जीवन में सद्गुरू का होना अति आवश्यक है – चैतन्यानन्दगिरीजी मसा

2:40 pm or July 23, 2022

महावीर अग्रवाल

मंदसौर २३ जुलाई ;अभी तक;  नगर के खानपुरा स्थित श्री केशव सत्संग भवन में श्री चैतन्यानन्दगिरीजी मसा का दिव्य चातुर्मास चल रहा है। जिसमे प्रवचनों के अंतर्गत संतश्री द्वारा भक्तों को श्रीमद् देवी भवगती महापुराण का श्रवण करवाया जा रहा है शनिवार को भगवती महापुराण के प्रथम स्कंद का समापन संतश्री द्वारा किया गया अब आज रविवार द्वितिय स्कंद का वाचन किया जायेगा।

23 जुलाई शनिवार को धर्मसभा में चैतन्यानन्दगिरीजी महाराज साहब ने बताया कि वेदव्यास जी के पुत्र सुखदेव जी अपने पिता की आज्ञा मानकर जब राजा जनक के पास जाते है तो वहां राजा जनक सुखदेव जी को वहीं बातें वहीं ज्ञान देते है जो उनके पिता उनको पूर्व में दे चुके होते है। राजा जनक की बातें सुन सुखदेव जी वापस अपने पिता के पास लौट जाते है और सुखदेव जी अपने पिता की आज्ञा मानकर विवाह कर लेते है जिससे उनको तीन पुत्रों की प्राप्ति होती है। जिसका नाम अरूणः, श्रीमान और देवत्त होते है। धर्मसभा ने संत श्री ने कहा कि जीवन में एक सद्गुरू का होना अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि यही हमें मार्ग दिखाते हैं। सुखदेव जी को राजा जनक के रूप में सद्गुरू मिले तो वहीं सुखदेव जी तीनों पुत्रों को नारद मुनि के रूप में सद्गुरू मिले जिससे उनके जीवन का कल्याण हुआ। धर्मसभा में चैतन्यानन्दगिरीजी ने बताया कि जब तक पूर्ण वैराग्य न हो सन्यासी नहीं बनना चाहिए। ढूल मूल रवैये से जब सन्यासी बनते है तो सफलता नहीं मिलती। जब पूर्ण वैराग्य हो तभी सन्यासी बनना चाहिए। जब तक इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण न हो सन्यासी नहीं बनना चाहिए। सन्यासी बनने से पहले ब्रम्हचर्य का व्रत लेना चाहिए यदि इसमें सफल हो तो ही सन्यासी बनना चाहिए। संत श्री ने धर्मसभा में पाण्डव वंश की उत्पत्ति कैसे हुई इसका भी वर्णन किया।
जिज्ञासा को खत्म करना महापुरूष का काम
धर्म सभा में संत श्री ने कहा कि आमजनों की जिज्ञासा को शांत करना उसे खत्म करना महापुरूष या संतो का काम होता है। संत तो जहां जनसमुदाय दिखे वहीं उपदेश देना प्रारंभ कर देते है। आमजनों के जीवन का उद्धार करना ही संतों का प्रथम कर्तव्य है।

आज से प्रारंभ होगा द्वितिय स्कंद
केशव सत्संग भवन में प्रतिदिन प्रातः 8 बजे से 10 बजे तक श्रीमद देवी भगवती महापुराण का वाचन चल रहा है। इसके प्रथम स्कंद का समापन संतश्री के द्वारा शनिवार को किया गया। अब रविवार से भगवती महापुराण के द्वितिय स्कंद का वाचन प्रारंभ किया जायेगा। धर्मसभा के अंत में भगवान जगदीश की आरती उतारी गई जिसके पश्चात् प्रसादी का वितरण किया गया।

धर्मसभा में जगदीशचंद्र सेठिया, ब्रजेश जोशी, कमल देवडा, मोहनलाल पारिख, प्रेमचंद पाटीदार, जगदीश गर्ग, बंशीलाल टांक, पं शिवनारायण शर्मा  आदि उपस्थित थे।