तबादला आदेश पर, कर्मचारी का जुगाड़ भारी

8:33 pm or November 7, 2021
मोहम्मद सईद
शहडोल, 7 नवंबर ; अभी तक ;  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग(आर ई एस) अन्तर्गत जयसिंहनगर में पदस्थ एक उपयंत्री (प्रभारी सहायक यंत्री मनरेगा) इंद्रजीत तिवारी को स्थानांतरित हो जाने के बावजूद यहां से रिलीव ना किया जाना इन दिनों चर्चाओं में है।
मध्य प्रदेश शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद स्थानांतरित सहायक यंत्री इंद्रजीत तिवारी 2 माह से जुगाड़ के दम पर शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए जयसिंहनगर में ही जमें हुए हैं। हालांकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालन यंत्री एच आर कोष्ठी ने सहायक यंत्री इंद्रजीत तिवारी को कार्यमुक्त किए जाने के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को फाइल भेजी है। लेकिन यह फाइल जिला पंचायत कार्यालय में धूल खा रही है।
                      राज्य शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद इस प्रभारी सहायक यंत्री को कार्यमुक्त नहीं किया जाना कई तरह के सवालों को जन्म दे रहा है। ऐसी चर्चा व्याप्त है कि सहायक यंत्री इंद्रजीत तिवारी के कार्य मुक्त न होने की जुगाड़ पद्धति में जिला पंचायत कार्यालय के आय-व्यय का हिसाब सम्हालने वाले एक संविदा कर्मचारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
31 अगस्त को जारी हुआ था आदेश
                       पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भोपाल की अवर सचिव शोभा निकुंज के हस्ताक्षर से 31 अगस्त को उपयंत्रियों का तबादला आदेश जारी किया गया था। इसमें शहडोल जिले के जयसिंहनगर में पदस्थ सहायक यंत्री (मनरेगा) इंद्रजीत तिवारी का तबादला बड़वानी के लिए किया गया है। इस तबादला आदेश में साफ-साफ उल्लेख है कि स्थानांतरण नीति वर्ष 2021-2022 की कंडिका 42 के अनुसार स्थानांतरित आदेश जारी होने के 2 सप्ताह के भीतर स्थानांतरित कर्मचारी को कार्यमुक्त किया जाना अनिवार्य है। यह भी कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मचारी यदि कार्य मुक्त नहीं होता है तो उसे दो सप्ताह के अंदर एक तरफा कार्यमुक्त कर दिया जाए।
वेतन आहरण वित्तीय अनियमितता होगी
                       आदेश में यह भी साफ साफ अंकित है कि यदि कर्मचारी कार्यमुक्त नहीं हुआ और उसका वेतन आहरित किया जाता है तो वह वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आएगा। लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी सहायक यंत्री श्री तिवारी का वेतन भी शहडोल से ही आहरित किया गया। हालांकि वेतन निकाले जाने के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालन यंत्री एच आर कोष्ठी का कहना है कि मेरे पूर्व के पदस्थ कार्यपालन यंत्री आर के द्विवेदी के वक्त वेतन निकाला गया है इसलिए मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।