थाना प्रभारी की पुनः विभागीय जांच की जाये, दण्ड भी दिया जाये, आयोग ने की अनुशंसा

6:53 pm or November 17, 2022
महावीर अग्रवाल
मंदसौर भोपाल १७ नवंबर ;अभी तक;  मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने एक मामले में पुलिस थाना प्रभारी/उपनिरीक्षक के विरूद्ध विभागीय जांच की कार्यवाही पुनः करने और उसे विभागीय प्रक्रिया के पालन में की गई उपेक्षा की तुलना में युक्तियुक्त दण्ड देने की अनुशंसा की है।
*मामला गुना जिले का है।*
                             आयोग को 23 सितम्बर 2020 को एक शिकायती आवेदन मिला। आयोग ने *प्रकरण क्रमांक 5691/गुना/पुलिस/2020* दर्ज कर लिया। आवेदन में हनुमान चैराहा, थाना मृगवास, निवासी आवेदिका श्रीमती जाईदा बानो ने लिखा कि उसके पति खुशी खां को मृगवास थाना पुलिस द्वारा जबरन उठाकर ले जाने और थाने में बैठाकर रखने की शिकायत की। मामले में पुलिस अधीक्षक, गुना का कहना है कि थाना प्रभारी मृगवास श्री दीपक चैरसिया को पास्को एक्ट के आरोपी सादिक खां के खुशी खां के घर पर रूके होने की सूचना मिलने पर खुशी खां को पूछताछ के लिये 16 सितम्बर 2020 को थाने पर बुलाया गया था एवं पूछताछ के बाद मेडिकल कराने के उपरांत उसे रवाना किया गया। इसकी रोजनामचा में तो रिपोर्ट दर्ज है, परन्तु केस डायरी में पर्चा दर्ज नहीं किया जाना पाया गया। आयोग द्वारा मामले की निरंतर सुनवाई की गई। अन्ततः आयोग ने पाया कि थाना मृगवास, जिला गुना में सीसीटीवी कैमरे स्थापित नहीं है। पुलिस मुख्यालय, भोपाल से सीसीटीव्ही लगाये जाने की जानकारी लेने पर यह बताया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में मध्यप्रदेश के थानों/चौकियों में सीसीटीवी आधारित निगरानी व्यवस्था करने हेतु आदेश फार्म टेलीकम्युनिकेशन कंसलटेंट इंडिया लिमिटेड को जारी किया गया है।
                            मानव अधिकार आयोग, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18 के अंतर्गत जहां जांच में किसी लोक सेवक द्वारा मानव अधिकारों का अतिक्रमण या मानव अधिकारों के संरक्षण में उपेक्षा पाई जाती है तो ऐसे प्रकरणों में पीड़ित व्यक्ति या उसके कुटुंब के सदस्य को क्षतिपूति देने की तथा अन्य अनुशंसा राज्य शासन या संबंधित पदाधिकारियों को कर सकता है। चूंकि 16 सितम्बर 2020 को बिना धारा 160 सीआरपीसी का नोटिस दिये खुशी खां को थाने पर बुलाया जाना पाया गया और इस प्रकरण में विवेचना अधिकारी के न होने के बावजूद भी बुलाना पाया गया। पुलिस अधीक्षक, गुना द्वारा इस कृत्य के लिये उप निरीक्षक श्री दीपक भदौरिया को सेवा पुस्तिका में निंदा की सजा से दंडित किया गया है, जो कि उसके द्वारा किये गये कृत्य की तुलना में काफी कम है। अतः मप्र मानव अधिकार आयोग ने अनुशंसा की है कि उप निरीक्षक श्री दीपक भदौरिया के विरूद्ध विभागीय जांच की कार्यवाही पुनः स्थापित की जाये और उसके द्वारा विभागीय प्रक्रिया के पालन नहीं करने/उपेक्षा करने की तुलना में युक्तियुक्त दण्ड शास्ति लगाई जाये।