जिले के हॉकी फीडर सेंटर मण्डीदीप को भारत सरकार ने खेलो इंडिया स्कीम के तहत दी स्वीकृति

5:25 pm or October 5, 2021
जिले के हॉकी फीडर सेंटर मण्डीदीप को भारत सरकार ने खेलो इंडिया स्कीम के तहत दी स्वीकृति

दीपक कांकर

रायसेन, 05 अक्टूबर ;अभी तक;  भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा जिले के हॉकी फीडर सेंटर मण्डीदीप को खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत, खेला इंडिया सेंटर के रूप में मान्यता दी है। अब योजना के तहत एक मुश्त राशि पॉच लाख रूपए मैदान के रख-रखाव, स्थायी स्वरूप के खेल उपकरण आदि के लिए तथा चार वर्षो तक प्रत्येक वर्ष पॉच लाख रूपए की राशि खेल प्रशिक्षक के मानदेय, अस्थायी खेल सामग्री एवं खिलाड़ियों के टूर्नामेंट एक्सपोजर के लिए संचालनालय खेल एवं युवा कल्याण के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

जिले की इस उपलब्धि पर कलेक्टर श्री अरविन्द कुमार दुबे तथा पुलिस अधीक्षक श्री विकास सहवाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे जिले के हॉकी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के ओर बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं रायसेन जिले के खिलाड़ी भी देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी श्री जलज चतुर्वेदी ने बताया कि खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत पूरे देश में तीन वर्षों में 1000 खेलो इंडिया सेंटर खोलने की योजना है। भारत सरकार द्वारा 01 अक्टूबर 2021 को राज्य को 9 खेलों में 18 सेंटर की स्वीकृति जारी की गई है, जिसमें रायसेन का मण्डीदीप सेंटर भी सम्मिलित है।

उल्लेखनीय है कि जिले में हॉकी फीडर सेंटर मंडीदीप की स्थापना वर्ष 2011 में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा की गई थी, जिसके माध्यम से विगत 10 वर्षों में 40 लड़कियाँ एवं 30 लड़कों ने राष्ट्रीय स्तर पर सहभागिता की है। पिछले 10 वर्षों में सात बालक एवं पॉच बालिका खिलाड़ियों का चयन मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी में किया गया है। गत माह मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी के लिए जिले में व्यापक पैमाने से टेलेंट सर्च अभियान चलाया गया था, जिससे पश्चात संभाग व राज्य स्तर पर तीसरे चरण में प्रदेश में जिले से सर्वाधिक आठ बालिका व चार बालक खिलाड़ियों का चयन अंतिम चरण की ट्रायल में हुआ था। खेलो इंडिया सेंटर हेतु जिले द्वारा माह मार्च 2021 में संचालनालय भोपाल को प्रस्ताव भेजा गया था। संचालनालय व शासन स्तर पर परीक्षण उपरांत माह अप्रैल 2021 के अंतिम सप्ताह में प्रस्ताव स्वीकृति हेतु भारत सरकार को प्रेषित किया गया था।