डेडगली अमावश्या पर पब्जी माता को दिग्दश्रन कराते निकली बच्चो की टोली।

मयंक शर्मा 

खंडवा,10 जून ,अभीतक । प्रकृति से बरसात की मांग के लिये आज शनिवार  को ग्राम ग्राम बच्चों ने मेंढक बनकर अच्छी बारिश की कामना की। डेडगली अमावस्या पर बच्चे पलाश के पत्ते सिर पर एवं शरीर पर बांधकर घर-घर पहुंचे और अच्छी बारिश की कामना की। बालिकाओं ने सिर पर कवेलू रख गोबर की मेंढक बनाकर घरों पर दस्तक दी।
डेडर माता पानी दो के स्थान पर अब बच्चे पब्जी माता की जय कर रहे हैं। ऐसा  नज़ारा खंडवा जिले के ग्राम भेरुखेड़ा में देखने को मिला। बच्चे हाथ
में नीम पत्ती की छड़ी नहीं बल्कि एके 47 की प्रतिकृति साथ लेकर घर घर जाकर पानी और दान मांगते नज़र आए। ग्रामीणो के अनुसार घर घर दस्तक देते बच्चरें की टोली को  महिलाओं ने इन पर पानी डाला। साथियों ने “कोठी प साबू थारो बेटों बाबू, डेडर माता पाणी द…’ जैसी पंक्तियां लोकगीतों के माध्यम से बच्चों ने अच्छी बारिश की कामना की।
निमाड संस्कृति की परिचायक बनी लोक गायक साधना उपाध्याय ने बताया कि दर साल डेडगली अमावस्या पर गांव-गांव में बच्चों ने पलाश के पत्ते शरीर पर बांध कर मेंढक का रूप धारण किया। ग्रामीणों ने इन बच्चों पर पानी डालकर इन्हें दान दिया। समूहों में इन बच्चों ने खाने की सामग्री एकत्र कर शाम को सब बच्चे मिलकर जुंटायी गयी सामग्री से भोज का आयोजन करते है। उल्लेखनीय है कि निमाड़ की यह लोक परंपरा अच्छी वर्षा की कामना को लेकर प्रचलित है। जनधारणा है कि इस स्वरूप को धारण करने से इंद्रदेव प्रसन्न होकर अच्छी वर्षा करते है।