जिले के कृषि विभाग में २२१ पद रिक्त, कैसे बनेगी खेती लाभ का धंधा?

3:00 pm or November 15, 2022

मयंक भार्गव

बैतूल १५ नवंबर ;अभी तक;  बैतूल जिले का कृषि महकमा अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। किसान कल्याण एवं कृषि विभाग बैतूल में अधिकारियों-कर्मचारियों के स्वीकृत ३३४ पदों के विरूद्ध सिर्फ ११३ पदस्थ है जबकि २२१ पद रिक्त है। कृषि विभाग में जिला, ब्लाक कार्यालयों के साथ ही फील्ड में पर्याप्त स्टाफ पदस्थ नहीं होने से जिले के लगभग साढ़े तीन लाख किसानों को खेती बाड़ी के संबंध में न तो पर्याप्त तकनीकि मार्गदर्शन मिल पा रहा है और न ही विभागीय योजनाओं की सटीक जानकारी। साथ ही कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी अतिरिक्त काम के बोझ से जूझ रहे है। ऐसे में केन्द्र और मध्यप्रदेश सरकार का खेती को लाभ का धंधा बनाने का दावा बैतूल जिले में हवा हवाई नजर आ रहा है। कृषि बैतूल जिले की अर्थव्यवस्था और रोजगार का मुख्य आधार होने के बावजूद जिले के जनप्रतिनिधियों को कृषि महकमे में रिक्त लगभग ६६ फीसदी पदों पर अधिकारियों-कर्मचारियों को पदस्थ करवाने की चिंता नहीं है।

पांच लाख हेक्टेयर जोत के लिए फील्ड में सिर्फ ६० अधिकारी

बैतूल जिले में लगभग पांच लाख हेक्टेयर में खेती होती है। परन्तु पांच लाख हेक्टेयर जोत के लिए फील्ड में सिर्फ ६० ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पदस्थ है। जिले में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के स्वीकृत १५७ पदों में से ९७ पद लंबे समय से रिक्त है। इसके अलावा सहायक संचालक कृषि के ११ स्वीकृत पदों में से ७ पद रिक्त है सिर्फ ४ सहायक संचालक कृषि पदस्थ है। विषय वस्तु विशेषज्ञों के १७ पदों के विरूद्ध ६ पदस्थ है और 11 रिक्त है। सहायक सांख्यिकी अधिकारी के सभी तीन पद रिक्त बताये जा रहे है। कृषि विकास अधिकारी के स्वीकृत 41 पदों में से ३४ रिक्त है जिले में सिर्फ ७ कृषि विकास अधिकारी पदस्थ है। यही हाल भू संरक्षण सर्वे अधिकारियों का है। भू संरक्षण सर्वे अधिकारियों के स्वीकृत दो दर्जन पदों में से पांच पदों पर अधिकारी पदस्थ है तथा 19 पद रिक्त है।
कृषि विभाग बैतूल में मानचित्रकार के सभी दो, अनुरेखक के दो, मुख्यलिपिक स्टोनोग्राफर के एक-एक तथा लेखापाल के सभी तीन पद खाली है। जबकि सहायक ग्रेड-दो के पांच, सहायक गे्रड- तीन के तीन, वाहन चालक के 5 और भृत्य के 28 पद रिक्त है। कृषि विभाग बैतूल में मैदानी सहित तकनीकि अधिकारियों की जबरदस्त कमी का खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ रहा है।