दस साल बाद मृतिका को मिला न्याय

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर / सतना २२ ०क्टोबेर ;अभी तक;  श्री प्रशांत शुक्ला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मैहर के न्यायालय ने* आरोपी बबलू उर्फ मान सिंह को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास से ,आर्म्स एक्ट के अपराध में कुल 6 वर्ष के अन्य कठोर कारावास तथा 30 हजार रुपये के कुल अर्थ दण्ड से भी दण्डित किया। *मध्यप्रदेश राज्य की ओर से अभियोजन अधिकारी गणेश पांडेय ने अभियोजन का संचालन किया।
मीडिया प्रभारी हरि कृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि घटना दिनांक 16/1/12 को आरोपी बबलू उर्फ मान सिंह उम्र 33 वर्ष पुत्र बद्री उर्फ ददन सिंह पटेल निवासी पोड़ी गरादा थाना उचेहरा जिला सतना ने शाम 5:30 बजे के लगभग विवेक नगर मैहर निवासी आर बी सिंह के घर में मृतिका भारती उर्फ मीनू उम्र 20 वर्ष को उसके घर से बुलवाकर 315 बोर के देशी कट्टे से गोली चलाकर हत्या कर दी।
आरोपी मृतिका से विवाह करना चाहता था लेकिन मृतिका ने आरोपी से विवाह करने से इनकार कर दिया जिसके कारण आरोपी ने भारती उर्फ मीनू की हत्या कर दी।
हत्या करके जैसे ही आरोपी भागने लगा मृतिका के चाचा गोली चलने की आवाज सुनकर वहाँ पहुचे तो आरोपी  उन्हें कट्टा दिखा कर डरा कर मौके से भाग गया।
 तब मृतिका के पिता  हरिचरण सिंह पटेल जो कि स्टेट बैंक शाखा मैहर में कर्मचारी हैं  की सूचना पर मैहर थाना में अपराध क्रमांक 55/12 की प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखी गयी और तत्कालीन निरीक्षक श्री बी एस धुर्वे के द्वारा अनुसन्धान किया जाकर अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
आरोपी घटना के बाद लगातार 6 वर्ष तक फरार रहा,हत्या के प्रयास के अन्य मामले में आरोपी की गिरफ्तारी कोतवाली कटनी में निरीक्षक शैलेश मिश्रा के द्वारा की गई,तब आरोपी इस मामलें में मैहर न्यायालय में प्रोडक्शन वारंट पर उपस्थित हुआ।
जहाँ आरोपी पर आरोप विरचित किया गया।आरोपी ने आरोप से इनकार किया और विचारण चाहा।आरोपी का बचाव यह था कि भारती ने आत्म हत्या किया है किंतु विचारण न्यायालय ने आरोपी के इस बचाव को प्रमाणित नहीं माना।आरोपी ने दो बचाव साक्षी भी पेश किया था जिनके द्वारा वह यह प्रमाणित करना चाहता था कि घटना वाले दिन घटना के समय उसकी उपस्थिति घटना स्थल पर न होकर अन्यत्र पोड़ी गरादा के मेले में थी किंतु विचारण न्यायालय द्वारा आरोपी के इस बचाव को भी साक्ष्य पर से प्रमाणित नहीं माना गया। अभियोजन की ओर से अभियोजन अधिकारी गणेश पाण्डेय ने 13 अभियोजन साक्षी पेश किये।विचारण न्यायालय  द्वारा अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य को घटना/आरोप को युक्ति युक्त रूप से प्रमाणित पाते हुए आरोपी को दोषसिद्धि किया गया एवम धारा 302 भादवि के अपराध में आजीवन कारावास के दण्ड से,25(1 बी )(ए)आर्म्स एक्ट में 01 वर्ष के तथा 27 आर्म्स एक्ट में 5 वर्ष के कठोर कारावास के दण्ड से दण्डित किया।