धोखा-धड़ी के मामले मे जेके सीमेंट के प्रबंधक तथा सहायक प्रबंधक के खि़लाफ़ पंजीबद्ध होगा आपराधिक मामला

11:31 pm or November 20, 2022

दीपक शर्मा

पन्ना, 20 नवंबर अभीतक

लंबे समय से विवादों से घिरे जेकेसेम सेंट्रल लिमिटेड के पन्ना जिले की अमानगंज तहसील अंतर्गत हरदुआ केन ग्राम में स्थापित नवनिर्मित सीमेंट प्लांट में पदस्थ दो बड़े रसूखदार अफसरों की मुश्किलें कोर्ट के आदेश के बाद अचानक बढ़ गईं हैं। विशेष न्यायालय पन्ना ने जेके सीमेंट प्लांट हरदुआ केन के मैनेजर एपी सिंह (45) मैनेजर व सहायक मैनेजर संजय सिंह (40) के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने के आदेश दिए हैं। वृद्धा हक्की बाई चौधरी 77 वर्ष के द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद पत्र पर सुनवाई उपरान्त विद्वान विशेष न्यायाधीश आरपी सोनकर ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया है। जेके सीमेंट के दोनों अधिकारियों पर दलित वृद्धा को जाति सूचक शब्द बोलकर गाली-गलौंज करने और धमकाने का आरोप है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए दिनांक 13 दिसंबर 2022 को तारीख़ तय की है।

जिसमें दोनों अभियुक्तगण को पेशी में उपस्थित रहने समंस के माध्यम से सूचना भेजने का आदेश दिया है। इनके खिलाफ प्रस्तुत किया था परिवाद प्रकरण के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार वृद्धा हक्की बाई चौधरी पत्नी हक्का चौधरी 77 वर्ष निवासी ग्राम हरदुआ केन (देवरा) ने अपने अधिवक्ता के साथ विशेष न्यायालय पन्ना में उपस्थित होकर दिनांक 24 नवंबर 2020 को छह आरोपीगण रजनीश रावत पुत्र राधेश्याम रावत 34 वर्ष जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड कानपुर, एपी. सिंह पुत्र राघवेन्द्र सिंह 45 वर्ष मैनजर जेकेसेम निवासी अमानगंज जिला पन्ना, संजय सिंह पुत्र बीपी सिंह 40 वर्ष सहायक मैनेजर जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड हाल निवासी अमानगंज जिला पन्ना, रतन सिंह तत्कालीन तहसीलदार अमानगंज जिला पन्ना, जीवेन्द्र प्रसाद द्विवेदी तत्कालीन उप पंजीयक कार्यालय पन्न एवं मुकेश सोनी हल्का पटवारी हरदुआकेन तहसील अमानगंज जिला पन्ना मप्र के विरुद्ध धारा 427, 294, 323, 419, 420, 467, 468, 447, 506 बी/34 भारतीय दंड संहिता तथा धारा 3(1) (ग), 3 (1) (घ) तथा 3 ( 2 ) ( 5 ) एससी/ एसटी एक्ट के अधीन परिवाद पत्र प्रस्तुत किया था। भूमि की बिक्री में धोखाधड़ी का आरोप वृद्धा हक्की बाई की ओर से पेश किये गए परिवाद में बताया गया है कि उसकी कृषि भूमि रजनीश रावत जेकेसेम सेन्ट्रल लिमिटेड के द्वारा क्रय की गई थी। अभियुक्त रजनीश ने वृद्धा की आराजी नं. 337 एवं 842/2 का वयनामा कंपनी के मुख्तयारआम होने के लिए दिनाक 22 दिसंबर 2018 को निष्पादित कराया था। रजनीश को उक्त आराजी पर सीमेन्ट प्लांट स्थापित करना था। आरोप है कि अभियुक्त ने परिवादिया के अनपढ़ होने का फायदा उठाते हुए उप पंजीयक को प्रभाव में लेकर तथा उससे सांठगांठ कर परिवादिया को बिना बताए आराजी नं. 328/2 रकवा 0.810 हेक्टेयर का वयनामा निष्पादित कर लिया। जिसकी जानकारी परिवादिया हक्की बाई को नहीं थी। उक्त भूमि पर वृद्धा मकान बनाकर परिवार के साथ रहती थी।

जहां उसने पेयजल की सुविधा हेतु बोर करवाया था एवं फलदार वृक्ष लगे थे। खसरा पंचसाला वर्ष 2013-2018 के कॉलम नं. 12 में मकान, बोर और पेड़ दर्ज हैं। इसके बावजूद अभियुक्त रजनीश रावत ने अभियुक्त तत्कालीन उप पंजीयक पन्ना जीवेन्द्र प्रसाद द्विवेदी से सांठगांठ कर उक्त आराजी पर कोई वृक्ष, मकान, कुआं न होना लेख करते हुए वयनामा निष्पादित करवा लिया। परिवादिया को हानि पहुंचाने के आशय से उक्त छल किया गया है। जेके सीमेंट के अधिकारियों ने की थी गाली-गलौंज प्रस्तुत परिवाद पत्र में उल्लेख किया गया है दिनांक 22 अक्टूबर 2020 को अभियुक्त एपी सिंह मैनेजर व संजय सिंह सहायक मैनेजर जेके सीमेंट लिमिटेड ने उसे उक्त आराजी पर से मकान, वृक्ष, बोर हटाने तथा आराजी खाली करने के लिए कहा गया। जिस पर वृद्धा ने बताया उसने आराजी नं. 328/2 विक्रय नहीं की है। यह बात सुनते ही जेके सीमेंट के दोनों अधिकारी भड़क उठे और वृद्धा को अश्लील एवं जातिसूचक गालियां देते हुए बोले तेरी सम्पूर्ण आराजी क्रय की है, ऑफिस आ फिर बताते हैं क्या-क्या कय किया है। परिवादिया गांव के छत्रपाल सिंह, दीपक सिंह एवं अपने पति को लेकर अभियुक्त एपी सिंह व संजय सिंह के के आफिस पहुंची। जहां पता चला कि उन्होंने आराजी क. 328/2 मकान, बोर, पेड़ का नामान्तरण जेके सीमेंट कंपनी के नाम पर करवाकर डायवर्सन भी करवा लिया है।

पुलिस ने शिकायत पर नहीं की कार्रवाई वृद्धा (परिवादिया) ने सीमेंट कंपनी के दोनों गालीबाज अधिकारियों के विरुद्ध थाना अमानगंज में रिपोर्ट की गई। लेकिन उनके रसूख के चलते थाना अमानगंज पुलिस ने परिवादिया की रिपोर्ट लेने से इंकार कर दिया। मामले में अभियुक्त रतन सिंह तत्कालीन तहसीलदार अमानगंज व मुकेश सोनी हल्का पटवारी हरदुआकेन ने उक्त नामांतरण जेकेसेम के नाम से करके परिवादिया को हानि पहुंचाने के आशय से कूटरचना कर छल किया है। अभियुक्तगण पृथक-पृथक अपराध के उत्तरदायी हैं। वृद्धा ने मामले की शिकायत दिनांक 23 अक्टूबर 2020 को पुलिस अधीक्षक पन्ना से भी की थी, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई है। दलित वृद्धा द्वारा न्यायालय से गुहार लगाई गई कि प्रस्तुत परिवाद पर अभियुक्तगण के विरूद्ध पंजीबद्ध किए जाने का आदेश पारित किया जाए।

धोखाधड़ी, छल-कपट और मारपीट नहीं दिए साक्ष्य विशेष न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में उल्लेख है कि परिवादिया एवं उसके द्वारा प्रस्तुत साक्षियों द्वारा समस्त अभियुक्तगण के विरूद्ध धारा 323, 419, 420, 467, 468, 447 भादंसं के संबंध में कोई मौखिक साक्ष्य, जिसमें दस्तावेजों की कूटरचना या अभियुक्तगण द्वारा मारपीट की गई हो, व्यक्त नहीं किया गया है और न ही कूटरचित दस्तावेजों को प्रमाणित किया गया है। इसलिए उपरोक्त धाराओं के विचारण हेतु प्रथम दृष्टया अपराध बनना प्रतीत नहीं होता है। इस कारण समस्त अभियुक्तगण के विरूद्ध धारा 323, 419, 420, 467, 468, 447 भादंसं के अंतर्गत कार्यवाही समाप्त की जाती है। किन्तु अभियुक्त एपी सिंह एवं संजय सिंह के विरूद्ध शेष धारा 294 भादंसं विकल्प में धारा 3(1) (ध) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 धारा 506 (भाग दो) भादंसं विकल्प में धारा 3( 2 ) ( 50 ) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 एवं धारा 427 भादंसं के अधीन अपराध प्रथम दृष्टया बनना प्रकट होता है।