जो परिवार की न हो सकीं वह क्षेत्र की जनता की क्या होंगी. -प्रत्याशी ससुर  मोतीराम कास्डेकर

मयंक शर्मा

खंडवा/बुरहानपुर २३ अक्टूबर ;अभी तक; निमाड के पूर्वी अंचल की  नेपानगरविधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव ं  बीजेपी प्रत्याशी सुमित्रा कास्डेकर को विपक्षी दल कांग्रेस के साथ साथ अपने ही ससुर का  कोपभाजक बनना पड रहा है।कांग्रेस चुनावी मंच से  कह रही है जो बहू अपने पिता तुल्य ससुर  का ख्याल नहीं रख पाई वो क्षेत्र की जनता का क्या ख्याल रखेगी.।
बीजेपी ने अपने प्रत्याशी सुमित्रा कास्डेकर का बचाव करते हुए कांग्रेस को  नसीहत दी कि उन्हें चुनाव के समय ही ससुर क्यों याद आए. है। इससे पहले कांग्रेस ने ससुर की  खैरखबर क्यों नहीं ली.। बीजेपी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.है। संासद नंदकुमारसिंह ने  कहा कि सीट पर भाजपा की ही जीत होगी।

बीजेपी नेता व जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानेश्वर पाटिल  ने कहा कि  एक परिवार  में अलग अलग सदस्यों के अलग अलग विचार धारा वाले दलों में होना कोई नई बात नहीं है,।  सुमित्रा कास्डेकर के ससुर के कांग्रेस का प्रचार प्रसार करने से बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।.

चुनावी रण मे उतरते हुये क प्रत्याशी सुमित्रा कास्डेकर के ससुर मोतीराम  कास्डेकर ने कहा कि वे खुलकर कांग्रेस प्रत्याशी रामकिशन पटेल का प्रचार कर रहे हैं। वे चाहते  है सुमित्रा चुनाव हार जाये।

समीक्षात्मक तौर पर प्रत्याशी कास्डेकर का  गृह कलह खुलकर सडको मे आने के साथ  चुनावी रंगत मे रंगा जा रहा  है। दल बदल कर कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने के  बाद  विधायक पद से इस्तीफा के बाद भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार के रूप मे मैदान में उतारा है।

2018 के विधान सभा चुनाव में बुरहानपुर जिले की कागज नगरी नेपानगर सीट से  कांग्रेस की सुमित्रा कास्डेकर ने विजश्री दर्ज कर विधानसभा पहुंची थीं. लेकिन मार्च में कांग्रेस की  कमलनाथ सरकार गिराने के कुछ समय बाद वे (सुमित्रा ) दलबदल कर भाजपा   की पल्लापकड  गयी है। दलबदल के कारण उनके ें विधायक पद  से इस्तीफे के बाद नेपानगर सीट खाली हो  गयी. अब यहां हो रहे उपचुनाव के लिये 3 नवम्बर को मतदान होना है ।

विरोधाभास यह है कि 2018 के मुकाबले इस बार चुनाव में  कास्डेकर के घर  का घमासान सड़क पर आ गया है.। उनके ससुर मोती राम कास्डेकर पुराने कांग्रेसी नेता हैं. वो  अपनी बहू सुमित्रा और बेटे का चुनाव में साथ नहीं दे रहे हैं.।

मोतीराम कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं. वो कांग्रेस की नुक्कड़ सभाओं और  जनसंपर्क कार्यक्रमों में बढ़चढ़कर शामिल हो रहे हैं.।… मोतीराम ने आरोप लगाया था कि उनकी  बहू सुमित्रा कास्डेकर के इशारे पर कुछ लोगों ने उन्हें पूर्व सीएम कमलनाथ की जनसभा में जाने  रोका थां वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि उनके बेटे-बहू ने उनसे खराब व्यवहार रखा। वे   सार्वजनिक सभाओं में यह कह रहे हैं जो मेरा नहीं हो सका वह नेपानगर की जनता का क्या  होगा.।

वे यहां तक व्यग्य कस जाते है कि  कांग्रेस छोड़ कर जब वे बीजेपी में शामिल हुईं तो  उन्हें ऐसा लग रहा था बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उनके साथ बीजेपी में शामिल होंगे. लेकिन  कार्यकर्ता तो दूर सुमित्रा कास्डेकर अपने परिवार को भी बीजेपी में नहीं ले जा सकीं.। उनके ससुर  उनके साथ किए गए व्यवहार को सार्वजनिक कर रहे हैं जिससे यह कहा जा सकता है जो अपने  परिवार की न हो सकीं वह क्षेत्र की जनता की क्या होंगी. ।
हालांकि कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजय रधुवंशी ने इस बात से इंकार किया कि कांग्रेस सुमित्रा  कास्डेकर के ससुर का सियासी लाभ लेने का प्रयास कर रही है। वे हमारे पुराने साथी है और  स्वयं बहु की हार के लिये उत्साहित है और प्रचार में लगे है। यह भी असामान्य है कि  कांग्रेस  अपनी नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रम में मोतीराम कास्डेकर को ले जाकर उनका महिमा  मंडन कर रही है.

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