दूध में मिलावट करने वाले आरोपी को 6 माह का सश्रम कारावास  वह 1000/-  के अर्थदंड से दंडित किया गया

विधिक संवाददाता
इंदौर २३ अक्टूबर ;अभी तक; न्यायालय श्री अरविंद सिंह गुर्जर विशेष मजिस्ट्रेट नगर निगम -2 ने दूध में मिलावट करने वाले आरोपी को 6 माह का सश्रम कारावास  वह 1000/-  के अर्थदंड से दंडित किया ।
आज  जिला लोक अभियोजन श्री संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि दिनांक 22 /10/2021 को न्यायालय श्री अरविंद सिंह गुर्जर विशेष मजिस्ट्रेट नगर निगम -2  इंदौर के न्यायालय में खाद्य एवं औषधि प्रशासन इंदौर आपका प्रकरण क्रमांक 16455 /2011 में निर्णय पारित करते हुए आरोपी केदार पिता जैथराम गूंजीवाल उम्र 40 साल निवासी ग्राम दतोदा खंडवा रोड तहसील मऊ थाना सिमरोल जिला इंदौर मध्य प्रदेश को दोषी पाते हुए धारा 7(i)(v) सहपाठी धारा 16 (1)(ए) (i) खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम के अंतर्गत अपनी  खाद्य विक्रय हेतु 06 माह के सश्रम कारावास एवं ₹1000/- के अर्थदंड से दंडित किया है प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी श्री  रामबीर सिंह जाटव सहायक जिला अभियोजन द्वारा की गई !
अभियोजन कहानी संक्षिप्त में इस प्रकार है कि दिनांक 8.06. 2011 को प्रातः 7:30 मिनट पर खाद्य निरीक्षक वैशाली सिंह  इंदौर भ्रमण के दौरान भंवरकुआं चौराहा खंडवा रोड इंदौर पहुंची मौके पर दूध विक्रय हेतु जा रहे व्यक्ति को रोका व अपने पद का परिचय, परिचय पत्र दिखाकर उक्त दूध विक्रेता से नाम पूछने पर उसने स्वयं का नाम केदार कुंजीवाल तथा उक्त दूध गाय का दूध होना बताया उक्त दूध विक्रेता की मोटरसाइकिल पर मानव उपयोग हेतु विक्रय विक्रय अर्थ 40- 40 लीटर की एलुमिनियम की टंकियां लड़की थी तथा दूध नापने के लिए 1 लीटर 500ml के केन भी उसके थे, विक्रेता से पूछे जाने पर खाद्य अनुज्ञप्ति वर्ष 2011-12 कि नहीं पाई गई ! खाद्य निरीक्षक ने अभियुक्त से विक्रेयारथ  ले जा रहे दूध का नमूना मानक स्तरो पर जांच वास्ते लेने का आशय फार्म VI में भरकर प्रदान किया वह एक प्रति  पर पावती के हस्ताक्षर प्राप्त कर लिए तत्पश्चात मोटरसाइकिल पर लटकी 40 लीटर की टंकी जिसमें लगभग 30 लीटर गाय का दूध था को विक्रेता से समरस कराकर एवं स्वयं भी समरस करके एक साथ स्वच्छ रंगहीन, गंधहीन ,फूड ग्रेड पॉलिथीन में 1500 एम एल गाय का दूध रहकर विक्रेता को रसीदा अनुसार ₹43 प्रदान कर रसीद प्राप्त की तत्पश्चात नमूने के एक भाग को लोक विशेषज्ञ राज्य खाद्य पर परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल भेजा गया जहां उपरांत नमुने को मिश्रित घोषित होने से जब रिपोर्ट प्राप्त के पश्चात नियमानुसार अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर अभियुक्त के विरुद्ध न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया !