टिड्डियों के हमले से होने वाले फसल नुकसान और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर सांसद सुधीर गुप्ता ने लोकसभा में किया प्रश्न

9:19 pm or September 27, 2020

महावीर अग्रवाल

मंदसौर २७ सितम्बर ;अभी तक;  सांसद सुधीर गुप्ता ने टिड्डियों से हो रहे फसलों के नुकसान और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर लोकसभा में प्रश्न किया । सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक रूप से टिड्डियों के हमले हो रहे हैं जिससे किसानों को फसल नुकसान हो रहा है । फसलों की नुकसानी और टिड्डियों के हमलों को रोकने के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं ।

 

इसके साथ ही सांसद गुप्ता ने टिड्डियों के हमलों से अभी तक हुए फसल नुकसानी के आकलन की बात कहीं। सांसद गुप्ता ने कहा कि क्या सरकार टिड्डियों के हमलों से प्रभावित किसानों के लिए कोई मुआवजा राहत देने की योजना बना रही है यदि ऐसा है तो उसका ब्यौरा क्या है। वहीं टिड्डियों के हमले रोकने के लिए पड़ोसी देशों से कोई बातचीत हुई जहां से टिड्डियों की उत्पत्ति हुई है । सांसद सुधीर गुप्ता ने इस बात को भी प्रमुखता से रखा की टिड्डियों के हमलों के बारे में किसानों को शिक्षित या प्रशिक्षित किया जा रहा है या नहीं । इस संबंध में भी कोई योजना बनी हो तो उसका भी ब्यौरा दे । साथ ही सरकार द्वारा स्थिति की पुर्नवृत्ति रोकने के लिए भविष्य टिड्डियों के हमलों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं या कार्य योजना बनाई गई है, इसका भी ब्यौरा दें ।

प्रश्न के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान 10 राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र छत्तीसगढ़, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड में टिड्डियों के आने की सूचना प्राप्त हुई थी जहां टिड्डियों के नियंत्रण के लिए राज्य सरकारों के समन्वय से कार्य का संचालन किया गया है। गुजरात, छत्तीसगढ़, पंजाब और बिहार की राज्य सरकार ने अपने राज्य में किसी प्रकार के फसल नुकसान की सूचना नहीं दी। हालांकि राजस्थान सरकार ने बीकानेर में 34.52 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियों के आक्रमण के कारण 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान हुआ है। मध्य प्रदेश सरकार ने दमोह जिले में 44 हेक्टेयर में 10 प्रतिशत सोयाबीन की फसल को नुकसान होने की सूचना दी है। इसी के साथ ही अन्य राज्यों में भी फसल नुकसानी की सूचना दी है । 11 मार्च 2020 को दक्षिणी पश्चिमी देशों में मरुस्थली वीडियो पर एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें 4 सदस्य देशों अफगानिस्तान, भारत, ईरान और पाकिस्तान के प्रतिनिधि तथा एफएओ के पौध संरक्षण एवं रोम के प्रतिनिधियों ने भी इस बैठक में भाग लिया। साथ ही वास्तविक स्थिति और नियंत्रण को लेकर स्काइप के माध्यम से सदस्य देशों ने तकनीकी अधिकारियों की 24 वर्चुअल बैठकें आयोजित की गई । इसके अलावा मई और जून में विदेश मंत्रालय के माध्यम से केन्या और इथियोपिया से उनके देशों में टिड्डियों की स्थिति के बारे में फीडबैक प्राप्त हुई है।  इन फीडबैक कार्यों के लिए तैयारी करने के लिए कार्य नीतियां बनाई गई। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा टिड्डियों  के अतिक्रमण को प्राकृतिक आपदा के रूप में अधिसूचित किया गया है और राज्य स्थापित प्रक्रिया एवं सहायता के मानदंडों के अनुसार राज्य आपदा अनुक्रिया कोष के तहत राहत उपाय कर सकते हैं । टिड्डियों के आक्रमण के कारण किसानों को होने वाले फसल नुकसान भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत शामिल है । फसल कटाई परीक्षणों के माध्यम से उपज नुकसान का आकलन किया जाता है तथा इसकी प्राथमिक किसानों को पूर्ति की जाती है । इसी के साथ ही प्रभावित सभी राज्यों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं । टिड्डियों नियंत्रण क्षमता को करने के लिए अतिरिक्त 60 उपकरणों की खरीद की गई है और वर्तमान में स्प्रे करने वाले वाहन के साथ 104 नियंत्रण दलों को जमीनी स्तर पर नियंत्रण के लिए लगाया गया है । जमीनी स्तर पर नियंत्रण क्षमता को सेंड करने के लिए 55 वाहन खरीदे गए।  टिड्डियों नियंत्रण प्राचलनों के 200 से अधिक केंद्र सरकार के कार्मिकों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि विश्व में पहली बार टिड्डी नियंत्रण के लिए ड्रोन का उपयोग किया गया है और एक बेल 206 बी3 हेलीकॉप्टर का भी उपयोग हवाई छिड़काव टिड्डी नियंत्रण के लिए किया गया है । भारतीय वायु सेना के अनुकूल हवाई छिड़काव वाले एमआई 17 हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया है । इसी के साथ ही गृह मंत्रालय ने कीट नियंत्रण के लिए पौध संरक्षण रसायनओं के छिडकाव  उपकरण वाले वाहनों तथा ट्रैक्टरों को किराए पर लेने, पानी टैंकरों को किराए पर लेने और राज्य आपदा अनुक्रिया कोष एवं राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया कोष के अंतर्गत सहायता के नए मापदंडों के अंतर्गत टिड्डी नियंत्रण के लिए पौध संरक्षण रसायन की खरीद करने की मंजूरी दी है।  इससे भी राज्य को टिड्डी नियंत्रण प्रचलन में सुविधा हुई है । टिड्डियों के हमले को लेकर सरकार गंभीर है और भविष्य में चिरगांव प्रशिक्षित जागरूकता कार्यक्रम आदि के माध्यम से इन पर नियंत्रण करने के लिए दृढ़ संकल्पित।

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