तीन दिन बंद रहेगा असीरगढ़ किला, किले की दीवार गिरने से किले में जमा है मलबा

मयंक शर्मा
खंडवा २ अक्टूबर ;अभी तक;  निमाड के पूर्वी अंचल का ऐतिहासिक असीरगढ़ किला को पर्यटकों के लिए
शुक्रवार से तीन दिन के लिये बंद कर दिया गया है।1906 तक अंग्रेजों की
छावनी  रह चुका है असीरगढ़ किला के  प्रवेश द्वार के पास एक दीवार भर
भराकर गिरने से  मलबा जमा हो गया है जिसे पुरातत्व विभाग द्वारा हटया जा
रहा है।
                  प्राचीन किले के सहायक संरक्षक व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल
बुरहानपुर के विपुल मेश्राम ने बताया कि मलबा हटाने का काम जारी है।
विभाग का कहना है कि मलबा हटवाने और रास्ता व्यवस्थित करने के लिए तीन
दिन का समय लगेगा। इसलिए यहां पर्यटकों के आवागमन पर रोक है। इतिहासकार व
बुरहानपु निवासी मोहम्मद नौशाद ने बताया कि  200 साल फारूकी राजाओं के
बाद मुगल शासकों ने 1601 में किले पर  अपना अधिकार बना लिया। उसके बाद
होलकर, मराठा, सिंधिया घराना से होते हुए किला अंग्रेजों के पास चला गया।
यह किला 1906 तक अंग्रेजों की छावनी रहा।
                उन्होने बताया कि असीरगढ किले का निर्माण फारूकी राजवंश के द्वितीय शासक
आदिल शाह फारूकी ने कराया था, लेकिन इससे पहले यहां पर आशा अहीर नाम के
एक जमींदार का कब्जा था, जिसे 1385 में फारूकी राजवंश ने अपने कब्जे में
ले लिया था जिसके बाद किले का पक्का निर्माण कराया गया। यहकिला 1906 तक
अंग्रेजों की छावनी रहा। उसके बाद अंग्रेजों ने इसे खाली कर दिया। कई
वर्ष खाली पड़े रहने के बाद 1952 में पुरातत्व विभाग ने इसे अपने अधीन
किया।