धर्म और संस्कृति में आई विकृतियों के खिलाफ वैचारिक क्रांति का शंखनाद करना प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति का दायित्व- राष्ट्रसंत श्री कमलमुनि

9:41 pm or September 19, 2022

महावीर अग्रवाल

मंदसौर १९ सितम्बर ;अभी तक;  महापुरुषों के नाम पर एवं धार्मिकता की ओट में हिंसा, नशा आदि बुराइयों को महामंडित करना महापुरुषों के साथ कुठाराघात है। आज धर्म और संस्कृति में आई विकृतियों के खिलाफ वैचारिक क्रांति का शंखनाद करना प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति का दायित्व है। उक्त विचार राष्ट्रीय संत कमलमुनि कमलेश ने जैन दिवाकर प्रवचन हाल में व्यक्त किए। संतश्री ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में फिल्मी गाने बजाना और शराब आदि का सेवन करके धार्मिक यात्रा में भाग लेना महापुरुषों का अपमान करने के समान है।

मुनि श्री कमलेश ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्ष, जल, पहाड़ और धरती में देवता की धारणा बताई गई है, पूजनीय माना गया है। इसलिए सभी धर्म आचार्यों को मिलकर उपासना पद्धति में पर्यावरण की रक्षा को ध्यान में रखते हुए धार्मिक आचार संहिता को निर्माण करना होगा।

संतश्री ने कहा कि दीपावली पर होने वाला प्रदुषण, डीजे से ध्वनि प्रदूषण रोकने की जरूरत है। पाश्चात्य संस्कृति के अनुरूप गरबा में पहनावा और अश्लीलता अधिक बढ़ती जा रही है। इस पर नियंत्रण कर इसके खिलाफ वैचारिक क्रांति का शंखनाद करना होगा। आज समय आ गया है कि हम महापुरुषों के सिद्धांतों का सही प्रतिपादन करें।

संस्कृति में व्याप्त कुरितियों को मिटाने का संकल्प

संतश्री कमलमूनि कमलेश का आर्शीवाद लेने के लिए ब्राम्हण समाज के चेतन जोशी, राजेश पाठक, संजय नीमा, पवन उपाध्याय तथा नीलेश राठौर सहित अन्य समाज के प्रतिष्ठित लोग पहुंचे। सभी ने गुरूदेव के साथ मिलकर संस्कृति में व्याप्त कुरितियों के खिलाफ सामाजिक चेतना का शंखनांद करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय महिला पदाधिकारी कल्पला मुथा, सरोज जैन, संगीता चौरड़िया, महावीर जैन, अजीत खटोड़, राजेश जैन सहित अन्य समाजजन मौजूद थे।