जिले के किसानों से प्रदेश सरकार कर रही दुर्व्यवहार -नकुलनाथ, मुआवजा वितरण में छिंदवाड़ा को छोड़ दिया

महेश चांडक छिन्दवाड़ा
छिंदवाड़ा २३ सितम्बर ;अभी तक; जिले के सांसद  नकुलनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अतिवृष्टि से प्रभावित प्रदेश के अन्य जिलों में मुआवजा वितरण की पहल तो की है परंतु छिंदवाड़ा जिले के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए यहां के किसानों को मुआवजा वितरण से वंचित रखा गया है जो कि प्रदेश सरकार के छिंदवाड़ा जिले के प्रति सौतेले व्यवहार को उजागर करता है।
            इस  संवाददाता  से फ़ोन पर चर्चा करते  सांसद  नकुलनाथ ने कहा कि गत 27 एवं 28 अगस्त को छिंदवाड़ा में हुई अतिवृष्टि से लगभग ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें प्रभावित हुई है जिनमें मक्का, सोयाबीन, गन्ना सहित सभी प्रकार की सब्जियां एवं बेल वर्गीय फसलें प्रभावित हुई है। मैंने स्वयं सम्पूर्ण जिले का एरियल सर्वे करने के उपरांत प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर सम्पूर्ण जिले में हुई जन धन, पशु धन व फसलों की हानि से उन्हें अवगत कराया था परंतु लगभग 1 माह बीत जाने के उपरांत भी छिंदवाड़ा जिले के कृषकों को किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया गया है। छिंदवाड़ा के अन्नदाता के साथ यह सौतेला व्यवहार सहन नही किया जायेगा।
                 नकुलनाथ ने आगे कहा कि यह बात गौरतलब है कि आस पास के लगभग सभी जिलों में बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा राशि प्रदान की जा चुकी है लेकिन छिंदवाड़ा के किसानों और ग्रामीणों को लगातार नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा मैं और पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी किसानों की इस हक़ की लड़ाई में उनके साथ है एवं हर स्तर पर उन्हें हक़ दिलाने के लिये हरसंभव प्रयास भी करेंगे।
                  नकुलनाथ ने आगे कहा कि मैंने अपने पत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया था कि किसानों की क्षतिग्रस्त फसलों के अलावा खेतों में जो फसलें खड़ी है उनमें अब किसी भी प्रकार के अनाज का उतपन्न होना भी संभव नही है अतः किसान की वास्तविक क्षति के साथ शेष मृतप्राय फसलों का भी आंकलन कर उचित मुआवजे दिया जाये परन्तु राज्य सरकार द्वारा इस अमानवीयता ने किसानों को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
                  नकुलनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार यदि एक निश्चित अवधि में छिंदवाड़ा जिले के किसानों व ग्रामीणों को समुचित मुआवजा नही देती है तो उन्हें किसान हित, जन हित व जिले के हित में आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

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