डिप्टी कलेक्टर ‌विशा माधवानी का अग्रिम जमानत निरस्त,

मयंक शर्मा
खंडवा २३ जून ;अभी तक ;  बुरहानपुर जिले के  नेपानगर की तत्कालीन एसडीएम व वर्तमान में
झाबुआ में पदस्थ  डिप्टी कलेक्टर विशा माधवानी का अग्रिम जमानत आवेदन
मंगलवार को कोर्ट ने निरस्त कर दिया। उन्होने अधिवक्ता के माध्यम से चार
दिन पहले अग्रिम जमानत आवेदन तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश केएस बारिया के
न्यायालय में लगाया गया था।
               माधवानी सहित नौ लोगेा जिसमें 6 शाासकीय  अधिकरी- कर्मचारी है के खिलाफ
ग्राम चैखंडिया के बोरबन तालाब मुआवजा वितरण फर्जीवाड़े की जांच उपरांत
अपर कलेक्टर बुरहानपुर के जांच प्रतिवेदन पर 15 जून को नेपानगर पुलिस ने
अपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। इनमे से पांच को बंदी बना लिया गया
हे।गिरफतारी से बचने हेतु माधवनी ने अग्रिम जमानत का आवेदन बुरहानपुर
न्यायालय में लगाया था जो खारिज कर दिया गया है।
                 नेपानगर थाना प्रभारी लक्ष्मण लौवंशी ने आगे बताया कि पुलिस ने धोखाधड़ी
की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। चार आरोपी फिलहाल फरार चल
रहे हैं। नेपानगर की तत्कालीन एसडीएम मााधवानी ने  अपनी अग्रिम जमानत का
आवेदन बुरहानपुर न्यायालय में लगाया था जो मंगलवार को खारिज हो गया हे।
श्री लौवंशी ने बताया कि फर्जीवाड़े में शामिल दो आरोपी नगर सैनिक सचिन
वर्मा,व  देड़तलाई के इम्तियाज पिता अख्तर खान से नेपानगर थाना पुलिस ने
मंगलवार को भी पूछताछ की, लेकिन वह कुछ खास नहीं बता पाये। तीन दिन की
रिमांड पूरी होने पर सोमवार को  सिविल कोर्ट नेपानगर में पेश किया था।
पुलिस ने कोर्ट में दो आरोपियों सचिन वर्मा और इम्तियाज खान की दो दिन
रिमांड बढ़ावाने मे पुलिस सफल रही है,  जबकि तीन अन्य आरोपी फिरोज, अशोक
नागपुरे, व संजय मावसकर न्याायिक हिरासत में जेल में है।
                 मामले मे  नौ आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जिसमें से चार
आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में कुल 41.57 लाख
544 रुपए का फर्जीवाड़ा का आरोप है।  आरोप है कि सभी नौ आरोपियों ने मिलकर
वास्तविक हकदारों का मुआवजा हड़प कर लिया। जिसकी शिकायत होने पर कलेक्टर
ने एडीएम शैलेंद्र सिंह सोलंकी को जांच अधिकारी बनाकर पूरे मामले की जांच
कराई। जांच प्रतिवेदन सौंपने के बाद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया
गया।
                    भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस आरोपियों को नेपानगर न्यायालय में
पेश किया गया। इससे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सभी आरोपियों का
कोविड टेस्ट कराया गया। उन्होने कहा कि पडताल में पाया ्रया है कि नगर
सैनिक सचिन वर्मा वसूली एजेंट की भूमिका निभाते रहा है जबकि इम्तियाज इस
मामले का मास्टरमाइंड  है। उसने दूसरे लोगों के साथ मिलकर मुआवजे में
फर्जीवाड़े की कहानी रची। कहानी के एक दूसरे किरदार एसडीएम कार्यालय में
बाबू रहे और वर्तमान में फरार अंकित काटे तत्कालीन एसडीएम विषा माधवानी
का करीबी रहा है। फर्जीवाड़े में पुलिस ने उसके खिलाफ भी केस दर्ज किया
है। बताया जा रहा है कि सचिन और इम्तियाज ही उसे अच्छे से पहचानते हैं।
इसलिए इन दो आरोपियों की रिमांड अवधि  बढ़ी है।
0 यह है मामला
नेपानगर तहसील के ग्राम चैखंडिया में बोरबन तालाब के डूब प्रभावितों को
मुआवजा वितरण किया गया था, लेकिन आरोप है कि कुछ पीड़ितों का मुआवजा
तत्कालीन एसडीएम विशा माधवानी सहित नौ आरोपियों ने मिलकर हड़प लिया।
बुरहानपुर के आरटीआई कार्यकर्ता डाॅ. आनंद दीक्षित की शिकायत पर कलेक्टर
प्रवीण सिंह ने पूरे मामले की जांच एडीएम से कराई। इसके बाद तत्कालीन
एसडीएम सहित नौ लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया गया है। पुलिस ने पांच
आरोपियों को गिरफ्तार किया। जबकि तत्कालीन एसडीएम सहित अन्य आरोपी फरार
हैं। पांच आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया गया। जिसमें से
दो को रिमांड पर लेकर तीन आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।4 फरार की
तलाश है।