तेंदुए परिवार के पुनर्वास पर जवाब पेष करने मिली मोहतल

सिद्धार्थ पाण्डेय
  जबलपुर एक सितम्बर ;अभी तक;  षहर की पाॅष काॅलोनी नयागांव में दिखने वाले तेंदुए परिवार का सुरक्षित स्थान में पुनर्वास किये जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से जवाब पेष करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ए के मित्तल तथा जस्टिस व्ही के षुक्ला की युगलपीठ याचिका पर अगली सुनवाई 15 सितम्बर को निर्धारित की है।
                  नयागांव को-आॅपरेटिव सोसायटी के अध्यक्ष रजत भाटिया की तरफ से दायर की गयी जनहित याचिका में कहा गया था कि सोसायटी में दो सौ बंगले है,जिसमें एक हजार से अधिक लोग रहते है। सोसायटी में अधिकांष रिटायर्ट लोग रहते है,जो जज,डाॅक्टर सहित अन्य सम्मानजनक पदों पर कार्यरत थे। याचिका में कहा गया था कि नयागांव क्षेत्र में नबम्वर 2019 में पहली बार तेदुआ देखा गया था। नयागांव-बरगी हिल्स रोड पर पिछले महिने 19 व 20 तारीख को दो तेंदुए को क्रास करते हुए लोगों ने देखा था। क्षेत्र में दो बच्चों सहित चार सदस्यों का तेंदुआ परिवार है। उक्त मार्ग सोसायटी की लाइफ लाईन है और हाईवे से जुडती है।
                  याचिका में मांग की गयी थी कि सोसायटी के लोगों की सुरक्षा के मददेनजर पेषेवर वन्यजीव संरक्षणवादी की सलाह अनुसार तेंदुए परिवार का सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की जाये। क्षेत्र और आसपास के इलाकों के वन्यजीवों पर निरंतर निगरानी रखी जाये। क्षेत्र में फैसिंग व सर्च लाइट लगाई जाये। तेंदुए को दूसरे वन्य जीवन क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाये और चिड़ियाघर में रखने नहीं भेजा जाये। याचिका में वन विभाग के प्रमुख सचिव,सीसीएफ तथा जिला कलेक्टर को अनावेदक बनाया गया था। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
                      याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया किया की लोगों ने घर के बाहर तेंदुए को देखा है। क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियां लगातार बढती जा रही है। इसके बावजूद भी अभी तक क्षेत्र में फेंसिंग व सर्च लाईट नहीं लगाई गयी है। नोटिस जारी होने के बावजूद भी अनावेदकों की तरफ से जवाब पेष नहीं किया गया है। जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की। सरकार की तरफ से जवाब पेष करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने उक्त4 आदेष जारी किये। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।

 

 

 

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