जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की अक्षम्य लापरवाही के कारण बूंद-बूंद पानी को मोहताज़ हैं पन्नावासी :- श्रीकांत दुबे

8:49 pm or June 18, 2022

पन्ना संवाददाता

पन्ना,18 जून , अभीतक /पन्ना नगर के लोगों को वर्तमान में भीषण जल संकट से जूझना पड़ रहा है क्योंकि गत वर्ष हुई अल्पवर्षा को दृष्टिगत रखते गर्मी के समय निर्मित होने वाली पेयजल समस्या के ठोस समाधान को ध्यान में रखकर जिम्मेदारों के द्वारा समय रहते आवश्यक प्रबंध नहीं किए गए। परिणामस्वरूप नगरवासी आज बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं और पानी की व्यवस्था के लिए रात्रि जागरण करके दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हर गुजरते दिन के साथ पेयजल संकट लगातार विकराल रूप ले रहा है। इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए पन्ना जिला प्रशासन, नगर परिषद पन्ना और पन्ना के मौजूदा जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। इनकी अदूरदर्शिता और अक्षम्य लापरवाही के ही कारण नगरवासियों को बूंद-बूंद पानी लिए मोहताज होना पड़ रहा है। जैसा कि आप सभी को विदित है कि विगत वर्षों में जिले में कई बार अल्प वर्षा की स्थिति बनीं और इसकी वजह से गर्मी के समय पेयजल की थोड़ी-बहुत समस्या भी उत्पन्न हुई लेकिन हालात इतने अधिक चिंताजनक और गंभीर कभी नहीं रहे जितने कि आज हैं।

पिछले साल माह अक्टूबर-नवंबर में ही यह स्पष्ट हो गया था कि जिले में अल्पवर्षा की स्थिति है क्योंकि इसके बाद बारिश होने की संभावना नहीं रहती। यह सब जानते हुए भी आगामी महीनों अर्थात गर्मी के मौसम में होने वाले जल संकट से निपटने के लिए पन्ना जिला प्रशासन, नगर परिषद पन्ना और पन्ना के मौजूदा जनप्रतिनिधियों के द्वारा तत्परता से प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कर उस पर काम शुरू करना तो दूर कार्ययोजना तक तैयार नहीं की गई। अल्प वर्षा को ध्यान में रखकर माह अक्टूबर-नवंबर से ही पन्ना नगर में पानी की नियमित सप्लाई को नियंत्रित नहीं किया गया। जबकि मैनें एक बैठक के दौरान स्वयं पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र को फरवरी माह में आगाह किया था कि तत्काल प्रभाव से नगर की नियमित पेयजल सप्लाई में कटौती की जाए और जगह-जगह क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों की मरम्मत कराकर पानी की बर्बादी को रोका  जाए ताकि मानसून देर से सक्रिय होने की स्थिति में भी पानी को लेकर हाहाकार जैसी स्थिति निर्मित न हो।

लेकिन इस ओर जरुरी ध्यान नहीं दिया गया जिसका नतीजा आज हम सबके सामने है। इतना ही नहीं पन्ना नगर के नजदीक स्थित सिंचाई जलाशयों जैसे कटरा बांध, बिलखुरा बांध आदि से गर्मी के मौसम में नगर में पेयजल सप्लाई बनाए रखने के लिए भी समय रहते जरुरी कदम नहीं उठाए गए। मेरा आरोप है कि, कुर्सी पर बने रहने के लिए सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों की परिक्रमा और चाटुकारिता में मशगूल रहने वाले अफसरों के द्वारा गर्मी के मौसम में आमजन की पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।  इस कारण आज पन्ना नगर के साथ-साथ आंचलिक क्षेत्रों बृजपुर-पहाड़ीखेरा के कई ग्रामों और अजयगढ़-धरमपुर क्षेत्र के अनेक ग्रामों में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है और हालात काफी गंभीर हो चुके हैं। आज मुझे समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ कि, भीषण जल संकट से जूझ रहे पन्ना नगर में बेनीसागर तालाब से पेयजल की सप्लाई करने का निर्णय जिला प्रशासन ने लिया है। मुझे लगता है कि जिला प्रशासन और नगर पालिका परिषद का यह निर्णय इनके मानसिक दिवालियापन को प्रदर्शित करता है सबको पता है कि बेनीसागर तालाब का पानी अत्याधिक दूषित और संक्रमित है क्योंकि इस तालाब के अंदर से निकली पाइप लाइननुमा नाली से होकर ही पन्ना जिला चिकित्सालय के दूषित पानी की निकासी होती।

पाइप लाइन लीकेज़ होने के कारण जिला चिकत्सालय का गंदा पानी लगातार तालाब में पहुँच रहा है। बेनीसागर तालाब में ही जिला चिकित्सालय के मरीजों के संक्रमित एवम गंदे चादरों की धुलाई होती है। इन तथ्यों की जानकारी होने के बाद भी बेनीसागर तालाब के दूषित पानी की सप्लाई शहर में करने का निर्णय लेना नगरवासियों की सेहत और जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या है ? इस हैरानी भरे निर्णय को लेकर सवाल उठने पर जिला प्रशासन की ओर से अब यह आश्वासन दिया जा रहा है कि बेनीसागर तालाब के पानी का पूरी तरह ट्रीटमेंट कराने और पानी की गहन जांच कराने के बाद ही उसकी सप्लाई शहर में की जाएगी। अपनी अदूरदर्शिता और घोर लापरवाही को छिपाने के लिए जिला प्रशासन व नगर पालिका परिषद अब नगरवासियों को बेनीसागर तालाब का पानी पिलाने को लेकर आमादा है। ऐसी स्थिति में प्रशासन को मेरा सुझाव है। अगर आपने यह तय ही कर लिया है कि आपको नगरवासियों को बेनीसागर तालाब का पानी पिलाना ही है तो सबसे पहले एक माह तक इस पानी की सप्लाई टैंकरों के माध्यम से जिला मुख्यालय में रहने वाले जिले के समस्त अधिकारियों, नगर पालिका परिषद के समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों तथा पन्ना में रहने वाले समस्त मौजूदा जनप्रतिनिधियों के आवासों में की जाए  और उन्हें इसके उपयोग हेतु प्रेरित किया जाए।

तत्काल प्रभाव से एक माह तक सभी सरकारी बैठकों में मिनरल वाटर की बोतलों को प्रतिबंधित कर बेनीसागर तालाब का पानी बैठक में शामिल होने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के पीने हेतु परोसा जाए। इसके अलावा संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में लगने वाले या नगर में स्थित समस्त शासकीय कार्यालयों में जहां प्रतिदिन निजी जल विक्रेताओं के पानी के कैम्पर खरीदे जाते हैं वहां लगातार एक माह तक बेनीसागर तालाब के पानी से भरे डिब्बे प्रतिदिन पेयजल हेतु रखवाए जाएं और उसी पानी को पीने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को कहा जाए। इससे पानी की खरीदी पर व्यय होने वाली राशि की बचत होगी साथ ही बेनीसागर तालाब के पानी के उपयोग को लेकर आमजन में विश्वास भी जाग्रत होगा। इस एक माह के लिए जनहित में समस्त निजी जल विक्रेताओं के जल स्रोतों का तत्काल प्रभाव से अधिग्रहण किया जाए और नगर में जितने भी निजी बोरबेल या कुएं हैं उनका भी आवश्यकतानुसार अधिग्रहण करते हुए नगर वासियों को इन जल स्रोतों के पानी से भरे टैंकरों से सप्लाई की जाए। मेरा मानना है इस अवधि में संभवत मानसून के सक्रिय हो जाने से नगरवासियों के लिए बेनीसागर तालाब के पानी की सप्लाई की आवश्यकता शायद नहीं पड़ेगी।