जिला जेल के बंदी चलाएंगे माऊस और करेंगे पीजी

मयंक भार्गव

बैतूल ८ नवंबर ;अभी तक;  जिला जेल में विभिन्न अपराधों के तहत सजा काट रहे बंदियों की इच्छा है कि वह भी माऊस चलाए और पीजी की पढ़ाई करें। इसके साथ ही अन्य पढ़ाई के लिए भी बंदियों की दिलचस्पी को देखते हुए उनके लिए अध्ययन केंद्र खोले जाने की तैयारी की जाएगी।

एक दर्जन बंदियों ने जताई इच्छा

प्राप्त जानकारी के अनुसार जेल में बंद 12 कैदियों ने जेल प्रबंधन के समक्ष विभिन्न विषयों की पढ़ाई करने की फरमाइश रखी है। इनमें से 1 ने एमए, 1 ने बीए, 7 ने डीसीए और 3 ने पीजीडीसीए की पढ़ाई करने की इच्छा व्यक्त की है। जेल प्रबंधन के अनुसार ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक साथ इतने अधिक कैदियों ने पढ़ाई-लिखाई की इच्छा व्यक्त की है। इससे पहले यही होता था कि एकाध कोई कैदी किसी परीक्षा में कभी-कभार शामिल होता था। इस बार पढ़ाई के प्रति कैदियों का यह रूझान देख कर अधिकारी भी हैरान हैं। इसके साथ ही वे कैदियों की यह इच्छा पूरी करने के प्रयास में भी वे जुट गए हैं।

बनवाया जाएगा अध्ययन उप केंद्र

विभागीय सूत्रों के अनुसार जेल के कैदियों को पढ़ाई के लिए बाहर किसी शैक्षणिक संस्थान में दाखिला नहीं दिलाया जा सकता। यदि जेल के भीतर ही अध्ययन केंद्र बन जाए तो उसमें जरुर वे पढ़ाई कर सकते हैं, जिस तरह से आईटीआई में कई कैदी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यही कारण है कि जेल में ही भोज मुक्त विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र बनवाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जानकारी भी भिजवाई गई है। यदि उप केंद्र बनाने में सफलता मिल जाती है तो इन कैदियों की शैक्षणिक योग्यता बढ़ सकेगी और जेल से बाहर आने के बाद वे एक अच्छे और जिम्मेदार नागरिक की तरह जीवन जी सकेंगे।

आईटीआई में भी हो रहे पारंगत

जिला जेल में कैदियों को आजीविका चलाने के गुर सिखाने के लिए बीते कई सालों से आईटीआई भी संचालित हो रही है। इसमें भी कई कैदी विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। पूर्व में भी कई कैदी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जेल से बाहर निकलकर अपना खुद का रोजगार कर रहे हैं या फिर किसी और जगह काम करके रोजी रोटी चला रहे हैं और सम्मान से जीवन जी रहे हैं।

इनका कहना

जेल में बंद 12 कैदियों ने पीजी और कंप्यूटर की पढ़ाई करने की इच्छा व्यक्त की है। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए हमने जेल परिसर में ही भोज विश्वविद्यालय का अध्ययन उप केंद्र बनवाने के लिए जानकारी भिजवाई है।
योगेंद्र पवार, जेलर, जिला जेल, बैतूल