जिले में कानून कायदें खुंटी पर टांग दिये गये, नियमों की अनदेखी कर अधिकारी अपनी मनमर्जी चला रहे

आनंद ताम्रकार
बालाघाट ३ नवंबर ;अभी तक;  जिले में कानून कायदें खुंटी पर टांग दिये गये है। नियमों की अनदेखी कर अधिकारी अपनी मनमर्जी चला रहे है सरकारी जमीन पर अतिक्रमण,अवैध निर्माण,अवैध उत्खनन से जुडे मामलों पर कार्यवाही करने की बजाय संलिप्त लोगों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
इस विसंगतियों के चलते ही मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा माफियाओं के खिलाफ अभियान छेडे जाने के आदेश को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।
                   जिले में ऐसी अराजक स्थिति के चलते ही कानून कायदों की अनदेखी करते हुये मध्यप्रदेश राजपत्र में 31 जनवरी 2019 को प्रकाशित खादय नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता सरक्षण विभाग द्वारा मध्यप्रदेश चांवल अधिप्राप्ति (उदग्रहण आदेश) 1979 के खण्ड 3 ब में जारी समस्त अधिसूचनाओं को अधिक्रमित करते हुये राज्य सरकार की एंजेसियों द्वारा धारित धान को निर्देशित निबंधनों तथा षर्तों पर चांवल में प्राथमिकता पर सम्परिवर्तित करने का उल्लेख किया है। लेकिन राजपत्र में प्रकाषित कण्डिका 3 एवं 3.8, 3.9 का परिपालन नही किया गया।
                 राजपत्र की कण्डिका 8 में उल्लेखित बिन्दू राज्य एजेंसी की धान का मिलिंग करने वाला प्रत्येक मिलर जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी को मिलिंग समयावधि के दौरान प्रत्येक 15 दिवस में आयुक्त/संचालक,खादय नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, मध्यप्रदेश द्वारा निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध करायेगा इस बिन्दू का जिले में कहीं भी अमल नही हुआ?
                कण्डिका 3 में निहित प्रावधानों के अनुसार कस्टम मिलिंग कराये जाने हेतु राज्य सरकार की एंजेसी के साथ करार नामा निष्पादित किये जाने एवं करार के निबंधन तथा शर्तों का परिपालन सूनिश्चित किये जाने हेतू निर्देशित किया है लेकिन बालाघाट जिले में धान खरीदी के लिये एवं कस्टम मिलिंग के लिये प्राधिकृत एंजेसी मध्य प्रदेश राज्य विपणन संघ के जिला विपणन अधिकारी द्वारा वर्ष 2019-20 जो करारनामा निष्पादित कराया गया है उसमें कण्डिका क्रमांक 33 में प्रथम निरीक्षण मिल पाईंट पर सीएमआर की गुणवत्ता की जांच विपणन संघ के द्वारा की जायेगी। लेकिन इसका परिपालन ही नही किया गया।
                  कण्डिका 39 के अनुसार विपणन संघ के गोदामों में मिल तक धान के परिवहन तथा मिलिंग उपरांत सी एम आर चावंल के मिल से कार्पोरेशन/भा.खा.नि.के निर्दिष्ट गोदाम तक तथा यथा स्थिति शासन द्वारा निर्दिष्ट करने पर अंतर जिला परिवहन में लगाये गये ट्रकों में कारर्पोरेषन द्वारा निर्धारित स्पेशिफिकेशन का जी.पी.एस.मिलर द्वारा अपने स्वयं के व्यय पर लगाया जायेगा। परिवहन के उपयोग में लाये जा रहे वाहनों का विवरण यथा ट्रक नंबर आदि एवं जी.पी.एस.का विवरण मिलर द्वारा विपणन संघ को उपलब्ध करवाया जायेगा इसका भी अनुपालन नही किया गया।
                 कण्डिका 44 के अनुसार मिंलिग हेतु प्रदाय धान को मिलर अनुबंध अनुसाार केवल मिलिंग हेतु प्रयोग करेगा और किसी अन्य के स्वामित्व में स्थानांतरित नहीं करेगा विक्रय नही कर सकेगा तथा किसी वित्तीय संस्थान या अन्य को रहन/गिरवी नही रख सकेगा। विपणन संघ किसी भी समय मिलिंग हेतु प्रदाय धान का भौतिक सत्यापन कर सकेगा इस नियम का भी अनुपालन नही किया गया और इसके विपरित राईस मिलर्स जो धान प्रदाय कि गई उसे अन्य को बिक्रीत कर दिया गया जिला विपणन अधिकारी द्वारा जिले की किसी भी मिल में जाकर धान के स्टाक का भौतिक सत्यापन नही किया गया।
कण्डिका 66 में विपणन संघ के अधिकृत अधिकारी किसी भी समय मिलर के लेखों का मिल प्रांगण,मिलिंग प्रोसेस का निरीक्षण एवं मिलिंग हेतु दी गई धान, चांवल एवं सह उत्पाद अर्थात कोढा, कनकी,भूसी आदि स्कंध का निरीक्षण/भौतिक सत्यापन कर सकेगें। ऐसे निरीक्षण/भौतिक सत्यापन के लिए मिलर द्वारा पूर्ण सहयोग किया जावेगा। इसमें किसी भी अनियमितता के पाये जाने पर अनुबंध निरस्त किया जा सकेगा।
                   इस प्रकार तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी अर्पित तिवारी ने अपने कार्यकाल में निजी स्वार्थ और कमीशनबाजी की आड में अनुबंधकर्ता राईस मिलर्स को जारी की गई धान के डीओ के नाम पर प्रति क्विंटल तयषुदा कमीशन वसूलने के लिये अपनी मनमर्जी के कानून लागू किये और राजपत्र में प्रकाशित कानून कायदों तथा अनुबंध पत्र की कण्डिकओं की अनदेखी की है। राजपत्र में निहित प्रावधानों का  उल्लघंन किया जाना अपराधिक कृत्य की श्रेणी मे आता है।
                  अर्पित तिवारी द्वारा अपनी मनमर्जी के कायदें चलाये जाने की जांच की जाये और जांच में राजपत्र में दिये गये निर्देशों की अवेहलना किया जाना पाया जाये तो उसके विरूद्ध अपराधिक प्रकरण कायम किये जाने की कार्यवाही की जाये ताकि भविष्य में कानून कायदों का इस तरह का कोई मखौल ना उडायें।

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