नगर पालिका के क्रियाकलाप कानून कायदों की बजाये बाबू, साहब और परिषद के पदाधिकारियों की मर्जी से चलाये जा रहे

3:40 pm or August 27, 2020
नगर पालिका के क्रियाकलाप कानून कायदों की बजाये बाबू, साहब और परिषद के पदाधिकारियों की मर्जी से चलाये जा रहे

आनंद ताम्रकार

बालाघाट २७ अगस्त ;अभी तक;  नगर पालिका परिषद का कार्य संचालन नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों में निहित नियमों के मुताबिक किया जाना चाहिये लेकिन तत्कालीन परिषद के क्रियाकलापों एवं उसके बाद प्रशासन का कार्यकाल लागू होने के बाद की गतिविधियों का आकलन किया जाये तो ऐसा लगता है की नगर पालिका के क्रियाकलाप कानून कायदों की बजाये बाबू, साहब और परिषद के पदाधिकारियों की मर्जी से चलाये जा रहे है।

अधिनियम के प्रावधानों में अस्थाई लीज पर आबटित भूमि पर किये जाने वाले निर्माण कार्य के सबंध में नियम और शर्तें प्रभावशील है अस्थाई निर्माण कार्यों का स्वरूप कैसे हो इसका स्पष्ट उल्लेख है लेकिन शहर में 1वर्ष की अस्थाई लीजधारियों ने स्वीकृत भूमि पर बहुमंजिली पक्की आरसीसी स्लेब और कालम से भव्य इमारत का अवैध निर्माण कर लिया।

ऐसे निर्माण कार्य करने का प्रावधान नगर पालिका अधिनियम में नही है इसके बावजूद जो पत्यक्ष दिखाई दे रहा है उसको नजरअंदाज करते हुये परिषद के पदाधिकारियों ने बाबूओं और साहबों से मिलीभगत कर निर्माणकर्ताओं से 5 लाख से लेकर 10 लाख रूपये लेकर अवैध निर्माणकर्ताओं को खुला संरक्षण देकर अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत बहुमंजिली इमारतों को बनने दिया गया मीडिया में प्रकाशित हुये समाचारों और लिखित शिकायत किये जाने के बावजूद आज तक अवैध निर्माण करने वालों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नही की गई। अवैध निर्माण का सिलसिला अनवरत जारी है महज नोटिस भेजकर अधिकारी अपनी रस्म अदायेगी कर चुप बैठ गये है।

हमारे शहर में अवैध निर्माण तथा अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही या तो राजनैतिक दुर्भावना के चलते नेताओं के इषारे पर होती है या फिर अधिकारियों की मनमर्जी से होती है। प्रशासन एवं नेताओं के सरक्षण में चल रहे इस गोरखधंधे पर क्या कभी रोक लग पायेगी?

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