डोलोमाइट खदानों के विरोध ये लड़ाई जल जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई है –  विधायक पट्टटा

1:20 pm or March 2, 2021
डोलोमाइट खदानों के विरोध ये लड़ाई जल जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई है -  विधायक पट्टटा
मण्डला से सलिल
मंडला २ मर च ;अभी तक; मध्यप्रदेश के वन जन जल खनिज संपदा से सम्पन्न जिला मण्डला की सरज़मी में प्रकृति ने अपार सौगात दी हैं पर इनका दोहन तो किया जा रहा हैं पर स्थानीय स्तर पर यहाँ इस दोहन सम्पदा से समूचे जनजीवन को तमाम मुश्किलों से सामना करना पड़ता हैं। चूना खदानो से खनन से जहां पर्यावरणी असंतुलन बिगड़ रहा हैं वही खदानों के पास की जन आबादी को खनन होने से जनजीवन पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा हैं।
उल्लेखनीय यह भी हैं कि विश्व विख्यात कान्हा टाइगर रिजर्व के सटी वनभूमि के लगभग दो हजार एकड़ भूमि जो रिजर्व फारेस्ट हैं इस वन इलाके में केटीआर के बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियो की आवाजाही की बात विधायक बिछिया नारायण सिंह पट्टा ने करते हुए कहा हैं कि केटीआर में आज की परिस्थितियों में बाघो की वंशवृद्धि के चलते कान्हा के जंगल इलाका कम पड़ रहा हैं ऐसे में डोलोमाइट खदानों का विस्तार एक बड़ी समस्या बन जाएगी । बीते फरवरी माह के अंतिम दिवस महापंचायत के आयोजन में बड़ी संख्या में हर तबके के लोग जुड़े रहैं।
नई डोलोमाइट खदानों के विरोध में महापंचायत में जुटे हजारों ग्रामीण
 जिले के ब्लॉक बिछिया अंतर्गत ग्राम ककैया, भंवरताल, काताजर, कुरवाही, भटियाटोला, कातामाल सहित अन्य ग्रामों की हजारों एकड़ वन व शासकीय भूमि में नई डोलोमाइट खदानों की स्वीकृति के विरोध में अब ग्रामीण लामबंद होने लगे हैं। हजारों की संख्या में ग्रामीण खुले रूप से इसका विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों के इस विरोध की आवाज बने हैं बिछिया विधानसभा के विधायक नारायण सिंह पट्टा, जिन्होंने ग्रामीणों के इस विरोध को एक मंच प्रदान किया और कहा मैं अपनी अंतिम सांस तक ग्रामीणों की इस लड़ाई को लड़ने का वचन दिया।
 नई डोलोमाइट खदानों के विरोध में 28 फरवरी रविवार को बिछिया के ग्राम मांगा के सुआटोरिया के समीप बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा के नेतृत्व में एक महापंचायत का आयोजन किया गया जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित हुए।
अंतिम सांस तक जनता की लड़ाई लड़ेंगे
महापंचायत में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विधायक श्री पट्टा ने कहा कि मुझे आजतक एक बात समझ मे नहीं आई कि औद्योगिकरण की कीमत हर बार ग्रामीण क्षेत्र की जनता और खासकर आदिवासी जिलों के ग्रामीण क्षेत्र की जनता को ही क्यों चुकानी पड़ती है। पूंजीवाद अपने पैर पसारते पसारते अब हमारे जल जंगल जमीन को हमसे छीनने की कोशिश में लगा है लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे, अपनी अंतिम सांस तक इसकी लड़ाई लड़ेंगे। आपने मुझे अपनी इसी लड़ाई को लड़ने के लिए चुना है और मैं इससे कभी पीछे नहीं हटूंगा। हमारे क्षेत्र में पहले से ही 42 डोलोमाइट खदानें चल रही हैं जिनसे खदानों वाले ग्रामों के नागरिकों को जिन समस्याओं से जूझना पड़ रहा है यह वो ही जानते हैं। अब तो नई खदानों के नाम पर वन भूमि की तक बलि चढ़ाने की कोशिश की जा रही है।  जल जंगल जमीन की लड़ाई को समझाते हुए उन्होंने कहा कि डोलोमाइट खदानों में होने वाली ब्लास्टिंग से उस क्षेत्र के भूमिगत जल का स्तर इतने नीचे चला जाता है कि हजार फीट बोरिंग के बाद भी पानी नहीं निकलता। ककैया ग्राम के नागरिक इस समस्या को झेल रहे हैं, यहाँ 600 फिट बोरिंग के बाद भी पानी नहीं निकलता, धीरे धीरे यह स्तर और घटता जाएगा। इसी तरह प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हमारे इस क्षेत्र की वन भूमि जो कान्हा नेशनल पार्क से लगी हुई है यहां भी डोलोमाइट खदानें खोलने की तैयारी है। कुरवाही और ककैया की लगभग 2 हज़ार एकड़ से भी ज्यादा आरक्षित वन भूमि चिन्हित की गई है।
यह वही भूमि है जहां पिछले एक साल में बाघ ने 12 बार शिकार किया है, जंगली बाइसन खुले में देखने को मिल जाते हैं, और इसी क्षेत्र को खदानों के लिए देने की तैयारी है, इसी जंगल से हमारे आदिवासी समाज के नागरिकों का जीवन यापन होता है और इसी को हमसे छीनने की कोशिश हो रही है। इस तरह हमारा जंगल छीना जा रहा है। इसी तरह अन्य ग्रामों की लगभग 400 एकड़ से ज्यादा शासकीय भूमि भी इन खदानों के लिए दी जाने की तैयारी है इस तरह हमारी जमीन छीनी जा रही है लेकिन हम ये होने नहीं देंगे।
 इस महापंचायत में ग्राम सभाओं और वन समितियों के प्रस्ताव होंगे जिसमें नई डोलोमाइट खदानों की स्वीकृति की असहमति होगी, ये प्रस्ताव शासन को भेजे जाएंगे और यदि इसके बाद भी शासन ने जिद की तो हम जमीन पर लेटकर पेड़ों से चिपककर आंदोलन करेंगे लेकिन अपना जल जंगल और जमीन बचाकर रहेंगे।
पर्यावरण को नष्ट करने की है साजिश
इस दौरान क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी और राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त अधिवक्ता विभूति दत्त झा ने कहा कि पुरानी डोलोमाइट खदानों से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर हम सालों से लड़ाई लड़ रहे हैं और अब नई डोलोमाइट खदानें स्वीकृत करके पर्यावरण को बड़े स्तर में क्षति पहुंचाने की साजिश की जा रही है। अब यह बात सबसे खतरनाक स्तर पर आ गई है कि हमारे जंगलों को नष्ट करके खदानें बनाई जा रही हैं। जंगलों को तो हम किसी कीमत में नष्ट नहीं होने देंगे, चाहे हमारी जान क्यों न चली जाये, सरकार एक बात सुन ले कि जंगलों में उत्खनन करने के लिए उन्हें मेरी लाश पर से जाना होगा। हम हर स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं लेकिन जंगलों को नष्ट करने की सरकार की कोशिश को कामयाब नहीं होने देंगे।
पूंजीपतियों के गोद मे बैठ गई हैं सरकारें
निवास  विधायक डॉ अशोक मर्सकोले ने कहा कि नई डोलोमाइट खदानों की स्वीकृति के लिए सरकार ने सीधे ही ग्राम पंचायतों पर दबाब बनाकर प्रस्ताव लेने की कोशिश की है सरकार चाहती है कि चाहे कोई भी स्तिथि हो वो जंगलों को पूंजीपतियों के हाथों में सौंप देंगे। हम हर स्तर पर इसकी लड़ाई लड़ेंगे लेकिन जंगलों को नष्ट नहीं होने देंगे। विस्थापन करने की साजिशें जो रची जा रही हैं वो कामयाब नहीं होने देंगे। अदानियो अम्बानियों को जंगल मे नहीं घुसने देंगे।
महापंचायत में प्रस्ताव हुए पारित
इस महापंचायत के दौरान ग्राम पंचायत ककैया, काताजर, बरबसपुर(कातामाल), ग्राम पंचायत चरगांव सहित वन समिति कुरवाही, चरगांव, ककैया आदि के सरपंच सचिवों व समिति अध्यक्षों ने अपने ग्राम के ग्रामीणों की उपस्थिति में नई डोलोमाइट खदानों के लिए असहमति का प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव को संबंधित पंचायतों व वन समिति के द्वारा अपने उच्च कार्यालय में प्रेषित किया जाएगा, जिसके बाद शासन इस संबंध में निर्णय लेगा।
इस दौरान विधायक नारायण सिंह पट्टा, समाजसेवी विभूतिदत्त झा, निवास विधायक डॉ अशोक मर्सकोले, शील देवी झा, दादा मर्सकोले, प्रदीप गोस्वामी, विनोद पटेल, समीर झा, विकास साहू, राहुल सिंगौर, झुनना ठाकुर, झब्बू भाईजान, आत्माराम झारिया, अंजनिया  के वरिष्ठ  पत्रकार  गिरीष झा महापंचायत संयोजक क्रांतिराज झारिया, विमल हरदहा, शाकिर खान, संदेश शैलू झारिया, शोभराम ताराम, प्रीतम बर्मन, भगत वलके, पिंटू प्रधान, इंद्रजीत भंडारी, राधेलाल धनगर, रवि झारिया, रविन्द्र झारिया, केदार पटेल, दादा पटेल, अज्जू ठाकुर, रवि नंदा, दुर्गेश कार्तिकेय, अरविंद झारिया सहित ग्राम पंचायतों के सरपंच सचिव वन समितियों के अध्यक्ष सचिव व हजारो की संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

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