त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गतिविधियां तेज, चुनाव में नागरिक बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे

8:54 pm or June 7, 2022

आनंद ताम्रकार

बालाघाट ७ जून ;अभी तक;  जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गतिविधियां तेज हो रही है गांव गांव में चुनावी लहर चल रही है।
कल सोमवार को नामांकन प्रस्तुत करने अंतिम दिन तक नामांकन पत्रों की संख्या इस बात का प्रमाण है की इस बार के चुनाव में नागरिक बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे है।

इसके विपरीत जिले की लांजी और किरनापुर क्षेत्र में चुनाव बहिष्कार करने के फैसले के संबंध में लोग अपने कयास लगा रहे है। लांजी क्षेत्र में 77 पंचायतें हैं जहां पंच सरपंच और जिला पंचायत सदस्य के लिये आगामी 1 जुलाई को मतदान संपन्न होना है।

इसी क्षेत्र से ग्राम बोलेगांव और सिरेगांव में किसी भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन प्रस्तुत नहीं किया और चुनाव के बहिष्कार करने का निर्णय लिया।

यह उल्लेखनीय है की चुनाव बहिष्कार का निर्णय क्षेत्र की किसी विशेष समस्या को लेकर नहीं किया गया अपितु पुलिस और प्रशासन द्वारा रकम दुगनी करने के मामले में की गई कार्यवाही को गलत बताते हुए आरोपियों को निर्दोष साबित करने तथा आरोपियों को जननेता बताते हुए बहिष्कार किया गया।

यह उल्लेखनीय है की रकम दुगनी के मामले के मुख्य आरोपी बोलेगांव निवासी सोमेन्द्र कन्करायने के ग्राम सिरेगांव में पंचायत चुनाव का बहिष्कार किया जाना से जोड़ा जा रहे है।

यह भी उल्लेखनीय है भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष श्री रमेश भटेरे का गृह ग्राम बोलेगांव है। जहां एक ओर प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव करवाकर ग्राम राज की स्थापना करना चाहती है वहीं जिला अध्यक्ष के गांव में चुनाव का बहिष्कार किया जाना राजनैतिक प्रेक्षकों के गले के नीचे नहीं उतर रहा है।
यह देखा जा रहा है की अपराध करना, जेल जाना और जेल में रहते हुए चुनाव लड़ना अब स्टेटस सिम्बॉल बनता जा रहा है। हमारे जिले की राजनीति भी बिहार पैटर्न पर बदलती देखी जा रही है ।
रकम दुगनी करने के मामले में पुलिस कार्यवाही किये जाने के दिनांक से आज तक किसी भी राजनेता का ब्यान इन मामले को लेकर आज तक नही आया।इसे पीछे क्या कारण है यह हर कोई जानता है लेकिन कहना कोई नही चाहता। जो जानकारी इस मामले को  लेकर मिल रही है उसके अनुसार अब ये मामला लांजी किरनापुर तक ही सीमित ना रहकर जिले के ओर छोर तक फैला हुआ है तथा इस खेल में राजनेताओं के रिश्ते नातेदार शामिल है। इस लिये नेताओं ने चुप्पी साध ली है।
चुनाव का बहिष्कार तथा जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने का फैसला और आपराधिक तत्वों को राजनैतिक संरक्षण देने की गतिविधियां इस जिले के आगामी भविष्य के लिये अच्छा संकेत नहीं है।