जिले के सिर्फ 37 किसानों ने ही खरीद लिया 10 हजार से अधिक बोरी खादृ, जांच के आदेश:-

भिण्‍ड डॉ.रविशर्मा:-

भिंड ३ सितम्बर ;अभी तक; जिले के करीब 37 किसानों ने 10 हजार से अधिक बोरी खाद खरीदा है। ऐसे में कृषि कलेक्‍टर वीरेंद्र रावत को देकर जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्‍टर रावत ने भी जिले के सभी एसडीएम और उपसंचालक कृषि को उक्‍त मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि इस साल सरकार खाद वितरण पर काफी बारीकी से नजर रखे हुए हैं। ऐसे में भिण्‍ड जिले के 37 किसान ऐसे सामने आए हैं, जिन्‍होंने काफी अधिक मात्रा में खाद खरीदा है। उक्‍त किसानों ने वास्‍तव में आवश्‍यकता के अनुसार यह खाद खरीदा है अथवा सोसायटी और थोक विक्रेताओं ने खाद की कालाबाजारी की है। इ‍सलिए कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी ने कलेक्‍टर वीरेंद्र रावत को उक्‍त मामले की जांच कराने के लिए उन किसानों व उन्‍हें खाद बेचने वाली सोसायटी और दुकानदारों के नाम दिए हैं।

बताया जा रहा है कि मार्केटिंग सोसायटी मेहगांव और गोहद, जैन खाद भंडार लहार, चौहान खाद भंडार गोहद, पंडित खाद भंडार, किसान सेवा केंद्र गोहद ने 20 किसानों को 9 हजार से ज्‍यादा बोरी खाद बेचा है, जिसकी सूची कलेक्‍टर ने जांच के लिए एसडीएम और डीडीए कृषि को दे दी है। जबकि मंगलवार को कृषि मंत्रालय से 17 ओर किसानों की सूची कलेक्‍टर को भेज दी गई है। इन्‍होंने भी बड़ा मात्रा में खाद खरीदा है। हालांकि इस संबंध में विपणन संघ के प्रबंधक अभिषेक जैन का कहना है कि इस बार सरकार ने पीओएस मशीन के माध्‍यम से खाद वितरण के लिए कहा था। लेकिन पीओएस मशीन से खाद वितरण में कुछ व्‍यवहारिक दिक्‍कतों के चलते यह गड़बड़ी सामने आई है। वहीं उपसंचालक कृषि एसपी शर्मा का कहना है कि उन्‍हें कलेक्‍टर के माध्‍यम से जांच मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद बड़े घालमेल निकलने की आशंका है।

जिन्‍होंने खाद खरीदा, वह किसान है कि नहीं, करा रहे जांच :-

पीएस सर की ओर से जिले में अत्‍याधिक खाद खरीदने वाले 37 किसानों की सूची भेजी गई है। यह सभी जिलों के कलेक्‍टर को दी गई है। ताकि यह सत्‍यापन हो सके कि वास्‍तव में उन्‍होंने जितना खाद खरीदा है उतना उनके पास रकवा है अथवा नहीं। हालांकि इस मामले की जांच एसडीएम और डीडीए को दे दी गई है। – वीरेंद्र सिंह रावत, कलेक्‍टर

एक हेक्‍टेयर तक सिर्फ दो बोरी खाद देने का नियम:-

प्रदेश में इस बार खाद की किल्‍लत के चलते सरकार ने नियमों को भी सख्‍त कर दिया है। बावजूद जिले में खाद की कालाबाजारी रुक नहीं रही है। हालत यह है कि निजी दुकानों से किसानों को मुंह मांगे दाम देने के बाद भी आवश्‍यकता अनुरूप खाद की बोरियां नहीं मिल पा रही है। अफसरों की मानें तो सोसायटी से एक हैक्‍टेयर जमीन वाले किसान को दो बोरी खाद दिया जा रहा है। जबकि एक हैक्‍टेयर से ज्‍यादा वाले को एक बार में पांच से ज्‍यादा बोरी नहीं दी जा रही है। वहीं जिनके नाम से खेती की किताब है उसे ही खाद दिया जा रहा है। ऐसे में जो बुजुर्ग किसान हैं उनके बेटे या परिवार के अन्‍य लोग खाद लेने जाते हैं तो उन्‍हें लौटा दिया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल ये हैं‍ कि आखिर 37 किसानों को 10 हजार से ज्‍यादा यूरिया की बोरियां कैसे दे दी गई। इसी के चलते कृषि विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी ने भिण्‍ड कलेक्‍टर को उक्‍त मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

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