ध्यान के माध्यम से छात्र हर विधा में हो सकते हैं पारंगत : पद्मश्री  डॉ. सेठ

2:28 pm or November 14, 2022

मयंक भार्गव

बैतूल १४ नवंबर ;अभी तक;  भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोककला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पिछले 45 वर्षों से विश्व भर में काम कर रही स्पीक मैके संस्था के संस्थापक अध्यक्ष आईआईटी दिल्ली से रिटायर्ड प्रोफेसर पद्मश्री डॉ. किरण सेठ युवाओं को संस्कृति से जोडऩे के लिए कश्मीर से कन्याकुमारी तक साईकिल यात्रा कर रहे हैं। इसी क्रम में डॉ. किरण सेठ भारत भारती विद्यालय आये और आवासीय विद्यालय के छात्रों से संवाद किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन और वन्दना के साथ किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संगीत अपने आप में एक विज्ञान है। संगीत और योग से विद्यार्थियों को तनावमुक्त रखने के साथ ही उनकी एकाग्रता बढ़ाई जा सकती है। संगीत के महत्व को समझाने के लिए ही हमारी संस्था काम करती है।

शिक्षा के परिपेक्ष्य में डॉ. सेठ ने कहा कि हमारी शिक्षा दो सोपानों में संपन्न होती है जिसमें पारविद्या और अपार विद्या के द्वारा हम शिक्षित होते हैं। पारविद्या के अन्तर्गत हमारे आंतरिक केन्द्रों को जागृत किया जाता है जिसमें ध्यान एक प्रमुख भूमिका निभाता है। वहीं अपार विद्या   के माध्यम से हम हमारे आस-पास के घटनाक्रम, पारिस्थिकी तंत्र, पर्यावरण, भौगोलिक, रासायनिक, तकनीकों के बारे में जान पाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय और आने वाला समय सूचना और तकनीकी क्रांति का होगा। इसके लिए हम आज से ही तैयार रहें। उन्होंने कहा कि हम ध्यान के माध्यम से हर विधा में पारंगत हो सकते हैं। रोबोटिक तकनीक की आवश्यकता और महत्व के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को गणित, रसायनशास्त्र जैसे विषयों का सूक्ष्म अध्ययन करना होगा जिससे हम आने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम रहें और देश के विकास में सहयोग कर सकें। कार्यक्रम में भारत भारती शिक्षा समिति के सचिव मोहन नागर, विद्यालय के प्राचार्य गोविंद कारपेन्टर समेत विद्यालय के शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।