जेल अभिरक्षा में बंदी की मौत पर वारिसों को पांच लाख रूपये दो माह में दें*

महावीर अग्रवाल
मंदसौर / भोपाल  ३ जनवरी ;अभी तक; मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने राज्य शासन से जेल अभिरक्षा में बंदी की मौत पर उसके वैध वारिसों को पांच लाख रूपये मुआवजा राशि दो माह में देने की अनुशंसा की है। *मामला डिण्डौरी जिले का है। आयोग ने प्रकरण क्र 6580/डिण्डौरी/2019 में* जिला जेल डिण्डौरी की अभिरक्षा में रहे बंदी दुर्गेश सिंह की 17 सितम्बर 2019 को पाकशाला में काम करने के दौरान सब्जी से भरे गरम गंज (बर्तन) को ले जाते समय दुर्घटना में शरीर जलने से आयी गंभीर चोटों और उससे उत्पन्न अन्य कठिनाईयों के कारण उसकी मौत हो जाने के मामले में यह अनुशंसा की है। मामले में आयोग ने पाया कि जेलकर्मियों की घोर लापरवाही के कारण मृतक के जीवन जीने के अधिकार और उसके मानव अधिकारों की घोर उपेक्षा हुई।
                   अनुशंसा में आयोग ने कहा है कि राज्य शासन जेलों में कैद बंदियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए युक्तियुक्त सावधानी बरते जाने के अधीन रहते हुए ऐसे बंदियों से नियमानुसार श्रमकार्य कराये जाने के दौरान बंदी को पहुंची हानि/क्षति/मृत्यु के संबंध में क्षतिपूर्ति के लिए जेल नियमावली में संशोधन कर नियम बनाये अथवा ऐसी कोई योजना या दुर्घटना बीमा योजना की व्यवस्था करे, जिससे जेल में श्रमकार्य कर रहे ऐसे बंदियों को भी समान रूप से जेल के बाहर श्रमकार्य करने वाले व्यक्तियों को भारत के विभिन्न श्रम कानूनों के अंतर्गत प्राप्त अधिकार और सुविधाओं विशेषकर ऐसे कार्य के दौरान हुई हानि/क्षति/मृत्यु के लिए क्षतिपूर्ति प्राप्त हो सके। क्योंकि इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न मामलों में मौलिक अधिकार विशेषकर अनुच्छेद-21 के अंतर्गत प्राप्त जीवन जीने के अधिकार के उल्लंघन की स्थिति में मुआवजा देने को मान्य किया गया है। आयेाग ने यह भी कहा है कि राज्य शासन धारा-55क दण्ड प्रक्रिया संहिता के स्पष्ट वैधानिक प्रावधान को देखते हुए जेलों की पाकशालाओं में श्रम का कार्य कर रहे बंदियों की सुरक्षा के लिए सावधानी सुनिश्चित करने के लिए पाकशाला में गरम सब्जी से भरे बर्तनों को पाकशाला से वितरण हेतु अन्यत्र बैरकों या अन्य किसी स्थान पर ले जाने के दौरान बंदियों से ऐसे गरम बर्तनों को उठाया जाना बंद करते हुए, इसके लिए आवश्यक ट्रालियों की व्यवस्था करे, जिससे ऐसे गरम सब्जी से भरे बर्तन सुरक्षित रूप से ट्रालियों के जरिये ले जाये जा सके और बंदियों को किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति न पहुंचे।
              *दण्डित बंदी की मौत पर वारिसों को पांच लाख रूपये दो माह में दें*
                 मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने राज्य शासन से दण्डित बंदी की मौत पर उसके वैध वारिसों को पांच लाख रूपये मुआवजा राशि दो माह में देने की अनुशंसा की है। *मामला सीधी जिले का है। आयोग ने प्रकरण क्र. 4037+4691/सीधी/2020 में* जिला जेल सीधी में दण्डित बंदी विजय कुमार पटेल की 5 अगस्त 2020 को जेल परिसर के सभागृह में छत पर लोहे की राड में लगे तारों से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेने के मामले में यह अनुशंसा की है। शासन चाहे, तो इस राशि की वसूली दोषी जेलकर्मियों से कर सकता है। मामले में आयोग ने पाया कि जेलकर्मियों की घोर लापरवाही के कारण मृतक के जीवन जीने के अधिकार और उसके मानव अधिकारों की घोर उपेक्षा हुई।
अनुशंसा में आयोग ने कहा है कि राज्य शासन जिला जेल सीधी और अन्य जेलों में बंदियों की सुरक्षा के वैधानिक दायित्व के पालन को सुनिश्चित करने हेतु बंदियों पर उचित सर्तकता और सजगता के लिए आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करे, जिससे बंदियों पर सतत् निगरानी रखते हुए, उन्हें इस प्रकार से आत्महत्या कर सकने के अवसर प्राप्त न हो सकें। आयेाग ने यह भी कहा है कि राज्य शासन जेलों में दाखिल किसी बंदी को जेल परिसर से संबंधित किसी कार्य को सौपने के पूर्व यह सुनिश्चित करें कि उसके पास ऐसे कार्य करने की शैक्षणिक/व्यवसायिक योग्यता के साथ ही कार्य का अनुभव है। इसके साथ ही ऐसा कार्य किये जाने के दौरान भी उस पर धारा-55क दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत आवश्यक सर्तकता और सजगता के साथ नजर भी रखी जाये।