धनतेरस पर त्रिपुष्कर के साथ बन रहा धन योग का अद्भुत संयोग – आचार्य पुष्कर परसाई

8:11 pm or November 1, 2021

सौरभ तिवारी

  होशंगाबाद, १ नवंबर , अभीतक । आचार्य पुष्कर परसाई ने बताया कि धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को  से ही पांच दिवसीय दिवाली के त्योहार की शुरुआत होती है।  धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वतंरि का जन्म हुआ था, इसलिए इसे धनतेरस कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे, तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था, इसलिए इस दिन बर्तन क्रय करने की परंपरा है। इस बार धनतेरस पर धन योग बनने से इसका महत्व बढ़ रहा है।
धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग-
धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है।
आचार्य पुष्कर परसाई ने बताया कि  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस योग में किए गए कार्य का फल तिगुना मिलता है।  इस दिन शुभ कार्य करने पर उसका तीन गुना फल प्राप्त होता  है। इसलिए इस दिन निवेश करना शुभ माना जाता है। सोने और चांदी की चीजें खरीदना भी उत्तम होता है।
धनतेरस पर ग्रहों की युति-
धनतेरस पर तीन ग्रह मिलकर शुभ संयोग बना रहे हैं। सूर्य, मंगल और बुध धनतेरस के दिन तुला राशि में विराजमान रहेंगे। बुध और मंगल मिलकर धन योग का निर्माण करते हैं। जबकि बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य योग का निर्माण होगा। इस योग को राजयोग की श्रेणी में रखा जाता है। इसके अलावा मंगल और बुध की युति को व्यापार के लिए अति लाभकारी माना जाता है। इसलिए व्यपारियों को लाभ होगा ।।
धनतेरस पर बुध का राशि परिवर्तन-
धनतेरस के दिन बुध संक्रांति का शुभ योग बन रहा है। इस दिन बुध ग्रह तुला राशि में गोचर करेंगे। बुध
2 नवंबर से 22 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे। बुध को व्यापार और वाणी का कारक माना जाता है। इसलिए धनतेरस के दिन व्यापारियों को लाभ होगा ।
धनतेरस पूजा का मुहूर्त-  07:00 बजे  से 08:26 बजे
यम दीप पूजन :-
आचार्य पुष्कर परसाई ने बताया कि धनतेरस पर शाम को यम पूजन का भी बहुत महत्व है
लोककथा के अनुसार एक राजपुत्र की शादी के चार दिन बाद ही मौत हो गई। उसकी नवविवाहिता पत्नी का करुण विलाप सुनकर यमदूत भी द्रवित हो उठे। उन्होंने यमराज से पूछा कि जीवों को मौत देते समय उनमें दयाभाव क्यों नहीं आते! यमराज ने बताया कि उनका कर्तव्य ही यही है। इसपर दूतों ने उनसे अकाल मृत्यु से बचने का उपाय बताने की प्रार्थना की।
यमराज ने कहा कि धनतेरस की शाम दक्षिण दिशा में दीप जलाकर रखने से अकाल मृत्यु नहीं होगी। यही कारण है कि धनतेरस को आंगन में दक्षिण दिशा में यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं। इस दिन लोग व्रत भी रखते हैं और यमदेव की पूजा करते हैं। यमराज की पूजा धनतेरस पर  की जाती है। इससे अकाल मौत के भय से मुक्ति मिलती है।
यम दीप महुर्त –
प्रदोष काल – 06:00 बजे से 08:26 तक