तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र में मुठभेड़, छह माओवादी ढेर

तेलंगाना/रायपुर, 27 दिसंबर ; तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र में सोमवार सुबह सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में छह माओवादी मारे गए।

बस्तर क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके में सुबह करीब छह बजे पड़ोसी राज्य तेलंगाना पुलिस की नक्सल रोधी ग्रेहाउंड ने मुठभेड़ में छह माओवादियों को मार गिराया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुकमा जिले से जिला रिजर्व गार्ड और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के संयुक्त दल को नक्सल रोधी अभियान के लिए रवाना किया गया था। वहीं, ग्रेहाउंड के दल को भी तेलंगाना की ओर से सहायता के लिए रवाना किया गया था।

उन्होंने बताया कि जब ग्रेहाउंड का दल किस्टाराम थाना क्षेत्र पहुंचा, तभी नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से कुछ देर तक गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से भाग गए। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से चार महिला नक्सली समेत छह नक्सलियों के शव बरामद किए हैं। मारे गए नक्सली ‘किस्टाराम एरिया कमेटी’ से जुड़े थे।

सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने मुठभेड़ को एक बड़ी सफलता बताया और दावा किया कि इससे नक्सलियों की ‘किस्टाराम ​एरिया कमेटी’ को बड़ा झटका लगा है, जिसने इस क्षेत्र में कई नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया है।

शर्मा ने ‘बताया कि सुकमा जिले में नक्सलियों की पांच ‘एरिया कमेटी’ सक्रिय हैं। पिछले छह महीनों के दौरान सुरक्षा बलों ने केरलापाल और कोंटा एरिया कमेटी पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान ‘केरलापाल एरिया कमेटी’ के कई नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। इस वर्ष अगस्त माह में सुरक्षाबलों ने ‘केरलापाल एरिया कमेटी’ के ‘लोकल ऑर्गनाइजेशन स्क्वाड’ के कमांडर और ‘कोंटा एरिया कमेटी’ के उप कमांडर को मुठभेड़ में मार गिराया था।

शर्मा ने बताया कि जिले में सक्रिय ‘किस्टाराम एरिया कमेटी’ काफी हद तक समाप्त हो गई है। अब अगला लक्ष्य दो अन्य कटेकल्याण और जगरगुंडा कमेटी को बेअसर करना होगा।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है।

इससे पहले, भद्राद्री कोठागुडेम थाने के पुलिस अधीक्षक सुनील दत्त के अनुसार तेलंगाना, छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक संयुक्त अभियान में माओवादी मारे गए।

उन्होंने बताया कि उन्हें माओवादियों के बल पर हमला करने की कोशिश करने की खुफिया जानकारी मिली थी।