तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किये जाने से तालाबो पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा

3:34 pm or May 14, 2022

आनंद ताम्रकार

बालाघाट १४ मई ;अभी तक;  बालाघाट जिले में 104 नये तालाबों का निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है जिनमें से प्रत्येक तालाब निर्माण पर 5 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक लागत राशि व्यय की जानी है। नये तालाबों के निर्माण से जल संचय किया जा सकेगा, जिसका उपयोग सिंचाई सहित पेयजल,पशुओं को पीने के पानी की सुविधा सुलभ हो सकेगी। जहां नये तालाबों का निर्माण कराया जा रहा है वहीं दुसरी ओर जिले में ऐसे अनेक बडे तालाब मौजूद हैं जो वर्ष पूर्व मालगुजारों तथा सरकार द्वारा बनाये गये है। लेकिन उनकी नियमित देखरेख मरम्मत ना किये जाने के कारण उनकी दुर्दशा दिखाई देती है वहीं तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किये जाने से तालाब पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।

                   ऐसी विसंगतियों के चलते जिले के कटंगी अनुविभागीय मुख्यालय में स्थित बड़े तालाब का अस्तित्व सिमट कर समाप्त होने की कगार पर पहुंच चुका है। शासन की ओर बडे तालाब का सीमांकन कार्य कराया जा रहा है जिसमें 5 पटवारी, 1 राजस्व निरीक्षक, नगर पालिका के सीएमओ और उपयंत्री मौजूद रहे है।

सीमाकंन के प्रथम दौर में ही चौकाने वाले तथ्य प्रकाश में आये है तालाब के क्षेत्रफल से संबंधित राजस्व विभाग के दस्तावेजों तथा मछुआ सहकारी समिति के पास उपलब्ध राजस्व दस्तावेजों में भारी अंतर नजर आया। नगर पालिका परिषद कटंगी के पास तालाब से क्षेत्रफल सें संबंधित दस्तावेजों के अनुसार नजूल सीट क्रमांक 5 प्लॉट नंबर 1 में रकबा 10.55 हैक्टर लगभग 26 एकड बताई गई है। वहीं मछुआ सहकारी समिति कटंगी के पास 1914-15 की मिसल बंदोबस्त तथा नक्शा खसरा अनुसार तालाब के क्षेत्रफल 15.28 हैक्टर लगभग 37.76 एकड बताया जा रहा है। इस प्रकार शासकीय दस्तावेजों में ही लगभग 10 एकड की तालाब की भूमि में स्पष्ट अंतर नजर आ रहा है। भू बंदोबस्त कार्यालय बालाघाट के यहां उपलब्ध मूल दस्तावेजों से तालाब के मूल रकबे का पता चल सकता है।

अब तक किये ये सीमाकंन के आधार पर प्रथम दृष्टया तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर पक्के निर्माण कार्य कर लिये गये है। तालाब की भूमि पर आवासीय कालोनी का निर्माण कार्य किया जा रहा है तथा तालाब की सीमा से 100 मीटर की दूरी पर ग्रीन बेल्ट की सुरक्षित भूमि पर व्यावसायिक दुकानें आवासीय परिसर तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत भवनों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जिसके के कारण तालाब का अस्तित्व समाप्त होने जाने की कगार पर है।

उल्लेखनीय है वर्ष 2018 में इस बड़े तालाब के सुद्धडीकरण के लिये पूर्व सांसद एवं कटंगी विधायक के.डी. देशमुख ने 2 करोड़ रुपये की राशि मध्यप्रदेश शासन से स्वीकृत कराई थी जिसमें से प्रथम किस्त के रूप में 1 करोड़ रुपये की राशि नगर पालिका का प्राप्त हो चुकी है लेकिन उसका उपयोग कहां किया गया इसका पता सीएमओ को भी नही है।इस तथ्य का खुलासा स्वयं के.डी.देशमुख द्वारा एक सार्वजनिक बैठक में किये जाने के बाद नगर पालिका का अमला फाइल की तलाश में जुटा हुआ है।
इस प्रकार बडे तालाब जो सिंचाई तथा पेयजल संकट से जन सामान्य को निजात दिलाते है उनकी रखरखाव के प्रति शासन की उपेक्षा किये जाने का यह ज्वलंत साक्ष्य मामला है। तालाब के सीमाकंन पश्चात भूमि पर बने अवैध निर्माण हटाकर तालाब के रकबे की भूमि को सुरक्षित एवं संरक्षित की जाये तथा तालाब की भूमि की सीमा से ग्रीन बेल्ट एरिया की भूमि पर बने निर्माण कार्य हटाये जाना शासन एवं जनहित में न्यायोचित होगा।