दूधि लकड़ी की यह सामग्री मेले में आकर्षण का केंद्र बनी

7:11 pm or November 12, 2021
महावीर अग्रवाल
मंदसौर 12 नवंबर ;अभी तक;  मेला प्रभारी श्री दिलीप सोनी ने बताया सुख, शांति और समृद्धि की चाह में कई जतन करने वाले लोगों के लिए मप्र हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा कम्बल केंद्र में लगाई गई प्रदर्शनी में रखे कई उत्पाद उनके लिए लाभ के हैं। इन्हीं में से एक उत्पाद हाथ से बनाए गए दूधि लकड़ी के खिलोने हैं। बहुत कम कीमत के यह खिलोने केवल घर में रखने से सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। खिलोने बनाने वाले शिल्पकार  और चित्रकूट की दूधि लकड़ी को समृद्धि फैलाने का वरदान मिला है।
                          जानकारी के अनुसार प्रदेश के हस्तशिल्पियों एवं बुनकरों द्वारा उत्पादित सामग्री के विपणन व्यवस्था हेतु कम्बल केंद्र में 10 दिवसीय हस्तशिल्प मेला प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। मेला प्रभारी श्री दिलीप सोनी ने बताया कि दूधि लकड़ी की यह सामग्री मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लकड़ी की महिमा का गुणगान करते हुए इसके पीछे चली आ रही किवदंती के बारे में बताया कि दूधि लकड़ी के खिलोने बेचने के लिए लोधी समाज के लोग ज्यादा विख्यात है। माना जाता है कि भगवान श्री राम वनवास के दौरान चित्रकूट में पहॅुचे तो वहां के निवासी लोधी समाज के लोगों ने श्री राम की बहुत सेवा की। चित्रकूट में दूधि के वृक्ष अधिक है और लोधी समाज के लोग दूधि वृक्ष की लकड़ी से सुंदर खिलोने बनाकर अपनी आजीविका चलाते हैं। यह बात श्री राम को अच्छी लगी और लोधी समाज के लोगों की सेवा से प्रसन्न होकर उन्होंने समाज के लोगों को खिलोने बनाकर बेचने और उससे अजीवन आजीविका मिलने का वरदान दिया, लेकिन साथ ही यह भी आशीर्वाद प्रदान किया कि दूधि लकड़ी के बने खिलोने घर में रखने पर घर में हमेशा समृद्धि बनी रहेगी। बस इसी आशीर्वाद का प्रताप है कि आज तक लोधी समाज के लोग इस शिल्प को लगातार बढ़ा रहे हैं और दूधि लकड़ी से बने यह खिलोने लोगों को समृद्धशाली बना रहे हैं।
                     कम्बल केंद्र में चित्रकूट से विभिन्न प्रकार के खिलोने लेकर आए शिल्पी मुकेश लोधी ने बनाया कि यह खिलोने दिखने में आकर्षक, सुंदर तो ही साथ ही बच्चों के लिए किसी भी दशा में नुकसानदायक नहीं है। वर्तमान समय में यह समाज बच्चों के लिए ट्रेन, पंखे, फिरकी, लटटू, बेलन, विंडचेम व कई उपयोगी सामग्री का विक्रय किया जा रहा है। श्री सोनी ने बताया कि मेले में मध्यप्रदेश के लगभग 50 शिल्पी अपनी हस्तकला का प्रदर्शन कर रहे हैं। मंदसौर नगर की सबसे अच्छी बात यह है कि शिल्प को अच्छा प्रतिसाद मिलता है। कद्रदान न केवल उनकी सामग्री पसंद करते हैं वरन उन्हें वर्तमान परिवेश में वस्तु की मांग अनुसार सुझाव भी देते हैं। सभी कलाप्रेमी कम्बल केंद्र में चल रहे मेले में सुबह 11 से रात 9 बजे तक सादर आमंत्रित है।