जिले में जमकर चल रही यूरिया की कालाबाजारी, शासकीय गोदामों में भी बिक रही महंगी यूरिया

11:54 pm or January 4, 2022

मंडला संवाददाता

मंडला ४ जनवरी ;अभी तक;  जिले में यूरिया खाद का काला कारोबार जोरों पर चल रहा है। इस समय यूरिया खाद की मांग सबसे अधिक है। किसान खेतों में सिंचाई करवा रहे हैं और यूरिया खाद के छिड़काव का यही सबसे उचित समय होता है।  जिले में लगातार यूरिया की रैक बुलवाई जा रही है। लगभग 1हजार 2 सौ मीट्रिक टन यूरिया खाद जिले में बुलवाई गई है। इसके बावजूद जिले में किसान यूरिया खाद के लिए भटक रहे हैं। सहकारी समितियों तक खाद पहुंच ही नहीं रहा और गोदाम खाली होते जा रहे हैं। ऐसे में यूरिया खाद की खपत कैसे हो रही है? इसकी जानकारी देने में अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिले में यूरिया खाद की कालाबाजारी जोरों पर चल रही है। सहकारी समितियों को यूरिया खाद भेजी ही नहीं जा रही और खाद कोटे से खत्म हो रही है।

जिले भर में 43 समितियां हैं जिनके जरिए किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाती है। सहायक रजिस्ट्रार राजेश उइके का भी कहना है कि जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। यदि सहकारी समितियों द्वारा खाद उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है तो यह जांच का विषय है। इस पर तत्काल जानकारी ली जाएगी।

प्रत्येक सहकारी समिति, लैम्प्स आदि में प्रत्येक खाद का मूल्य चस्पा किया जाना अनिवार्य है। जिले के शासकीय गोदामों से भी किसानों को कैश में खाद विक्रय किया जाता है। लेकिन जिला मुख्यालय स्थित गोदाम में भी खाद मूल्य सूची चस्पा नहीं की गई है। जिले के अनेक सहकारी समितियों के यही हाल हैं। किसानों ने बताया कि यदि मूल्य सूची लगा दिया जाएगा तो किसानों से खाद का अधिक मूल्य कैसे वसूल कर सकेंगे? खाद कमी का बहाना बताकर किसानों को उनके द्वारा मांगी गई खाद से कम मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा रही है।