जिले में 18 खदानें स्‍वीकृत, रेत कंपनी के दबाव में थाना प्रभारी 38 अवैध खदानों पर करवा रहे उत्‍खनन

भिण्‍ड से डॉ.रवि शर्मा-

भिंड २४ नवंबर ;अभी तक ;   सरकार ने लंबे समय के पश्‍चात जिले की रेत खदानों से एनजीटी की रोक हटाकर सिंध नदी की 18 खदानों को चलाने की स्‍वीकृति दी है। रेत कंपनी के माध्‍यम से शासन के नियमों को ध्‍यान में रखते हुए इन खदानों से रेत का उत्‍खनन व परिवहन किया जाना है, लेकिन कंपनी के  दबाव में थाना प्रभारियों ने रेत माफिया के साथ मिलकर अपने क्षेत्र की 38 अनलीगल खदानों पर उत्‍खनन शुरू करा दिया है। माफिया ने खनन के लिए नदी में पनडुब्‍बी और पोकलेन मशीनें उतार दी हैं। मजे की बात यह है कि जब खनिज अधिकारी आरपी भदकारिया से पूछा गया कि नदी में पनडुब्‍बी उतारने की अनुमति है या नहीं, तो उन्‍हें इसकी ठीक से जानकारी तक नही थी। अधिकारी कहने लगे कि मशीन से उत्‍खनन कराने के आदेश मिले है, अब पनडुब्‍बी इसमें आती है या नहीं इसके विषय में एक्‍सपर्ट से बात करेंगे। जबकि पानी के अंदर किसी भी मशीन से खोदने की अनुमति शासन नहीं देता है।

370 की जगह 1100 रुपए घन मीटर की रॉयल्‍टी काट रहे

एक तरफ माफिया पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर सिंध नदी में बिना किसी भय के रेत खोद रहे है। वही रेत कंपनी के अधिकारी व कर्मचारी रॉयल्‍टी के नाम पर शासन को चूना लगा रहे है। ट्रैक्‍टर और ट्रक की रॉयल्‍टी 370 रुपए प्रति घन मीटर के हिसाब से काटने के आदेश हैं, लेकिन कंपनी द्वारा ट्रक की रॉयल्‍टी बढाकर 1100 रुपए प्रति घन मीटर से काटी जा रही है। व‍हीं ट्रैक्‍टर में 4 से 5 घन मीटर रेत भरकर कारोबारी ले जाते है, जिनकी रॉयल्‍टी महज 1 घन की काटी जाती ळे जबकि 3 घन मीटर तक रॉयल्‍टी काटने के अधिकार कंपनी के पास है। लेकिन रेत 5 घन मीटर तक भरवाकर एक रॉयल्‍टी काटने के बाद प्रति ट्रॉली पर 1500 रुपए की वसूली कर रहे हैं। माफिया द्वारा शासन के राजस्‍व को ग्रहण लगाकर नदी की कोख को खोखला किया जा रहा है। लेकिन अधिकारी कार्रवाई करने की बजाय रेत कारोबारियों से मिलकर माल पी रहे हैं।

रेत में लाखों की हेराफेरी

रेत का पूरा गणित वरिष्‍ठ अधिकारियों की शय पर चलाया जा रहा है। जिसमें जिल के आला अधिकारी शामिल हैं। नाम न बताने की शर्त पर कारोबारी ने बताया कि ट्रक को  भरने के लिए पहले 5 हजार रुपए भरवाई के देते है, फिर 16 हजार रुपए की रॉयल्‍टी काटते है। ट्रक की रॉयल्‍टी 13 घन मीटर होती है, जिसमें 370 प्रति घन मीटर के हिसाब से 4810 रुपए की रॉयल्‍टी बनती है, लेकिन कंपनी के लोग 1100 रुपए के हिसाब से रॉयल्‍टी काट रहे हैं। जिससे भवन निर्माण करने वाले लोगों को महंगे दाम देकर रेत खरीदनी पड़ती है। जो ट्रॅाली पहले 5 हजार रुपए में आ जाती थी वह 10 हजार रुपए तक महंगी हो गई है। रेत पर बढी महंगाई का जिम्‍मेदार प्रशासन के अधिकारी खुद हैं। लेकिन नियमों के तहत उत्‍खनन किया जाए तो आला अधिकारियों को माल मिलना बंद हो जाएगा।

मुसावली खदान पर 4 पनडुब्‍बी उत्‍खनन में जुटी

जिले की मुसावली खदान अवैध रूप से चल रही है, जिस पर 4 पनडुब्‍बी सिंध नदी में उत्‍खनन कर रही हैं। खदान पर चल रही पनडुब्‍बी व पोकलेन पुलिस व माइलिंग अधिकारियों  की निगरानी में चल रही हैं। भारौली में भारौल कला, दहिमा, बडूरा, रिडिया खदाने संचालित है जिसमें केवल दहिमा खदान को स्‍वीकृति दी है, मगर यह खदान भी रोन क्षेत्र में आती है सबसे अधिक उत्‍खनन अवैध खदानों पर किया जा रहा है। केवल भारौली, अमायन, रौन क्षेत्र से प्रतिदिन 500 से 600 वाहन रेत भरकर निकल रहे है।

यह हैं लीगल, अनलीगल खदानें

सिंध नदी की खदान भारौली कला, गौरम, बरैठी खुर्द, खेरिया सिंध, बड़ेरा, मानगढ, माहिर, मूरतपुरा, बढ़ेतर, धौर में तीन, मटियावली, अजनार, मड़ोरी वैध चल रही है। वही मुसावली, रेमजा, बडूरा, रिडिया, गौरम नंबर 2, रमा, खैरोली, सड़ा, अजीता, कछपुरा, राजबरेठी, सांदुरी, बछरेंठा, बछरोली, निवसाई, कुसमरिया सहित  38 खदाने ऐसी है जो अनलीगल रूप से चल रही है। जिले में बारिश खत्‍म होंने के उपरांत ही माफिया खदानों पर रेत उत्‍खनन में जुट गए है कंपनी के अधिकारी दबंगई करके कारोबारियों से रॉयल्‍टी के नाम पर अवैध वसूली कर रहे है। कई बार मामले को लेकर हंगामा भी हुआ है, पर जब तक प्रशासन के आला अधिकारी ध्‍यान नही देगें, स्थिति में बदलाव नही होगा।

मशीनें से उत्‍खनन की स्‍वीकृति है

वैध खदानों पर मशीनों से रेत खोदने की स्‍वीकृति प्रदान की गई है। जिले में जहां भी अवैध खदानें चल रही है उनके खिलाफ हम कार्रवाई करेंगे।

आरपी भदकारिया, जिला खनिज अधिकारी भिण्‍ड  

Related Articles

Post your comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *