देश के घुमक्कड़ तीन दिनों तक बुंदेली संस्कृति से हुए रूबरू, बुंदेली नृत्य दिवारी और बुंदेली व्यंजनों का उठाया लुफ्त

6:41 pm or November 12, 2022
।।दीपक शर्मा।।
पन्ना १२ नवंबर ;अभी तक; देश के बिभिन्न कोनों से पन्ना पहुँचर घुमक्कडों ने तीन दिनों तक बुंदेली संस्कृति से रूबरू हुए और बुंदेली संस्कृति एवं बुंदेली नृत्य दिवारी और व्यंजनों का उठाया लुफ्त उठाया।घुमक्कड़ी दिल से नामक संस्था के बैनर तले आबकारी उपनिरीक्षक पन्ना मुकेश पाण्डेय के संयोजन में बुंदेली संस्कृति और पर्यटन से रूबरू होने देश के 15 राज्यों से 130 घुमक्कड़ विशेषज्ञ एक साथ इकट्ठे हुए।
                            मुकेश पाण्डेय ने बताया कि देश के 15 राज्यों के घुमक्कड़ बुंदेलखंड की संस्कृति, खान-पान और पर्यटन को जानने-समझने के लिए एकत्र हुए थे । इन घुमक्कड़ों में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ सम्मिलित रहे । पहले दिन यूनेस्को विश्व विरासत स्थल खजुराहो में चंदेल कालीन विश्व प्रसिद्ध मंदिरों के समूह का भ्रमण किया।इसके बाद प्रसिद्ध बद्री सेठ मारवाड़ी भोजनालय के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ लिया।शाम को साउंड एंड लाइट शो के माध्यम से खजुराहो के अद्वितीय मंदिरों की कहानी ध्वनि और प्रकाश द्वारा सुनी।
                             दूसरे दिन की बुंदेलखंड के पन्ना पहुचे जहां बृहस्पतिकुण्ड जलप्रपात के सौंदर्य की छटा को निहारा।इसके बाद दोपहर में सारंग के सुतीक्ष्ण मुनि आश्रम के दर्शन पश्चात उसी परिसर में स्थानीय बुंदेलखंडी व्यंजनों के साथ पंगत में भोजन किया । महुआ और तिल से बने व्यंजन ‘मुरका’ घुमक्कड़ों का दिल जीता, तो आंवला जिला पन्ना के आंवले से बनी चटनी और आचार ने स्वाद बढ़ा दिया । इसके पश्चात  ग्राम तरौनी में आयोजित दिवारी सम्मेलन में परंपरागत लोकनृत्य दिवारी को न केवल देखा बल्कि फ़ोटो और वीडियो के माध्यम से अपनी यादों में सहेजा । यहाँ अतिथि देवो भवः की परंपरा को निभाते हुए आयोजको ने सभी घुमक्कड़ों का फूल-माला से स्वागत किया।
                                   कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उअस्थित प्रदेश के खनिज साधन एवं श्रम मंत्री सह स्थानीय विधायक बृजेन्द्र सिंह ने मंच से सभी का स्वागत किया, और इस लोकनृत्य दिवारी को विभिन्न माध्यमों से प्रचारित करने का अनुरोध किया । इसके बाद संध्याकाल में पन्ना के स्थानीय मंदिरों के दर्शन के बाद धरम सागर स्थित यादवेंद्र क्लब के खुले परिसर में रात्रि भोज में बुंदेलखंडी व्यंजनों भटा-गकड़िया, डुबरी आदि का स्वाद लिया।दोनो समय के बुंदेली व्यंजनों का संयोजन इंद्रभान सिंह बुन्देला ने स्थानीय महिलाओं के सहयोग से किया।
                            तीसरे दिन पर्यटकों को रनेह फॉल और पन्ना टाइगर रिजर्व की सफारी का भ्रमण करने के पश्चात मड़ला स्थित डायमंड ढाबे पर भोजन करने के बाद विदाई हुई।कार्यक्रम में गोंदिया (महाराष्ट्र) से आये प्रकाश यादव ने बताया कि पन्ना जिले में पर्यटन की असीम संभावनाएं है, यहाँ का आथित्य भाव पर्यटकों को विशेष अनुभव प्रदान करता है।पानीपत महाविद्यालय में वनस्पति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ बलकार सिंह ने बताया कि पन्ना के जंगल खूबसूरत होने के साथ ही विविधता लिए है । यहाँ हिमालय में पाई जानी वाली वनस्पतियों से लेकर मैदानी और मरुस्थल की वनस्पतियों की उपस्थिति है।औषधीय पौधों की बहुतायत है, यदि व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए तो स्थानीय लोगों को रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। भिलाई से आये वन्य जीव विशेषज्ञ अनूप नाइक, गिरिवर सिंह ने पन्ना में जैव विविधता और वन्य जीवन की बहुलता को बहुत ही सुखद बताया।
                             भारत राष्ट्रीय पक्षी उद्यान के पक्षी विशेषज्ञ दाऊदयाल शर्मा ने पन्ना के जंगलों में देशी और प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति को स्वच्छ पर्यावरण का द्योतक बताया। वहीं आगरा के बाइक राइडर मुकेश चौहान ने बताया कि अपनी इस यात्रा से आगे पूरे बुंदेलखंड के भ्रमण की इच्छा बलवती है वहीं झुमरीतिलैया झारखंड से आये अनूप सरौगी ने इस यात्रा को यादगार बताया ओर भीलवाड़ा से आये यात्रा लेखक ऋषभ भरवा ने इस पूरे क्षेत्र को पर्यटन का भविष्य कहा। बाकी सभी पर्यटकों ने इस आयोजन को बेहतरीन और सुखद बताया ।