो बार हुआ जाना आना और ज्वाइन करना सब प्रक्रिया चल रही है परंतु कागजों में ।
                जरा गहराई से सोचा जाए तो नियमानुसार इनका तबादला हुआ और 2 बार हुआ कागजों में हुआ सर्विस बुक में हुआ विभागीय प्रक्रिया के तहत हुआ और फिर वापस स्थानांतरित होकर भिंड में शिवपुरी से दोबारा भिंड आकर ज्वाइन कर लिया यह एक सरल प्रक्रिया होती है राजनीति क्योंकि कोई भी अधिकारी 2 या 3 वर्ष से ज्यादा एक स्थान पर नहीं रह सकता उस प्रक्रिया के तहत इनका ट्रांसफर किए गए कागजों में किए गए बाकायदा किए गए विभाग द्वारा किए गए परंतु उक्त महाशय भिंड छोड़कर कहीं नहीं जा सकते क्योंकि इनकी आड़ में प्रतिदिन करोड़ों रुपए अवैध खनिज उत्खनन का प्रतिदिन का शासकीय राजस्व की चोरी कर उक्त महाशय के द्वारा और इनकी देखरेख में सरकार के नुमाइंदे ही नेता राजनेता करोड़ों रुपयों की राजस्व चोरी स्वयं सरकार करवाती है वह भी सरकारी नुमाइंदे को द्वारा राजनेता बढ़ावा देकर कुछ प्रतिशत नुमाइंदों को देकर बाकी रकम डकार जाते है साहब बात यह है की प्रदेश में बैठी सरकार के यहां पाक साफ बने नेता चोरी करवाते हैं नुमाइंदों से और अपने आप को रखते हैं साफ स्वच्छ छवि वाले नेता भिंड से तबादला नहीं लेने के पीछे की वजह खनिज विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो लंबे अरसे से पदस्थ रहने के चलते जिला खनिज अधिकारी ने अपनी जड़े गहरी कर ली है ऐसे में नए स्थान पर पहुंचने के लिए पर उन्हें इस सारी सऊदी से शायद नहीं हो पाएंगे जो भिंड में रहकर मोहिया हो रही है ऐसा नहीं है कि जिला खनिज अधिकारी ने अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगा दिया है बल्कि गिट्टी मोरम वेद तथा मिट्टी तक का अवैध खनन अनवरत रूप से चल रहा है इसके बावजूद बैठे हुए हैं हैरानी की बात है कि शासन द्वारा दो बार तबादला किया गया हां तबादला किया गया परंतु उसका पालन भी किया यह तो एक विभागीय प्रक्रिया के तहत तबादला किया गया क्योंकि एक व्यक्ति वरिष्ठ अधिकारी लगातार 1 जिले में नहीं रह सकता इस कारण तबादला किया गया था एक बार नहीं दो बार किया गया जरा गहराई में जाकर देख ले दोनों बार कागजों में तबादला हुआ जो आए हुए फिर तबादला हुआ फिर जाएंगे फिर वापस भिंड जिले में तबादला होकर ही कार्य कर रहे हैं क्योंकि हाथ और आशीर्वाद आप नहीं देख रहे वह जानता है जनता नहीं है विभागीय कागजों में क्या हो गया क्या होना है वह क्या होगा यह एक सवालिया निशान है इसे कहते हैं राजनीति नेता राजनेता उनके नुमाइंदे तक ही सीमित रहने दो सब कुछ हुआ पूरी पिक्चर शुरू से स्टार्ट हुई और बीच में ब्रेक भी दिया गया और फिल्म समाप्त हो गई आपको हैरानी की बात है की शासन द्वारा दो बार तबादला किया गया उन्हें कोई टस से मस नहीं कर सका जिससे कहीं ना कहीं अधिकारियों की मिलीभगत दिखाई देती है बता दें कि उच्च न्यायालय ग्वालियर द्वारा 18 सितंबर 2020 को बिना रॉयल्टी तथा ओवरलोड परिवहन करते पकड़े गए ट्रक तथा डंपर आदि करीब 150 वाहनों को राजसात करने का आदेश जारी किया गया था लेकिन खनिज अधिकारी ने महल ऐसे 40 वाहनों को राजसात कर जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली उसी के तहत ट्रांसफर हो गया न्यायालय का पालन था वेरी कर दिया अब आने वाला करेगा जो इस पद पर बैठे हो क्योंकि उसने अपना वह अपने कार्यकाल के दौरान 40 वाहनों को जप्त किए जिनकी कोई सिफारिश नहीं थी परंतु रसूखदार लोगों के वहां अभी तक राशन नहीं किए गए इसके पीछे भी स्थानांतरण होना आवश्यक था नहीं तो रसूखदार लोगों के वाहन भी उच्च न्यायालय के आदेशानुसार इन महाशय को ही करना पड़ती कार्यवाही जब्ती उससे बचने के लिए इन्होंने अपना तबादला करवा कर न्यायालय कार्य से बच गए और कुछ दिन बिताने के बाद पुणे से आ गए और वर्तमान में भी शायद तबादले पर ही कार्य कर रहे यह सब सियासत का खेल है