डोडाचूरा तस्कर कोे 10 वर्ष का सश्रम कारावास

महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर / नीमच २९ दिसंबर ;अभी तक;  श्रीमान राजवर्धन गुप्ता, विशेष न्यायाधीश (एन.डी.पी.एस. एक्ट, 1985) नीमच के द्वारा अवैध मादक पदार्थ डोडाचूरा की तस्करी करने वाले आरोपी शंभूलाल उर्फ लाला पिता रमेशचंद्र धोबी, उम्र-31 वर्ष, निवासी-ग्राम हर्कियाखाल (कोटडी इश्तमुरार), थाना-जीरन, जिला नीमच को एन.डी.पी.एस. एक्ट, 1985 की धारा 8/15 के अंतर्गत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,00,000 रूपये जुर्माने से दण्डित किया।
                   श्री मनीष जोशी, लोक अभियोजक द्वारा घटना की जानकारी देते हुुए बताया कि घटना लगभग 05 वर्ष पूर्व की होकर दिनांक 26.05.2016 को मध्य रात्रि की हर्कियाखाल स्थित एक निर्माणाधीन गोदाम की है। थाना प्रभारी जीरन निरीक्षक बी. एल. भाबर मय फौर्स ईलाका भ्रमण करते हुए हर्कियाखाल चैकी पर पहुंचे तो वहां पर मुखबिर ने उपस्थित होकर उन्हें सूचना दी की भारतसिंह सौंधिया के निर्माणाधीन गोदाम के बाहर एक स्कार्पियों एवं फार्चुनर गाडी खडी हैं, जिसमें अवैध मादक पदार्थ डोडाचूर रखा हुआ हैं, जिसको आरोपी शंभूलाल धोबी ढ़ाबो में सप्लाई करने वाला हैं। मुखबिर सूचना के आधार पर निरीक्षक बी. एल. भाबर फौर्स सहित मुखबिर द्वारा बताये गये स्थान पर पहुॅचे जहाॅ मुखबिर द्वारा बताये दोनों वाहन व उसके पास आरोपी खडा दिखा, जिसको फौर्स की सहायता से घेराबंदी कर पकड़ा तथा वाहनों की तलाशी लिये जाने पर पिछे वाली सीट के बीच में 1-1 कट्टा पिसा हुआ डोडाचूरा मिला, जिसका वजन क्रमशः 14 व 15 किलोग्राम था, जिसको जप्त कर आरोपी के पूछताछ किये जाने पर उसके द्वारा बताया गया की उसके घर पर भी 30 किलोग्राम पिसा हुआ डोडाचूरा रखा हैं, जिसकों भी पुलिस द्वारा जप्त किया गया, इस प्रकार आरोपी के कब्जे से कुल 59 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा जप्त करते हुवे आरोपी को गिरफ्तार करके थाना जीरन में अपराध क्रमांक 138/16, धारा 8/15 एन.डी.पी.एस. एक्ट 1985 के अंतर्गत पंजीबद्ध कर विवेचना उपरांत अभियोग पत्र नीमच न्यायालय मंे प्रस्तुत किया गया।
                    अभियोजन द्वारा न्यायालय में विचारण के दौरान विवेचक, जप्ती अधिकारी, फोर्स के सदस्यों सहित सभी आवश्यक गवाहों के बयान कराये गये। माननीय न्यायालय द्वारा अभिलेख पर आयी साक्ष्य के आधार पर आरोपी को अवैध रूप से डोडाचूरा की तस्करी किये जाने के अपराध का दोषी मानते हुये धारा 8/15 एन.डी.पी.एस. एक्ट 1985 के अंतर्गत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,00,000रू. जुर्माने से दण्डित किया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी श्री मनीष जोशी, लोक अभियोजक, नीमच द्वारा की गई।