दीक्षा लेने के भाव पूर्व जन्मों के अनंत पुण्योदय एवं बीजारोपित संस्कारों का परिणाम होता हैं ;प्रकाशचंद्र नांदेचा

4:31 pm or October 26, 2020
प्रकाशचंद्र नांदेचा
अरुण त्रिपाठी
रतलाम २६ अक्टूबर ;अभी तक; आधुनिकता की चकाचौन्ध एवं कंप्यूटरी – मोबाईल युग में सांसारिक जीवन का त्याग करने का मन बनाकर विरली आत्मा ही होती हैं जो संयम मार्ग पर जाने के लिए आतुर एवं लालायित रहती हैं। इसमें यह भी कहा जा सकता हैं कि दीक्षा लेने के भाव भी पूर्व जन्मों के अनंत पुण्योदय, परिवार के द्वारा बीजारोपित संस्कारों का परिणाम व संयमी आत्माओं की मुख्य प्रेरणा भी होता हैं। जिसका जीवन वास्तव में बचपन से संस्कारित हो, यतना रखने वाला, धर्म एवं चारित्र आत्माओं की सेवा करने के प्रति नि:स्वार्थ भाव से सदैव समर्पित हो। उस व्यक्ति का जीवन संयम पथ की ओर सहज रूप से बढ़ जाता हैं। रतलाम नगर की गौरव मुमुक्षु सलोनी बहन कटारिया भी एक ऐसी ही आत्मा हैं जो इस मनुष्य भव को सार्थक करने के लिए संयमी जीवन अंगीकार करेगी। दीक्षित होना मुमुक्षु के परिवार, संप्रदाय या रतलाम नगर के लिए ही नहीं अपितु समूचे जैन समाज के लिए अविस्मरणीय गौरव की बात होगी।
                ये विचार पारणा समिति (2018) के संयोजक प्रकाशचंद्र नांदेचा ने मुमुक्षु के बहुमान के दौरान कहे। गौरतलब हैं कि अखिल भारतीय श्रीसाधुमार्गीय जैन श्रीसंघ संप्रदाय के वर्तमान झरोखे पर नजर डाले तो 435 साधु साध्वीजी जिनशासन को दीपायमान करते हुए धर्म प्रभावना कर रहे हैं। वहीं रतलाम नगर के इतिहास के झरोखे में एक नजर डाले तो उक्त संप्रदाय में अब तक यहीं की अनेक आत्माएं दीक्षा अंगीकार कर संयम पथ पर आरूढ़ हुई हैं। इसमें एक नाम मुमुक्षु सलोनी के रूप में और जुड़ जाएगा। राजस्थान के जोधपुर शहर में वर्षावास हेतु विराजित व्यसन मुक्ति प्रणेता आचार्यश्री रामलालजी ‘रामेश’ के मुखारविंद से यहां के धर्मनिष्ठ श्रावक सुनील कटारिया की पुत्री “मुमुक्षु सलोनीजी” की दीक्षा आगामी 19 नवंबर को होने की संभावना हैं। इतिहास के पन्नों में ज्ञानपंचमी के मंगल दिवस से मुमुक्षु सलोनी का नाम भी दीक्षित रूप में जुड़ जाएगा। मुमुक्षु के अति व्यस्ततम समय होने के बावजूद पारणा समिति को बहुमान करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। इसके लिए समिति के सदस्यगण अपना अमूल्य समय निकालकर आयंबिल खाता धनजी भाई के नोहरे में एकत्रित होकर वहां से सभी सदस्य मुमुक्षु के निवास पहुंचे। अनेक श्रीसंघों में हुए बहुमान की श्रृंखला में यहां की पारणा समिति को भी यह लाभ सहज रूप में मिल गया। जिसके लिए समिति ने मुमुक्षु एवं उनके परिवारजन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
                 इस प्रसंग पर समिति के सभी सदस्यों ने मुमुक्षु के उपस्थित परिवारजन दादी सुशीलादेवी, माता पिता अनिता सुनील कटारिया, अहमदाबाद निवासी बहन – जीजा सुनीता ललित मेहता, भांजा हर्ष मेहता एवं छोटी बहन साक्षी व भाई यश कटारिया आदि को साधुवाद देकर मुमुक्षु के संयम पथ पर जाने के संकल्प की खूब अनुमोदना की। नवकार महामंत्र की सामूहिक स्तुति के साथ मुमुक्षु बहुमान समारोह प्रारंभ हुआ। समिति के संयोजक प्रकाशचंद्र नांदेचा, कनकमल बोथरा, शांतिलाल मूणत, निर्मल गोखरू, बाबूलाल धम्माणी, प्रकाशचंद्र सिंघवी, अभयकुमार बोथरा आदि ने सर्वप्रथम मुमुक्षु को कुमकुम तिलक लगाया। पश्चात माला, शाल, गुड़ मोदक व चांदी का सिक्का भेंटकर मुमुक्षु सलोनी का बहुमान किया। बहुमान के ऐसे विरले क्षण के दौरान पारणा समिति के सदस्य अभिभूत हो गए एवं संघ के गौरव को और उत्तरोत्तर बढ़ाने की मंगल कामना की। वहीं मुमुक्षु के परिवारजन का भी बहुमान किया गया।

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