’जीवन की प्रत्येक अवस्था में पोषण का महत्व’’ इस विषय पर वेबीनार का आयोजन शासकीय होम साइंस कालेज होशंगाबाद में

6:27 pm or September 7, 2021
’जीवन की प्रत्येक अवस्था में पोषण का महत्व’’ इस विषय पर वेबीनार का आयोजन शासकीय होम साइंस कालेज होशंगाबाद में
सौरभ तिवारी
होशंगाबाद ७ सितम्बर ;अभी तक;   ’’जीवन की प्रत्येक अवस्था में पोषण का महत्व’’ इस विषय पर वेबीनार का आयोजन शासकीय होम साइंस कालेज होशंगाबाद में किया गया। इस वेबीनार  डॉ. रेनू बाला शर्मा, डॉ मधुबाला वर्मा, डॉ. वंदना श्रीवास्तव के आतिथ्य मेँ संपन्न हुआ।
               कार्यक्रम में सर्वप्रथम अपने स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन ने अपने विचार प्रस्तुत किए, उन्होंने बताया कि पोषक तत्व शरीर को समृद्ध बनातेे हैं नये उतकों का निर्माण और उनकी मरम्मत करते हैं। शरीर को ऊष्मा और ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए संतुलित आहार की आवश्यकता मनुष्य को हर अवस्था में होती है। संतुलित आहार वह है जिसमें पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल शारीरिक आवश्यकता के हिसाब से उचित मात्रा में मौजूद हो। संतुलित आहार खाने वाले स्वस्थ और सक्रिय जीवन शैली की नींव रखते हैं। इससे दीर्घकालीन स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम होता है, साथ ही यह देश में मानव संसाधनों के विकास के लिए भी बेहद जरूरी है, क्योंकि स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है। हमें आहार क्रांति की शुरुआत करनी होगी। उत्तम आहार पर एक अभियान शुरू करने की आवश्यकता है। आहार क्रांति से ही देश कुपोषण और गंभीर बीमारियों से मुक्त होगा और उन्नत समाज और श्रेष्ठ राष्ट्र के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।
               गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष और विषय विशेषज्ञ डॉ किरण पगारे ने विषय को विस्तार से समझाते हुए बताया की पोषण की आवश्यकता शिशु को गर्भ से होती है। पोषक तत्व हमें ऊर्जा देते हैं, सुरक्षा देते हैं, शरीर की टूट-फूट को ठीक करते हैं। बिना पोषक तत्व के हमारा शरीर कमजोर होगा एवं विभिन्न बीमारियों से घिर जाएगा।
                कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय गृह विज्ञान विभाग की डीन एवं लक्ष्मण सिंह गौर अवार्ड प्राप्त डॉ. रेनू बाला शर्मा उपस्थित रहीं। उन्होंने बताया की ग्लोबल हंगर इंडेक्स में कुल 117 देशों में से भारत का 102 स्थान था। इसलिए देश में पोषण की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे। हर व्यक्ति की पोषक तत्वों की आवश्यकता अलग-अलग होती है, भारत में संतुलित भोजन की अनुपलब्धता से लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। हमें इस दिशा में पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता है। वर्तमान में हमारा समाज दो वर्गों में बट गया है, एक वह जो मोटापे से ग्रस्त है और दूसरा जो कम भोजन की समस्या से जूझ रहा है। भारत में ग्रामीण अंचल में महिलाओं की स्थिति अधिक चिंताजनक है। हमें पोषण की दृष्टि से भारत को समृद्ध बनाना है। खानपान में प्रदूषण की वजह से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां हो रही है इसलिए हमें ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना चाहिए। जंक फूड हमारे जीवन के लिए खतरनाक है, हमें जंक फूड का विकल्प ढूंढना पड़ेगा। जीवन की प्रत्येक अवस्था में हमें पोषण तत्वों की आवश्यकता होती है इसलिए हमें इस पर ध्यान देना चाहिए।
             विषय विशेषज्ञ प्राध्यापक डॉ. संध्या राय ने पोषण सप्ताह की ऐतिहासिक जानकारी दी, उन्होंने बताया कि भारत में 1982 से, 1 से 7 सितंबर तक बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए जन सामान्य को पोषण तत्वों की जानकारी देने के लिए पोषण सप्ताह मनाया जाता है। 2021 में स्मार्ट फींिडंग प्रोग्राम भी प्रारंभ हुआ है जिसमें जन्म से ही बच्चों के लिए उचित पोषण की व्यवस्था की बात कही गई है। इस विकट महामारी में भोजन में पोषक तत्व मानसिक स्वास्थ्य व शारीरिक स्वास्थ्य में घनिष्ठ संबंध स्थापित करता है। पोषण एक बुनियादी आवश्यकता है। भारत में 15 प्रतिशत बीमारियां उचित पोषण के अभाव में होती हैं इसलिए संपूर्ण समाज को पौष्टिक भोजन का प्रयोग करना चाहिए थोड़ी सी जागरूकता से हम कम खर्च में भी उचित पोषण तत्व प्राप्त कर सकते हैं।
              विषय विशेषज्ञ एमएलबी महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉ वंदना श्रीवास्तव ने वृद्धावस्था में पोषण की आवश्यकता विषय पर अपने उद्गार व्यक्त किए, उन्होंने बताया कि इस अवस्था में शरीर में शुगर, ब्लड प्रेशर, थायराइड और पाचन संबंधी अनेक समस्याएं हो जाती हैं इसलिए इस अवस्था में पोषक तत्व प्राप्त करना बहुत आवश्यक है। इस अवस्था में भी महिलाओं और पुरुषों में उम्र के हिसाब से पोषक तत्वों की आवश्यकता अलग-अलग होती है। शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन इस अवस्था में तीव्र गति से होता है। संतुलित आहार की आवश्यकता आयु, लिंग, कार्यपद्धति, मौसम व स्थान के आधार पर अलग-अलग होती है। उन्होंने विभिन्न पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए विभिन्न आयु वर्ग में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
               विषय विशेषज्ञ एवं एम.एल.बी. महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉ मधुबाला वर्मा ने नवजात शिशुओं और धात्री माता के उचित पोषण विषय पर अपने विचार दिए तथा गर्भावस्था की विभिन्न अवस्थाओं एवं  प्रसव के पश्चात महिलाएं एवं नवजात शिशु कि भोजन संबंधी विभिन्न आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया की धात्री माता अर्थात् स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सामान्य महिलाओं की तुलना में दुगने प्रोटीन और ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
                  विषय विशेषज्ञ डॉ.संगीता अहिरवार, प्राध्यापक शासकीय गृह विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने किशोरावस्था में पोषण की आवश्यकता विषय पर अपने विचार रखें उन्होंने बताया कि किशोरावस्था संवेदनशील अवस्था होती है इसमें विकास की गति तीव्र होती है एवं संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास भी होता है। इस अवस्था में बालक एवं बालिकाओं की पोषण की आवश्यकता अलग-अलग होती है। वर्तमान समय में किशोर होते बच्चों में मोटापे और एनीमिया जैसी समस्याएं हो रही है। इसलिए संतुलित आहार आवश्यक है। बालिकाओं पर परिवार बढ़ाने की जिम्मेदारी और बालकों पर परिवार चलाने की जिम्मेदारी है। यही बालक बालिकाएं आगे चलकर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देंगे इसलिए इनके उचित खानपान की और हमें ध्यान देना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. भारती दुबे प्राध्यापक शासकीय गृह विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने सम्मानित अतिथियों एवं उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों का आभार प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग डॉ. निशा रिछारिया ने किया कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं एवं प्राध्यापक उपस्थित रहे।
विशेष सहयोगी के रुप में डॉ. मनीषा तिवारी डॉ. विजया देवासकर सौम्या चौहान नीतू पवार, डॉ. रीना मालवीय रहे।
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