तंबाकू के इस्तेमाल से मरीजों की संख्या में हर साल इजाफा, जानलेवा साबित हो रही तंबाकू  

10:07 pm or May 31, 2022

प्रहलाद कछवाहा

मंडला 31मई अभी तक.  मंडला जिले में तंबाकू के इस्तेमाल से मरीजों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है। सिगरेट, तम्बाकू, पान मसाला घातक बीमारियों को जन्म दे रहे है। इसके बावजूद युवाओं में जागरूकता नहीं आ रही है।  मुंह के रोग की जांच में करीब 6० प्रतिशत लोगो को तंबाकू के सेवन बीमारी हो रही है। इसमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में भी लोग आ रहे है। तंबाकू का सेवन नहीं करने से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

बता दे कि इस साल करीब 8 हजार मरीज दांत और मुंह के रोग के सामने आए है। रोजाना करीब 25 मरीज उपचार के लिये पहुंचते है। इसमें हर माह करीब 20 से 25  मरीज ऐसे होते है जिन्हे मुंह न खुलने की बीमारी ने घेर लिया है।  पान मसाला और तंबाकू के इस्तेमाल से मुंह न खुलने की बीमारी का शिकार हो रहे है। इसके अलावा मुंह में छाले की समस्या भी तंबाकू के सेवन से ही आ रही है। करीब 60 प्रतिशत मरीज तंबाकू का इस्तेमाल करते है।  इन मरीजो को तंबाकू की वजह से मुंह का रोग है। प्रतिमाह मंडला जिला अस्पताल में तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट का सेवन करने से औसतन 5 मरीज मुंह के कैंसर से पीडि़त मिल रहे है।

मंडला में तंबाकू, सिगरेट और पान मसाला का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। जिसके कारण मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। प्रशासन, शासन के द्वारा  जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। यहां तक की सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान अधिनियम बनाकर प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह जानते हुये की तंबाकू पानमसाला जान लेवा है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी बनी हुई है। युवा वर्ग शौकिया तौर पर तंबाकू, सिगरेट और पान मसाला का उपयोग कर रहा है। इसकी लत लगने के बाद भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। गंभीर बीमारी की चपेट में आने की स्थिति में पूरा परिवार बर्बाद हो रहा है।
तंबाकू से 40 तरह के कैंसर:

                         तंबाकू से लगभग 25 तरह की बीमारियां और 40 तरह के कैंसर हो सकते हैं। उनमें मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि का कैंसर, पेट का कैंसर, ब्रेन ट्यूमर प्रमुख हैं। मैं अपने विद्यालय के शिक्षकों तथा बच्चों के साथ ही भ्रमण के दौरान अपने संकुल केंद्र के विद्यालयों के बच्चों को भी तंबाकू का सेवन न करने की सलाह देता हूं। कई बार बच्चों की तलाशी लेने पर पहली-दूसरी के बच्चे भी तंबाकू का सेवन करते पाए गए और मुझे खुशी हुई कि उनको प्यार से समझाइस देने पर अगले भ्रमण पर उनमें से बहुत सारे बच्चे तंबाकू छोड़ चुके थे, इस संबंध में मेरे द्वारा अनेक बार जिला प्रशासन को तंबाकू मुक्त विद्यालय बनाने की गाइडलाइन जारी करने के लिए पत्र लिखा गया। विश्व तंबाकू दिवस पर हमें किसी भी तरह से तंबाकू का सेवन न करने की शपथ लेनी चाहिए।
डीके सिंगौर, प्राचार्य, हायर सेकेंडरी स्कूल बबलिया

मेरा विद्यालय तंबाकू मुक्त:

                      विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरे विश्व में हर वर्ष  60 लाख लोग तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों से मर जाते हैं और इस मृत्यु दर के बढ़ते आंकड़ों को देखकर इसे एक महामारी माना गया है। एक शिक्षक होने के नाते में अपने विद्यालय के बच्चों के साथ-साथ अपने शिक्षक साथियों को भी तंबाकू का सेवन करने से रोकते रहता हूं। हमारे विद्यालय में समय-समय पर बच्चों को गांव के कैंसर पीडि़त व्यक्तियों के उदाहरण देते हुए तथा मोबाइल से फोटो, वीडियो आदि दिखाकर तंबाकू के सेवन से दूर रहने की समझाइश देते रहते हैं। बीच-बीच में बच्चों की जेबों की तलाशी लेते हुए उन्हें तंबाकू का सेवन ना करने की शपथ दिलाई जाती है। हमारे इस प्रयास से हमारा विद्यालय पिछले दो वर्षों से तंबाकू मुक्त विद्यालय बन गया है। आओ हम इस तंबाकू दिवस पर अपने परिवार और समाज को तंबाकू मुक्त कराने का जतन करने की शपथ लें।
संजीव सोनी, शिक्षक, माध्यमिक शाला सर्रा पिपरिया