नानी-मौसी के हत्यारे को आजीवन कारावास, संपत्ति बंटवारा नही होने से नाराज था आरोपी

मंडला संवाददाता
मंडला २९ दिसंबर ;अभी तक;  वृद्ध महिला चंदोबाई ने अपनी संपत्ति का बंटवारा करने से मना कर दिया । यह बात उसकी सबसे बड़ी पुत्री रुक्मणी के पति संतोष पटेल और पुत्र राजकुमार को इतनी नागवार गुजरी कि राजकुमार ने अपने पिता संतोष और अन्य व्यक्ति हम्मी मरावी के साथ मिलकर अपनी नानी चंदोबाई और उसकी सबसे छोटी पुत्री दुर्गाबाई की कुल्हाड़ी से वीभत्स हत्या कर दी। हाल ही में न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश मंडला निरंजन कुमार पांचाल द्वारा राजकुमार पटेल, संतोष पटेल, हम्मी मरावी को दोहरे हत्या के आरोप में दोषी सिद्ध पाया और उन्हेे आजीवन कारावास एवं जुर्माने केे कठोर दण्ड से दण्डित किया है।
                         दोहरे हत्याकांड का मामला कुछ ऐसा है कि मृतिका चंदोबाई के पति कतकू चन्द्रोल का देहांत हो चुका था। चंदोबाई की कुल पांच पुत्रियां थी जिनका नाम रूकमणी, माया, लक्ष्मी, सीता और दुर्गाबाई था। चंदोबाई की सभी पुत्रियों की शादी हो चुकी थी। दुर्गाबाई, चंदोबाई की सबसे छोटी पुत्री थी जो अपने पति को छोडकर बम्हनी में अपनी मां चंदो के साथ रह रही थी। बम्हनी स्थित घर में चंदोबाई और दुर्गाबाई अकेली रहती थी तथा चंदोबाई की तीसरी पुत्री लक्ष्मीबाई का लडका अवधेश बीच-बीच मे उनके घर आकर उनकी देखभाल करता था। घटना से लगभग दो माह पूर्व चंदोबाई के पति कतकू चंद्रोल की मृत्यु के बाद छ:मासी कार्यक्रम के समय चंदोबाई के सभी दामाद, बहनोई उनके घर पर आए थे जिस समय चंदोबाई की संपत्ति के बटवारे के संबंध में आपस में चर्चा हुई थी। चंदोबाई के बड़ी पुत्री रूकमणी की आर्थिक स्थिति ठीक नही थी। उसके पति संतोष पटेल ने अपने बेरोजगार पुत्र राजकुमार के लिए चंदोबाई से उसके घर के सामने का एक कमरा दुकान खोलने के लिए मांगा गया था। चंदोबाई ने अपने जीते जी अपनी संपत्ति का बटवारा करने से इंनकार कर दिया तथा यह इच्छा व्यक्त की कि, उसकी छोटी पुत्री दुर्गाबाई अकेली है। इस कारण वह अपनी संपत्ति दुर्गाबाई को देगी। साथ ही चंदोबाई यह भी चाहती थी कि सबसे छोटी पुत्री दुर्गाबाई अपनी बहन लक्ष्मीबाई के पुत्र अवधेश को गोद ले ले ताकि चंदो की मृत्यु के बाद दुर्गाबाई को अवधेश का सहारा मिल सके।
                         अपनी नानी चंदोबाई की यह बात राजकुमार को बेहद नागवार गुजरी और उसने अपने पिता संतोष और अभियुक्त हम्मी मरावी के साथ मिलकर दिनांक 25 अक्टूबर 2015 की रात में कुल्हाड़ी से दुर्गाबाई और चंदोबाई की हत्या कर दी और कुल्हाड़ी घटनास्थल के पास रेंज ऑफिस की झाडियों में छिपा दी।
                         हत्याकांड के अगले दिन सुबह जब बम्हनी टीआई जीएस मर्सकोले को जानकारी मिली तो जांच पड़ताल शुरू की। थाना प्रभारी मर्सकोले ने घटनास्थल से खून लगे हुए पर्स के टुकड़े, तकिया, गद्दा, पंलग के निवाड़ को जप्त किया। घटनास्थल पर खूंटी पर टंगा हुआ एक गमछा और शर्ट भी जब्त किया गया। घटनास्थल के निरीक्षण करने पर यह भी पाया गया कि घर के अंदर सामने की परछी में एक पंलग और बिस्तर लगा था तथा आंगन मे बने कमरे में एक चटाई बिछी थी जिस पर एक तकिया रखा हुआ था। घटनास्थल के निरीक्षण करने पर यह भी पाया गया कि घटनास्थल से किसी संपत्ति की चोरी या लूट नही हुई थी। घटनास्थल के निरीक्षण करने पर थाना प्रभारी जी.एस. मर्सकोले इस निष्कर्ष पर पंहुचे कि कोई निकट का रिश्तेदार मृतिकाओं के घर में रात में रूका था और उन्ही के द्वारा घटना को अंजाम दिया गया।
                   5 नवंबर को बम्हनी टीआई मर्सकोले द्वारा संदेह के आधार पर अभियुक्त राजकुमार को अभिरक्षा में लिया गया और  उससे पूछताछ की गयी तब इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा हुआ। न्यायालय द्वारा अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों से सहमत होते हुये अभियुक्त राजकुमार पटेल को धारा 302 भा.द.वि. में आजीवन कारावास व 4000 रू के अर्थदण्ड, अभियुक्त संतोष पटेल को धारा 302 भा.द.वि. में आजीवन कारावास व 4000 रू के अर्थदण्ड एवं हम्मी मरावी को धारा 302 भा.द.वि में आजीवन कारावास व 4000 रू के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।